{"_id":"5f15cc2d8ebc3e637d41be44","slug":"sharada-rever-pilibhit-news-bly4134287118","type":"story","status":"publish","title_hn":"बनबसा बैराज से शारदा नदी में 1.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनबसा बैराज से शारदा नदी में 1.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हुई बारिश से शारदा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। इससे गभिया सहराई से नलडेंगा तक नदी के किनारे बसे लोगों में हड़कंप है। इस इलाके में नदी अब तक 60 एकड़ से अधिक जमीन निगल चुकी है।
बनबसा बैराज से सोमवार शाम करीब पांच बजे शारदा नदी में 1,19,272 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शारदा नदी के जलस्तर में पिछले कुछ दिन से उतार चढ़ाव देखा जा रहा है। बीते सप्ताह भर के अंदर गभिया सहराई से लेकर नलडेंगा और नगरिया खुर्दकलां में नदी कृषि जमीनों का अपना निशाना बना रही है। नदी किनारे कटान प्रभावित इलाकों में शारदा सागर खंड द्वारा बचाव कार्य न कराए जाने के कारण किनारे बसे लोगों ने अपने घरों का सामान समेटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक नदी करीब 60 एकड़ से अधिक कृषि जमीन को काट चुकी है। कटान रोकने के लिए ग्रामीण अपने स्तर से ही खेतों में खड़े पेड़ और झाड़ झंकाड़ काटकर डाल रहे हैं। इसके बावजूद नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। नलडेंगा के ग्रामीणों का कहना है कि यदि वहां बचाव कार्य नहीं किए गए तो इससे मार्जनल बांध को भी खतरा पैदा हो सकता है। इस सबके बीच सोमवार शाम शारदा नदी में छोड़े गए पानी से नदी किनारे बसे लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। शारदा सागर खंड के इंजीनियर मूकदर्शक बने हुए हैं। कटान पीड़ितों की कोई मदद नहीं हो रही है। नदी किनारे बसे गांव वालों का कहना है कि बाढ़ खंड और शारदा सागर खंड के इंजीनियर उनका फोन रिसीव तक नहीं करते हैं। अगर मुसीबत में इनसे किसी मदद की उम्मीद करें तो वह भी संभव नहीं है।
विज्ञापन
बनबसा बैराज से सोमवार शाम करीब पांच बजे शारदा नदी में 1,19,272 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शारदा नदी के जलस्तर में पिछले कुछ दिन से उतार चढ़ाव देखा जा रहा है। बीते सप्ताह भर के अंदर गभिया सहराई से लेकर नलडेंगा और नगरिया खुर्दकलां में नदी कृषि जमीनों का अपना निशाना बना रही है। नदी किनारे कटान प्रभावित इलाकों में शारदा सागर खंड द्वारा बचाव कार्य न कराए जाने के कारण किनारे बसे लोगों ने अपने घरों का सामान समेटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक नदी करीब 60 एकड़ से अधिक कृषि जमीन को काट चुकी है। कटान रोकने के लिए ग्रामीण अपने स्तर से ही खेतों में खड़े पेड़ और झाड़ झंकाड़ काटकर डाल रहे हैं। इसके बावजूद नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। नलडेंगा के ग्रामीणों का कहना है कि यदि वहां बचाव कार्य नहीं किए गए तो इससे मार्जनल बांध को भी खतरा पैदा हो सकता है। इस सबके बीच सोमवार शाम शारदा नदी में छोड़े गए पानी से नदी किनारे बसे लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। शारदा सागर खंड के इंजीनियर मूकदर्शक बने हुए हैं। कटान पीड़ितों की कोई मदद नहीं हो रही है। नदी किनारे बसे गांव वालों का कहना है कि बाढ़ खंड और शारदा सागर खंड के इंजीनियर उनका फोन रिसीव तक नहीं करते हैं। अगर मुसीबत में इनसे किसी मदद की उम्मीद करें तो वह भी संभव नहीं है।
विज्ञापन