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गांव मुजफ्फरनगर में लगा 25 वां शहीद मेला
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Tue, 20 Jan 2015 11:39 PM IST
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गांव के शहीद स्मारक परिसर में लगे मेला मेें शहीद माखन लाल और नत्थू लाल की कुर्बानी पर चर्चा की गई। कहा गया कि दोनों शहीदों की कुर्बानी से क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। गांव के चहुंमुखी विकास की जरूरत है। इसके लिए गांव के लोगों को एकजुट होकर प्रयासोें में जुटना होगा। शहीद मेला में अफसरों के न पहुंचने पर वक्ताओं ने आक्रोश व्यक्त किया। इससे पहले हुई काव्य गोष्ठी में अंशुमाली दीक्षित, श्याम बाबू शुक्ल, जगन्नाथ चकवर्ती ने अपनी रचनाएं पढ़ी। मेला में जिला पंचायत सदस्य किरन लता रस्तोगी, प्रधान विपिन सिंह, अशोक खंडेलवाल, ब्लाक प्रमुख पति अजय भारती, रामवचन राय, अवधेश सिंह, हरीसिंह आदि ने विचार रखे। समारोह की अध्यक्षता सपा नेता आकिल खां अजीजी और संचालन वकील संजय सिंह तोमर ने किया।
प्रशासन की ओर से नहीं पहुंचे अफसर
पूरनपुर। शहीद मेला शुरू में भव्य रूप से तीन दिन तक लगाया जाता था। मेला मेें जिला स्तरीय अफसर जाते थे। पिछले कुछ सालों से तहसील मुख्यालय के अफसर पहुंचे। इस बार मेला में प्रशासन की ओर से अफसर तो दूर राजस्व, विकास विभाग का कोई कर्मचारी तक नहीं पहुंचा। हालांकि हल्का इंचार्ज राजेश सिंह टीम के साथ मौजूद रहे। राजस्व विभाग की ओर से गांव के गरीबों को बांटे जाने वाले कंबल भी इस बार नहीं बंटे। नगर निवासी बृजेश सिंह भदौरिया ने गांव के 10 गरीब लोगों को कंबल, टोपी, मोजा बांटी।
अंडे बेच कर पेट पाल रहा शहीद परिवार
माधोटांडा। कांग्रेस का झंडा बुलंद करने में शहीद हुए माखन लाल के परिवार के लिए प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद से गुरबत की जिंदगी गुजारना नियति बन गया है।
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तहसील पूरनपुर के मुजफ्फरनगर गांव के दो चचेरे भाइयों माखन लाल और नत्थूलाल की 20 जनवरी 1937 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों भाइयों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने तत्कालीन विधानसभा के चुनाव में अंग्रेजी हुकूमत समर्थक राज परिवार के प्रत्याशी के खिलाफ कांग्रेस का झंडा बुलंद किया था। भाइयों की शहादत रंग लाई और कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई थी।
घटना के बाद शहीद माखन लाल के भाई जगदीश और ओमप्रकाश गरीबी के चलते माधोटांडा आ गए थे। देश के आजाद होने पर को शहीद का दर्जा दिया गया था। इन दिनों ओमप्रकाश के पुत्र ठेले पर अंडे बेचकर परिवार पाल रहे हैं तो जगदीश का पुत्र मजदूरी कर भरण पोषण कर रहा है। दोनों भाई कहते है कि शुरू में तो उनकी मां को पेंशन और इंदिरा आवास भी मिला। अब सम्मान भी नहीं मिलता।
यहां बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी 24 मार्च, 89 को दोनों शहीदों की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने गांव आए थे।
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प्रशासन की ओर से नहीं पहुंचे अफसर
पूरनपुर। शहीद मेला शुरू में भव्य रूप से तीन दिन तक लगाया जाता था। मेला मेें जिला स्तरीय अफसर जाते थे। पिछले कुछ सालों से तहसील मुख्यालय के अफसर पहुंचे। इस बार मेला में प्रशासन की ओर से अफसर तो दूर राजस्व, विकास विभाग का कोई कर्मचारी तक नहीं पहुंचा। हालांकि हल्का इंचार्ज राजेश सिंह टीम के साथ मौजूद रहे। राजस्व विभाग की ओर से गांव के गरीबों को बांटे जाने वाले कंबल भी इस बार नहीं बंटे। नगर निवासी बृजेश सिंह भदौरिया ने गांव के 10 गरीब लोगों को कंबल, टोपी, मोजा बांटी।
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अंडे बेच कर पेट पाल रहा शहीद परिवार
माधोटांडा। कांग्रेस का झंडा बुलंद करने में शहीद हुए माखन लाल के परिवार के लिए प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद से गुरबत की जिंदगी गुजारना नियति बन गया है।
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तहसील पूरनपुर के मुजफ्फरनगर गांव के दो चचेरे भाइयों माखन लाल और नत्थूलाल की 20 जनवरी 1937 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों भाइयों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने तत्कालीन विधानसभा के चुनाव में अंग्रेजी हुकूमत समर्थक राज परिवार के प्रत्याशी के खिलाफ कांग्रेस का झंडा बुलंद किया था। भाइयों की शहादत रंग लाई और कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई थी।
घटना के बाद शहीद माखन लाल के भाई जगदीश और ओमप्रकाश गरीबी के चलते माधोटांडा आ गए थे। देश के आजाद होने पर को शहीद का दर्जा दिया गया था। इन दिनों ओमप्रकाश के पुत्र ठेले पर अंडे बेचकर परिवार पाल रहे हैं तो जगदीश का पुत्र मजदूरी कर भरण पोषण कर रहा है। दोनों भाई कहते है कि शुरू में तो उनकी मां को पेंशन और इंदिरा आवास भी मिला। अब सम्मान भी नहीं मिलता।
यहां बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी 24 मार्च, 89 को दोनों शहीदों की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने गांव आए थे।