{"_id":"6a8610f72b37ae9b62041155","slug":"seven-convicted-of-abetment-to-suicide-sentenced-to-ten-years-in-prison-each-pilibhit-news-c-121-1-bdn1036-166945-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: आत्महत्या के लिए उकसाने के सात दोषियों को दस-दस साल कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: आत्महत्या के लिए उकसाने के सात दोषियों को दस-दस साल कैद
विज्ञापन
पीलीभीत। दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाने के नाम पर हुए मानसिक उत्पीड़न के चलते युवक नरेंद्र कुमार को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने सात आरोपियों को दोषी पाते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
अभियोजन के मुताबिक, थाना न्यूरिया क्षेत्र के गांव भोरियाई निवासी सेवाराम ने 12 अक्तूबर 2022 को पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उनके बेटे नरेंद्र पाल को आरोपी आशा देवी व उसके परिवार के लोगों ने दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाकर मानसिक रूप से लगातार परेशान किया। इससे क्षुब्ध होकर नरेंद्र ने आत्महत्या कर ली। जांच के दौरान आत्महत्या से पहले नरेंद्र की ओर से तैयार किया गया सुसाइड नोट और वीडियो सामने आया।
इन दोनों साक्ष्यों में नरेंद्र ने अपनी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी दी थी। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि दुष्कर्म के झूठे मुकदमे के जरिये नरेंद्र पर दबाव बनाया गया और उसे आशा देवी से शादी करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, सुसाइड नोट और वीडियो सहित अन्य सामग्री का परीक्षण करने के बाद नरेंद्र को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाते हुए आशा देवी, रामबहादुर, शांति देवी, दिलीप, ठाकुरदास, ललता प्रसाद और नेमचंद को सजा सुनाई। संवाद
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- --
जजी परिसर में अधिवक्ता पर जानलेवा हमला, पिता-पुत्र को दस-दस साल की सजा
दोनों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना, आधी धनराशि घायल को देने का आदेश, एक आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। करीब दस माह पूर्व मुकदमेबाजी की रंजिश में जजी परिसर में अधिवक्ता ओमपाल वर्मा पर जानलेवा हमला कर गंभीर रूप से घायल करने के मामले में जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार ने दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों को दस-दस वर्ष के कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर उसकी आधी रकम घायल ओमपाल वर्मा को नियमानुसार दिए जाने का आदेश दिया गया। वहीं, एक अन्य आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, थाना बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम बरखड़ी निवासी रामेश्वर दयाल ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि गांव के बृजनंदन आदि से उनके मुकदमे चल रहे हैं और इसी को लेकर आरोपी रंजिश मानते थे। उनका भाई ओमपाल वर्मा बीसलपुर तहसील में विधि व्यवसाय करते हैं। 14 अक्तूबर 2025 को सुबह करीब साढ़े नौ बजे ओमपाल वर्मा जजी परिसर में सिविल बार एसोसिएशन के बाहर सड़क पर अपने अधिवक्ता अजय कुमार लल्ला की सीट पर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। आरोप है कि तभी पहले से घात लगाए बैठे बृजनंदन, सुरेंद्र कुमार और जसपाल ने बदला लेने की नीयत से उन्हें घेर लिया और बांके से कई वार कर दिए। हमले में ओमपाल वर्मा के दोनों हाथों और सिर में गंभीर चोटें आईं। वह लहूलुहान होकर मौके पर गिर पड़े। कचहरी परिसर में मौजूद मुवक्किलों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें हमलावरों से बचाया।
घटना परिसर में लगे सीसी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई थी। घायल को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बरेली के हायर सेंटर रेफर कर दिया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बृजनंदन और उसके पुत्र सुरेंद्र कुमार को दोषी ठहराते हुए दस-दस वर्ष के कारावास तथा 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, जसपाल के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
विज्ञापन
अभियोजन के मुताबिक, थाना न्यूरिया क्षेत्र के गांव भोरियाई निवासी सेवाराम ने 12 अक्तूबर 2022 को पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उनके बेटे नरेंद्र पाल को आरोपी आशा देवी व उसके परिवार के लोगों ने दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाकर मानसिक रूप से लगातार परेशान किया। इससे क्षुब्ध होकर नरेंद्र ने आत्महत्या कर ली। जांच के दौरान आत्महत्या से पहले नरेंद्र की ओर से तैयार किया गया सुसाइड नोट और वीडियो सामने आया।
विज्ञापन
इन दोनों साक्ष्यों में नरेंद्र ने अपनी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी दी थी। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि दुष्कर्म के झूठे मुकदमे के जरिये नरेंद्र पर दबाव बनाया गया और उसे आशा देवी से शादी करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, सुसाइड नोट और वीडियो सहित अन्य सामग्री का परीक्षण करने के बाद नरेंद्र को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाते हुए आशा देवी, रामबहादुर, शांति देवी, दिलीप, ठाकुरदास, ललता प्रसाद और नेमचंद को सजा सुनाई। संवाद
विज्ञापन
जजी परिसर में अधिवक्ता पर जानलेवा हमला, पिता-पुत्र को दस-दस साल की सजा
दोनों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना, आधी धनराशि घायल को देने का आदेश, एक आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। करीब दस माह पूर्व मुकदमेबाजी की रंजिश में जजी परिसर में अधिवक्ता ओमपाल वर्मा पर जानलेवा हमला कर गंभीर रूप से घायल करने के मामले में जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार ने दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों को दस-दस वर्ष के कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर उसकी आधी रकम घायल ओमपाल वर्मा को नियमानुसार दिए जाने का आदेश दिया गया। वहीं, एक अन्य आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, थाना बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम बरखड़ी निवासी रामेश्वर दयाल ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि गांव के बृजनंदन आदि से उनके मुकदमे चल रहे हैं और इसी को लेकर आरोपी रंजिश मानते थे। उनका भाई ओमपाल वर्मा बीसलपुर तहसील में विधि व्यवसाय करते हैं। 14 अक्तूबर 2025 को सुबह करीब साढ़े नौ बजे ओमपाल वर्मा जजी परिसर में सिविल बार एसोसिएशन के बाहर सड़क पर अपने अधिवक्ता अजय कुमार लल्ला की सीट पर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। आरोप है कि तभी पहले से घात लगाए बैठे बृजनंदन, सुरेंद्र कुमार और जसपाल ने बदला लेने की नीयत से उन्हें घेर लिया और बांके से कई वार कर दिए। हमले में ओमपाल वर्मा के दोनों हाथों और सिर में गंभीर चोटें आईं। वह लहूलुहान होकर मौके पर गिर पड़े। कचहरी परिसर में मौजूद मुवक्किलों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें हमलावरों से बचाया।
घटना परिसर में लगे सीसी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई थी। घायल को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बरेली के हायर सेंटर रेफर कर दिया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बृजनंदन और उसके पुत्र सुरेंद्र कुमार को दोषी ठहराते हुए दस-दस वर्ष के कारावास तथा 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, जसपाल के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।