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राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय बनाने में 12 करोड़ खर्च हुए पर नौनिहालों को नहीं मिल सकी शिक्षा
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माधोटांडा में स्थित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भवन।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। माधोटांडा की बालिकाओं के लिए राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय अब एक सपना बनकर रह गए हैं। यह स्थिति तब है जब शासन 12 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। फिनिशिंग के कार्य के लिए चार करोड़ रुपये का आवंटन नहीं होने की वजह से तीन वर्ष से काम ठप है।
वर्ष 2015 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। राज्य सरकार के तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद ने माधोटांडा के लिए राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय का शिलान्यास किया था। उस समय पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पीतम राम थे। शिलान्यास के शिलालेख पर उनका नाम है। यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड संस्था को भवन निर्माण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पर अब तक 12 करोड़ रुपये खर्च हो गए। एस्टीमेट संशोधित करते हुए करीब चार करोड़ रुपये शासन से मांगे गए हैं जिसका आवंटन नहीं हो सका है। इसीलिए काम ठप है। अधूरी पड़ी इमारत की देखरेख के लिए चौकीदार रखा गया है।
प्रोेजेक्ट को वर्ष 2015 में मंजूरी मिली थी लेकिन निर्माण कार्य वर्ष 2016-0217 में शुरू हुआ। जब काम शुरू हुआ तब पहले वैट लगता था। जीएसटी का प्रावधान नहीं। जीएसटी लागू हुआ तो एस्टीमेट रिवाइज्ड किया गया। कुछ महंगाई भी बढ़ी। जिससे प्रोजेक्ट को पूरा करने का खर्च 16 करोड़ तक पहुंच गई। धनराशि न मिलने से काम ठप है। वैसे 85 फीसदी तक काम हो चुका है। अब फिनिशिंग में रंगाई-पुताई, साइट डेवलेपमेंट, ग्रिल आदि, सेनेट्री की फिटिंग आदि काम होने हैं। अब तक इस निर्माण में 12 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। अब 4 करोड़ रुपये और चाहिए। संस्था की ओर से शासन स्तर से धनराशि हासिल करके काम पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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- आरके सिकरवार, सहायक अभियंता, यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड
राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय बनना है। भवन तो बन गया है लेकिन अभी पूर्ण नहीं है। हमें वह भवन नहीं मिला है। कार्यदायी संस्था को चार करोड़ रुपये चाहिए। जब शासन से धनराशि आएगी तब काम पूरा होगा और उसके बाद ही विद्यालय का संचालन हो सकेगा।
- श्रीप्रकाश पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी, पीलीभीत
कब क्या हुआ
06 मई 2015 को राज्य सरकार के तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री ने शिलान्यास किया
06 जुलाई 2018 को एस्टीमेट संशोधित हुआ और लागत 1587.60 लाख बढ़कर 1606.64 लाख रुपये पहुंची अब 393.77 लाख रुपये न मिलने की वजह से 2018 से काम बंद है, क्षेत्र के लोग स्कूल संचालित होने का कर रहे हैं इंतजार
12 अक्तूबर 2020 को निदेशक समाज कल्याण ने समाज कल्याण विभाग के अनुसचिव को पत्र भेजकर धनराशि के आवंटन आग्रह किया
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वर्ष 2015 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। राज्य सरकार के तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद ने माधोटांडा के लिए राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय का शिलान्यास किया था। उस समय पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पीतम राम थे। शिलान्यास के शिलालेख पर उनका नाम है। यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड संस्था को भवन निर्माण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पर अब तक 12 करोड़ रुपये खर्च हो गए। एस्टीमेट संशोधित करते हुए करीब चार करोड़ रुपये शासन से मांगे गए हैं जिसका आवंटन नहीं हो सका है। इसीलिए काम ठप है। अधूरी पड़ी इमारत की देखरेख के लिए चौकीदार रखा गया है।
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प्रोेजेक्ट को वर्ष 2015 में मंजूरी मिली थी लेकिन निर्माण कार्य वर्ष 2016-0217 में शुरू हुआ। जब काम शुरू हुआ तब पहले वैट लगता था। जीएसटी का प्रावधान नहीं। जीएसटी लागू हुआ तो एस्टीमेट रिवाइज्ड किया गया। कुछ महंगाई भी बढ़ी। जिससे प्रोजेक्ट को पूरा करने का खर्च 16 करोड़ तक पहुंच गई। धनराशि न मिलने से काम ठप है। वैसे 85 फीसदी तक काम हो चुका है। अब फिनिशिंग में रंगाई-पुताई, साइट डेवलेपमेंट, ग्रिल आदि, सेनेट्री की फिटिंग आदि काम होने हैं। अब तक इस निर्माण में 12 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। अब 4 करोड़ रुपये और चाहिए। संस्था की ओर से शासन स्तर से धनराशि हासिल करके काम पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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- आरके सिकरवार, सहायक अभियंता, यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड
राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय बनना है। भवन तो बन गया है लेकिन अभी पूर्ण नहीं है। हमें वह भवन नहीं मिला है। कार्यदायी संस्था को चार करोड़ रुपये चाहिए। जब शासन से धनराशि आएगी तब काम पूरा होगा और उसके बाद ही विद्यालय का संचालन हो सकेगा।
- श्रीप्रकाश पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी, पीलीभीत
कब क्या हुआ
06 मई 2015 को राज्य सरकार के तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री ने शिलान्यास किया
06 जुलाई 2018 को एस्टीमेट संशोधित हुआ और लागत 1587.60 लाख बढ़कर 1606.64 लाख रुपये पहुंची अब 393.77 लाख रुपये न मिलने की वजह से 2018 से काम बंद है, क्षेत्र के लोग स्कूल संचालित होने का कर रहे हैं इंतजार
12 अक्तूबर 2020 को निदेशक समाज कल्याण ने समाज कल्याण विभाग के अनुसचिव को पत्र भेजकर धनराशि के आवंटन आग्रह किया