{"_id":"6ab18dda68b4b503f60c2ab1","slug":"safety-measures-in-schools-are-merely-a-token-formality-children-and-staff-are-left-to-rely-on-just-one-or-two-security-personnel-pilibhit-news-c-121-1-pbt1009-169316-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: स्कूलों में सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति, एक-दो सुरक्षाकर्मी के भरोसे बच्चे और स्टाफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: स्कूलों में सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति, एक-दो सुरक्षाकर्मी के भरोसे बच्चे और स्टाफ
विज्ञापन
उपाधि काॅलेज का खुले गेट पर नदारद सुरक्षाकर्मी। संवाद
पीलीभीत। लखीमपुर के निजी स्कूल में गोलीबारी की घटना के बाद विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को पीलीभीत शहर के सरकारी और निजी विद्यालयों में सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल की गई तो कई जगह व्यवस्थाएं कमजोर नजर आईं। कहीं सुरक्षा गार्ड महज औपचारिकता निभाते दिखे तो कहीं मुख्य गेट पर सुरक्षाकर्मी ही मौजूद नहीं थे। ऐसे में सैकड़ों बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, एक विद्यालय में दो पुलिसकर्मी तैनात मिले।
शहर में सरकारी और निजी मिलाकर करीब 50 विद्यालय हैं। इनमें हजारों बच्चे पढ़ाई करते हैं और प्रत्येक विद्यालय में औसतन 20 से 30 शिक्षकों का स्टाफ रहता है। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए विद्यालयों में सीसी कैमरे लगाने, मुख्य गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात करने और स्कूल आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से पूछताछ कर उसका विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद पड़ताल में इन व्यवस्थाओं के पालन को लेकर कई सवाल सामने आए। निजी विद्यालयों में कुछ स्थानों पर सुरक्षा गार्ड तैनात दिखाई दिए। हालांकि, कहीं गार्ड खाली बैठे मिले तो कहीं उनके हाथ में केवल डंडा था। सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता, आगंतुकों की जांच और निगरानी की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट नहीं हो सकी।
-- -- -
उपाधि कॉलेज में गेट पर नहीं मिला सुरक्षाकर्मी, जीजीआईसी में दिखे पुलिसकर्मी
सोमवार को निजी विद्यालयों के अलावा उपाधि कॉलेज और जीजीआईसी समेत अन्य शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था भी देखी गई। उपाधि कॉलेज का मुख्य गेट खुला मिला। गेट पर कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। इसके पास ही कुछ छात्राएं और उनके अभिभावक दिखाई दिए। लोगों की आवाजाही पर रोक-टोक या आगंतुकों की जांच की कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आई। इसी मार्ग पर स्थित जीजीआईसी का मुख्य गेट भी खुला मिला। यहां एक महिला और एक पुरुष पुलिसकर्मी की मौजूदगी दिखाई दी। हालांकि, गेट से लोगों की आवाजाही बिना किसी स्पष्ट रोक-टोक के जारी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि विद्यालयों में तैनात सुरक्षा कर्मियों और पुलिसकर्मियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
विज्ञापन
-- --
सीसी कैमरों और आगंतुकों के विवरण पर भी सवाल
विद्यालयों में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और मुख्य गेट पर आने-जाने वाले लोगों की जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। निजी विद्यालयों में इन व्यवस्थाओं के पालन के दावे किए जाते हैं, लेकिन अन्य सहायता प्राप्त और सरकारी विद्यालयों में आगंतुकों के विवरण दर्ज करने और गेट की निगरानी को लेकर मौके पर एकरूपता नजर नहीं आई। संवाद
-- --
थाना पुलिस के अलावा महिला पुलिस की टीमें स्कूलों में भ्रमण करती हैं और आसपास नियमित रूप से भ्रमणशील रहती हैं। इसकी क्रॉस निगरानी भी की जाती है। स्कूलों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। स्कूल प्रबंधन को भी हिदायत दी जाती है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- सुकीर्ति माधव, एसपी
विज्ञापन
शहर में सरकारी और निजी मिलाकर करीब 50 विद्यालय हैं। इनमें हजारों बच्चे पढ़ाई करते हैं और प्रत्येक विद्यालय में औसतन 20 से 30 शिक्षकों का स्टाफ रहता है। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए विद्यालयों में सीसी कैमरे लगाने, मुख्य गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात करने और स्कूल आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से पूछताछ कर उसका विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद पड़ताल में इन व्यवस्थाओं के पालन को लेकर कई सवाल सामने आए। निजी विद्यालयों में कुछ स्थानों पर सुरक्षा गार्ड तैनात दिखाई दिए। हालांकि, कहीं गार्ड खाली बैठे मिले तो कहीं उनके हाथ में केवल डंडा था। सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता, आगंतुकों की जांच और निगरानी की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट नहीं हो सकी।
विज्ञापन
उपाधि कॉलेज में गेट पर नहीं मिला सुरक्षाकर्मी, जीजीआईसी में दिखे पुलिसकर्मी
सोमवार को निजी विद्यालयों के अलावा उपाधि कॉलेज और जीजीआईसी समेत अन्य शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था भी देखी गई। उपाधि कॉलेज का मुख्य गेट खुला मिला। गेट पर कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। इसके पास ही कुछ छात्राएं और उनके अभिभावक दिखाई दिए। लोगों की आवाजाही पर रोक-टोक या आगंतुकों की जांच की कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आई। इसी मार्ग पर स्थित जीजीआईसी का मुख्य गेट भी खुला मिला। यहां एक महिला और एक पुरुष पुलिसकर्मी की मौजूदगी दिखाई दी। हालांकि, गेट से लोगों की आवाजाही बिना किसी स्पष्ट रोक-टोक के जारी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि विद्यालयों में तैनात सुरक्षा कर्मियों और पुलिसकर्मियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
विज्ञापन
सीसी कैमरों और आगंतुकों के विवरण पर भी सवाल
विद्यालयों में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और मुख्य गेट पर आने-जाने वाले लोगों की जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। निजी विद्यालयों में इन व्यवस्थाओं के पालन के दावे किए जाते हैं, लेकिन अन्य सहायता प्राप्त और सरकारी विद्यालयों में आगंतुकों के विवरण दर्ज करने और गेट की निगरानी को लेकर मौके पर एकरूपता नजर नहीं आई। संवाद
थाना पुलिस के अलावा महिला पुलिस की टीमें स्कूलों में भ्रमण करती हैं और आसपास नियमित रूप से भ्रमणशील रहती हैं। इसकी क्रॉस निगरानी भी की जाती है। स्कूलों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। स्कूल प्रबंधन को भी हिदायत दी जाती है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- सुकीर्ति माधव, एसपी

उपाधि काॅलेज का खुले गेट पर नदारद सुरक्षाकर्मी। संवाद