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ग्रामीण-पुलिस संघर्ष में बिलसंडा थाने से हटी विवेचना, बीसलपुर स्थानांतरित
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पीलीभीत। भीकमपुर गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच संघर्ष मामले में भाजपा विधायक रामसरन वर्मा द्वारा इस्तीफे की चेतावनी देने के बाद भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद पुलिस विभाग के अफसर हरकत में आ गए। एएसपी ने जांच शुरू करने के बाद विधायक से भी इस मुद्दे पर बात की। एएसपी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले की विवेचना बिलसंडा थाने से हटा दी गई है। अब भीकमपुर विवाद की विवेचना बीसलपुर कोतवाली पुलिस करेगी और अफसर उसकी मॉनिटरिंग करेंगे।
बिलसंडा थाना क्षेत्र के भीकमपुर गांव में छह मई की रात लॉकडाउन का पालन कराने के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच संघर्ष हो गया था। पुलिस ने गांव निवासी फौजी समेत 23 नामजद, 50 अज्ञात पर 18 धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी, जबकि गांव के 11 लोगों को दूसरे ही दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर उनका चालान कर दिया था। ये सभी आरोपी अभी जेल में हैं। बताया जाता है कि फौजी सुनील कुमार के जेल जाने के बाद कुछ सेना के अफसर भी पुलिस-प्रशासन से संपर्क में हैं। वे अपने जवान को छुड़ाने के लिए प्रयासरत हैं।
उधर, भाजपा विधायक बीसलपुर रामसरन वर्मा ग्रामीणों के समर्थन में सामने आ गए थे। उन्होंने इस मामले में पुलिस कार्रवाई को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल उठाए थे और पुलिस पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को फोन कर शिकायत की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अगर इस मामले में पुलिस पर कार्रवाई नहीं हुई और गांव वालों को न्याय नहीं मिला तो वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। भाजपा प्रदेश नेतृत्व की ओर से हस्तक्षेप के बाद एसपी अभिषेक दीक्षित ने शनिवार शाम को पूरे मामले की जांच करने के लिए एएसपी रोहित मिश्र को बीसलपुर भेजा था। सूत्रों के अनुसार एएसपी की विधायक रामसरन वर्मा से भी इस मामले में काफी देर तक बातचीत चली। इसके बाद भी फिलहाल अभी इस मामले का ठोस समाधान नहीं हो सका है। इतना जरूर है कि बिलसंडा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद एसपी ने विवेचना वहां से हटा दी है। अब इस पूरे प्रकरण की विवेचना कोतवाली बीसलपुर से कराई जाएगी।
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बिलसंडा थाने के एसएसआई लाइनहाजिर
रविवार को बिलसंडा थाने के एसएसआई इख्तियार हुसैन को थाने से हटाकर पुलिस लाइन में भेज दिया गया। इस कार्रवाई को भीकमपुर प्रकरण से जोड़कर देखा जाने लगा। विधायक रामसरन वर्मा ने भी इसी प्रकरण में एसएसआई को लाइन हाजिर किए जाने की बात कही। मगर पुलिस अधिकारियों की ओर से स्पष्ट किया गया कि ड्यूटी में लापरवाही समेत अन्य आरोपों में एसएसआई इख्तियार हुसैन की गोपनीय जांच कराई गई थी। बीसलपुर के सीओ से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें लाइन भेजा गया है। उनकी जगह दरोगा रामकुमार लहरी को बिलसंडा भेजा गया है। इसके अलावा दरोगा हरिवंश कुमार को गजरौला और राजीव कुमार को न्यूरिया थाने में तैनाती दी गई है।
विधायक गिनाते रहे कार्रवाई, अफसर बोले -अभी ऐसा कुछ नहीं
भीकमपुर मामले में विधायक रामसरन वर्मा रविवार को पुलिस कर्मियों पर हुई कार्रवाई होने की बात बताते रहे। वहीं अधिकारियों ने फिलहाल ऐसा कुछ होने से इनकार किया है। विधायक ने कहा कि चारों सिपाही भी लाइन हाजिर हो गए हैं, मगर, अधिकारियों से स्पष्ट किया गया कि कोई सिपाही लाइन हाजिर नहीं किया गया। विधायक वर्मा ने अमर उजाला से फोन पर कहा कि घटना में शामिल चार सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। वहीं उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए शासन स्तर तक जाऊंगा। मुख्यमंत्री से इस पूरे प्रकरण पर बात की जाएगी।
एसएसआई बिलसंडा की गोपनीय जांच हुई थी। इसकी रिपोर्ट मिलने पर उन्हें पुलिस लाइन स्थानांतरित किया है। भीकमपुर मामले में किसी सिपाही पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। निष्पक्ष कार्रवाई के लिए विवेचना बीसलपुर ट्रांसफर कर दी गई है। - अभिषेक दीक्षित, एसपी
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बिलसंडा थाना क्षेत्र के भीकमपुर गांव में छह मई की रात लॉकडाउन का पालन कराने के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच संघर्ष हो गया था। पुलिस ने गांव निवासी फौजी समेत 23 नामजद, 50 अज्ञात पर 18 धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी, जबकि गांव के 11 लोगों को दूसरे ही दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर उनका चालान कर दिया था। ये सभी आरोपी अभी जेल में हैं। बताया जाता है कि फौजी सुनील कुमार के जेल जाने के बाद कुछ सेना के अफसर भी पुलिस-प्रशासन से संपर्क में हैं। वे अपने जवान को छुड़ाने के लिए प्रयासरत हैं।
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उधर, भाजपा विधायक बीसलपुर रामसरन वर्मा ग्रामीणों के समर्थन में सामने आ गए थे। उन्होंने इस मामले में पुलिस कार्रवाई को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल उठाए थे और पुलिस पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को फोन कर शिकायत की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अगर इस मामले में पुलिस पर कार्रवाई नहीं हुई और गांव वालों को न्याय नहीं मिला तो वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। भाजपा प्रदेश नेतृत्व की ओर से हस्तक्षेप के बाद एसपी अभिषेक दीक्षित ने शनिवार शाम को पूरे मामले की जांच करने के लिए एएसपी रोहित मिश्र को बीसलपुर भेजा था। सूत्रों के अनुसार एएसपी की विधायक रामसरन वर्मा से भी इस मामले में काफी देर तक बातचीत चली। इसके बाद भी फिलहाल अभी इस मामले का ठोस समाधान नहीं हो सका है। इतना जरूर है कि बिलसंडा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद एसपी ने विवेचना वहां से हटा दी है। अब इस पूरे प्रकरण की विवेचना कोतवाली बीसलपुर से कराई जाएगी।
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बिलसंडा थाने के एसएसआई लाइनहाजिर
रविवार को बिलसंडा थाने के एसएसआई इख्तियार हुसैन को थाने से हटाकर पुलिस लाइन में भेज दिया गया। इस कार्रवाई को भीकमपुर प्रकरण से जोड़कर देखा जाने लगा। विधायक रामसरन वर्मा ने भी इसी प्रकरण में एसएसआई को लाइन हाजिर किए जाने की बात कही। मगर पुलिस अधिकारियों की ओर से स्पष्ट किया गया कि ड्यूटी में लापरवाही समेत अन्य आरोपों में एसएसआई इख्तियार हुसैन की गोपनीय जांच कराई गई थी। बीसलपुर के सीओ से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें लाइन भेजा गया है। उनकी जगह दरोगा रामकुमार लहरी को बिलसंडा भेजा गया है। इसके अलावा दरोगा हरिवंश कुमार को गजरौला और राजीव कुमार को न्यूरिया थाने में तैनाती दी गई है।
विधायक गिनाते रहे कार्रवाई, अफसर बोले -अभी ऐसा कुछ नहीं
भीकमपुर मामले में विधायक रामसरन वर्मा रविवार को पुलिस कर्मियों पर हुई कार्रवाई होने की बात बताते रहे। वहीं अधिकारियों ने फिलहाल ऐसा कुछ होने से इनकार किया है। विधायक ने कहा कि चारों सिपाही भी लाइन हाजिर हो गए हैं, मगर, अधिकारियों से स्पष्ट किया गया कि कोई सिपाही लाइन हाजिर नहीं किया गया। विधायक वर्मा ने अमर उजाला से फोन पर कहा कि घटना में शामिल चार सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। वहीं उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए शासन स्तर तक जाऊंगा। मुख्यमंत्री से इस पूरे प्रकरण पर बात की जाएगी।
एसएसआई बिलसंडा की गोपनीय जांच हुई थी। इसकी रिपोर्ट मिलने पर उन्हें पुलिस लाइन स्थानांतरित किया है। भीकमपुर मामले में किसी सिपाही पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। निष्पक्ष कार्रवाई के लिए विवेचना बीसलपुर ट्रांसफर कर दी गई है। - अभिषेक दीक्षित, एसपी