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Pilibhit News: मोबाइल के ऑनलाइन गेमिंग में बढ़ते स्कोर बच्चों का छीन रहे बचपन, हो रहे चिड़चिड़े

Tue, 08 Sep 2026 11:43 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Tue, 08 Sep 2026 11:43 PM IST
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Rising mobile online gaming scores are robbing children of their childhood and making them irritable.
डॉक्टर प्रियंका भटनागर।
पीलीभीत। मोबाइल की लत अब बच्चों का बचपन छीन रही है। मेडिकल कॉलेज में हर रोज चार से पांच बच्चों की काउंसिलिंग के लिए माता-पिता आ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका भटनागर बताती हैं कि बच्चों में ऐसी लत तब लगती है जब माता-पिता बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते। इससे बच्चा मोबाइल फोन से जुड़ जाता है। घर में बच्चे दिन-रात ऑनलाइन गेमिंग के जरिये वर्चुअल वर्ल्ड में चले जाते हैं, जहां पर ऑनलाइन गेमिंग में बहुत से ऐसे गेम हैं जिसका स्कोर क्रॉस करने पर बच्चों को अवॉर्ड या फिर बैक मनी मिलती है।
डॉ. प्रियंका का कहना है कि ऐसी स्थिति में जब बच्चों से उनका मोबाइल माता-पिता छीनते हैं तो उनको ऐसा महसूस होता है कि वह उसको मिल रहे वर्चुअल सम्मान के आड़े आ रहे हैं, जिसको लेकर कई बार वह माता-पिता के ही विरुद्ध हो जाते हैं।
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केस- 1
मोबाइल छीनने पर हमलावर हो गया
जिला अस्पताल पहुंची एक मां ने मनोरोग विभाग के परामर्श में बताया कि उनका बच्चा सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा था व आदर्शवादी था। लेकिन पिछले छह माह से यह दिन में लगभग आठ घंटे मोबाइल चलाता है व रात में एक बजे तक मोबाइल में गेम व सोशल मीडिया से जुड़ा रहता है जब एक बार उसका मोबाइल रात में छीना तो वह हमलावर भी हो गया।
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केस- 2
स्कूल ले जाने लगा मोबाइल, टीचर पर हुआ हमलावर
अस्पताल के मनोरोग विभाग में परामर्श के लिए एक शिकायत पहुंची। इसमें बताया कि एक बच्चा जिसकी ऑनलाइन क्लास फोन पर चलती थी वह बैग में मोबाइल छिपाकर स्कूल ले जाने लगा। जब एक दिन क्लास में उनकी शिक्षिका ने उसको मोबाइल में गेम खेलते पकड़ लिया तो उन्होंने मोबाइल छीन लिया। इस बीच वह अपनी शिक्षिका से भी अभद्र व्यवहार करते क्लास में देखा गया।
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बच्चों के काउंसिलिंग में यह मिल रहीं शिकायतें
-उत्तेजित व्यवहार और शैक्षिक संघर्ष गंभीर समस्या बनकर सामने आ रहा है।
-वर्चुअल दुनिया में रहने के कारण बच्चे वास्तविकता से दूर हो रहे हैं।
-ऐसे में बच्चे सामाजिक माहौल में घुल-मिल नहीं पा रहे हैं
-वे छोटी-छोटी बातों में गुस्सैल स्वभाव, गालियां और मारपीट करने लगते हैं।
-उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। मासिक टेस्ट में कम नंबर आ रहे हैं।
-छोटी-छोटी बातों पर अन्य बच्चों से लड़ने की शिकायतें आ रही हैं।
ये करें उपाय
-बच्चों को सप्ताह में एक बार घुमाने ले जाएं।
-बच्चे के साथ अधिक समय व्यतीत करें।
-अपना समय बचाने के लिए बच्चे को फोन न दें।
-बच्चों का खेलों में रुझान बढ़ाएं।
-सीमित समय तक फोन का उपयोग करना सिखाएं।
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