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‘कट्टरपंथी विचारधारा के स्रोतों पर लगे प्रतिबंध’
अमर उजाला ब्यूरो पूरनपुर।
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:15 PM IST
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कट्टरपंथी विचारधारा
- फोटो : अमर उजाला
आल इंडिया उलमा, मशाइख बोर्ड ने सौंपा ज्ञापन
आल इंडिया उलमा एवं मशाइख बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने नूर मोहम्मद हसनी के नेतृत्व मेें एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जाकिर नाईक के भाषणों के साथ कट्टरपंथी विचारधारा के तमाम स्रोतों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि ऑल इंडिया उलमा और मशाइख बोर्ड सुन्नी सूफी मुसलमानों का एक शीर्ष संगठन है। जाकिर नाईक ने इस्लामी उपदेशक के रूप में अपने भाषणों और पीस टीवी जैसे सार्वजनिक प्लेटफार्म का दुरुपयोग कर कट्टरपंथी विचार धारा (जो इस्लाम के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है) के प्रचार के साथ युवाओं को भड़काने का कार्य किया है। ज्ञापन में टीवी चैनल और जाकिर नाईक के भाषणों के साथ कट्टरपंथी विचारधारा के तमाम स्रोतों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय मुसलमान शांति, भाईचारा और आपसी प्रेम में विश्वास करते हैं। इस्लाम के नाम पर किसी को भी कट्टरपंथी विचारधारा की मान्यता नहीं दी जा सकती। ज्ञापन देने वालों में नूर मोहम्मद हसनी, हाजी लाडले, मोहम्मद मियां खां, अहीद खां आदि शामिल थे।
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आल इंडिया उलमा एवं मशाइख बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने नूर मोहम्मद हसनी के नेतृत्व मेें एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जाकिर नाईक के भाषणों के साथ कट्टरपंथी विचारधारा के तमाम स्रोतों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि ऑल इंडिया उलमा और मशाइख बोर्ड सुन्नी सूफी मुसलमानों का एक शीर्ष संगठन है। जाकिर नाईक ने इस्लामी उपदेशक के रूप में अपने भाषणों और पीस टीवी जैसे सार्वजनिक प्लेटफार्म का दुरुपयोग कर कट्टरपंथी विचार धारा (जो इस्लाम के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है) के प्रचार के साथ युवाओं को भड़काने का कार्य किया है। ज्ञापन में टीवी चैनल और जाकिर नाईक के भाषणों के साथ कट्टरपंथी विचारधारा के तमाम स्रोतों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय मुसलमान शांति, भाईचारा और आपसी प्रेम में विश्वास करते हैं। इस्लाम के नाम पर किसी को भी कट्टरपंथी विचारधारा की मान्यता नहीं दी जा सकती। ज्ञापन देने वालों में नूर मोहम्मद हसनी, हाजी लाडले, मोहम्मद मियां खां, अहीद खां आदि शामिल थे।
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