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Pilibhit News: जुलाई में प्रसव का टूटा रिकॉर्ड, डिलीवरी भी ऑपरेशन से ज्यादा
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पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल में प्रसव के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। गर्मी और बारिश के बीच मई से जुलाई तक प्रसव की संख्या में करीब 42 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। मई में जहां 361 प्रसव हुए थे, वहीं जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर 514 पहुंच गया। यानी तीन महीने में कुल प्रसव 153 बढ़ गए। जुलाई में सामान्य प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन की संख्या काफी अधिक रही। इस महीने 296 महिलाओं की डिलीवरी ऑपरेशन से हुई, जबकि सामान्य प्रसव की संख्या 218 रही। बढ़ती प्रसूताओं की संख्या के साथ अब जिला महिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ने लगा है।
अस्पताल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में 156 सामान्य प्रसव और 205 सी-सेक्शन समेत कुल 361 प्रसव हुए थे। जून में सामान्य प्रसव की संख्या बढ़कर 204 और सी-सेक्शन 226 हो गए। इस महीने कुल 430 प्रसव हुए। जुलाई में प्रसव की संख्या में और तेजी आई और कुल 514 प्रसव दर्ज किए गए। इनमें 218 सामान्य और 296 सी-सेक्शन शामिल हैं।
मई और जुलाई के आंकड़ों की तुलना करें तो कुल प्रसव 361 से बढ़कर 514 हो गए। यानी तीन महीने में करीब 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मई के मुकाबले जुलाई में 153 अधिक प्रसव हुए। सामान्य प्रसव में 62 और सी-सेक्शन में 91 की बढ़ोतरी हुई। यानी कुल बढ़ोतरी में ऑपरेशन से होने वाले प्रसव का हिस्सा अधिक रहा। संवाद
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जुलाई में सामान्य प्रसव से 78 ज्यादा ऑपरेशन
जुलाई के आंकड़े सबसे ज्यादा चिंता पैदा करने वाले हैं। कुल 514 प्रसव में 296 सी-सेक्शन हुए, जबकि सामान्य प्रसव केवल 218 रहे। इस तरह सामान्य प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन की संख्या 78 अधिक रही। मई और जून में भी ऑपरेशन से प्रसव सामान्य प्रसव से ज्यादा थे।
मई में भी ऑपरेशन ज्यादा
मई में कुल 361 प्रसव में 205 सी-सेक्शन और 156 सामान्य प्रसव हुए थे। यानी सामान्य प्रसव के मुकाबले 49 अधिक महिलाओं की डिलीवरी ऑपरेशन से हुई। जून में 430 प्रसव में 226 सी-सेक्शन और 204 सामान्य प्रसव हुए। जून में अंतर घटकर 22 रह गया, लेकिन जुलाई में एक बार फिर सी-सेक्शन की संख्या तेजी से बढ़ी।
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ऑपरेशन की बढ़ती संख्या भी बनी सवाल
सामान्य प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन की संख्या अधिक होना भी चर्चा का विषय है। मई में कुल प्रसव में ऑपरेशन की संख्या 205 थी, जून में 226 और जुलाई में 296 पहुंच गई। हालांकि किसी महिला का सी-सेक्शन कराना चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करता है, लेकिन ऑपरेशन की बढ़ती संख्या के बीच अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, दवाओं और रिकवरी वार्ड जैसी सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है।
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वर्जन-
जिला महिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अश्वनी का कहना है कि सामान्य प्रसव पर हमेशा जोर दिया जाता है। मरीज की स्थिति के अनुसार ही प्रसव चिकित्सक करते हैं।
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अस्पताल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में 156 सामान्य प्रसव और 205 सी-सेक्शन समेत कुल 361 प्रसव हुए थे। जून में सामान्य प्रसव की संख्या बढ़कर 204 और सी-सेक्शन 226 हो गए। इस महीने कुल 430 प्रसव हुए। जुलाई में प्रसव की संख्या में और तेजी आई और कुल 514 प्रसव दर्ज किए गए। इनमें 218 सामान्य और 296 सी-सेक्शन शामिल हैं।
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मई और जुलाई के आंकड़ों की तुलना करें तो कुल प्रसव 361 से बढ़कर 514 हो गए। यानी तीन महीने में करीब 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मई के मुकाबले जुलाई में 153 अधिक प्रसव हुए। सामान्य प्रसव में 62 और सी-सेक्शन में 91 की बढ़ोतरी हुई। यानी कुल बढ़ोतरी में ऑपरेशन से होने वाले प्रसव का हिस्सा अधिक रहा। संवाद
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जुलाई में सामान्य प्रसव से 78 ज्यादा ऑपरेशन
जुलाई के आंकड़े सबसे ज्यादा चिंता पैदा करने वाले हैं। कुल 514 प्रसव में 296 सी-सेक्शन हुए, जबकि सामान्य प्रसव केवल 218 रहे। इस तरह सामान्य प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन की संख्या 78 अधिक रही। मई और जून में भी ऑपरेशन से प्रसव सामान्य प्रसव से ज्यादा थे।
मई में भी ऑपरेशन ज्यादा
मई में कुल 361 प्रसव में 205 सी-सेक्शन और 156 सामान्य प्रसव हुए थे। यानी सामान्य प्रसव के मुकाबले 49 अधिक महिलाओं की डिलीवरी ऑपरेशन से हुई। जून में 430 प्रसव में 226 सी-सेक्शन और 204 सामान्य प्रसव हुए। जून में अंतर घटकर 22 रह गया, लेकिन जुलाई में एक बार फिर सी-सेक्शन की संख्या तेजी से बढ़ी।
ऑपरेशन की बढ़ती संख्या भी बनी सवाल
सामान्य प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन की संख्या अधिक होना भी चर्चा का विषय है। मई में कुल प्रसव में ऑपरेशन की संख्या 205 थी, जून में 226 और जुलाई में 296 पहुंच गई। हालांकि किसी महिला का सी-सेक्शन कराना चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करता है, लेकिन ऑपरेशन की बढ़ती संख्या के बीच अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, दवाओं और रिकवरी वार्ड जैसी सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है।
वर्जन-
जिला महिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अश्वनी का कहना है कि सामान्य प्रसव पर हमेशा जोर दिया जाता है। मरीज की स्थिति के अनुसार ही प्रसव चिकित्सक करते हैं।