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सवाल: तमाम संसाधन और तीन रेंजों की टीमें छान रही खाक, आखिर कहां चली गई लंगड़ी बाघिन

Thu, 15 May 2025 12:24 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Thu, 15 May 2025 12:24 AM IST
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Question: All the resources and teams from three ranges are searching for the best, where did the lame tigress go?
फखरूल इस्लाम
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पीलीभीत। दो हाथी, 30 कैमरों, तीन थर्मल ड्रोन की मदद से 10 दिन से जंगल में खाक छान रहीं तीन वन रेंजों की टीम को लंगड़ी बाघिन का कहीं कोई पता नहीं लग सका। दावा किया गया कि बाघिन की चहलकदमी वाले सभी संभावित स्थानों को भी देखा गया, लेकिन उसकी मौजूदगी दिखाई नहीं दी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर चलने में असमर्थ दिखाई देने वाले बाघिन कहां चली गई। अफसर निगरानी के दावों तक बयानबाजी करने तक सीमित हैं।



पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में तीन मई को बाघिन का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में बाघिन पैर में दिक्कत होने से चलने में काफी असमर्थ दिख रही थी। धीमी चाल उसकी परेशानी की गवाही दे रही थी। पैर में दिक्कत होने से शिकार न कर पाने से उसके कमजोर होने की बात भी सामने आई थी। वीडियो वायरल होने के बाद पीटीआर के अफसरों ने उसकी निगरानी शुरू की थी। 24 घंटे के अंदर उसको पकड़ने के लिए अनुमति भी ले ली गई थी। इसके बाद दो हाथी, 30 कैमरे और तीन थर्मल ड्रोन की मदद से निगरानी को शुरू किया था। स्थिति को देखते हुए अपर पीसीसीएफ प्रोजेक्ट टाइगर ललित कुमार ने भी दौरा कर जानकारी जुटाकर जरूरी निर्देश दिए थे। इसके बाद निगरानी का दायरा बढ़ाकर महोफ के अलावा बराही और माला रेंज की टीमों को भी लगाया गया। दावा किया गया कि टीमें दिन और रात निगरानी कर बाघिन की मौजूदगी का पता लगाने के प्रयासों में जुटी हैं, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी विभाग के हाथ खाली है। लंगड़ी बाघिन का कहीं कोई सुराग नहीं लग सका। अफसर निगरानी के दायरे बढ़ाने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में तमाम संसाधन की मदद से तीन रेंजों की टीम के जंगल में नियमित निगरानी के बावजूद बाघिन के दिखाई न देने से सवाल खड़े होने लगे हैं। संवाद
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तीन पैरों पर चलने पर मजबूर बाघिन को शिकार में होगी परेशानी



जानकारों की मानें तो पीटीआर में तीन मई को सामने आए वीडियो में बाघिन चलने में काफी असमर्थ दिख रही थी। उसकी परेशानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह 16 सैकेंड के वीडियो में तीन पैरों से बेहद धीमी गति से चलती दिखाई दे रही हैं। जिसके चलते पैर से कमजोर बाघिन शिकार करने में भी असमर्थ होगी। जानकारों का मानना है कि परिस्थितियों के आधार पर बाघ-बाघिन पांच-छह दिन तक तो भूखे रह सकते हैं। इससे अधिक समय में वह शिकार के लिए जरूर प्रयास करते हैं। ऐसे में बाघिन की लंबे समय तक मौजूदगी न दिखना चिंता का विषय है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि तीन मई को वीडियो वायरल होने के बाद पीटीआर प्रशासन को जानकारी हुई। उससे पूर्व बाघिन कब से समस्या से घिरी होगी, इस बात का भी किसी को कोई अंदाजा नहीं है।
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पीटीआर में नहीं मिली मौजूदगी, सुरई रेंज की ओर पहुंची नजरें

पीटीआर के अफसराें ने कई दिनों के नियमित प्रयास के बाद बाघिन की मौजूदगी न मिलने पर सुरई रेंज प्रशासन से संपर्क किया। संयुक्त रूप से गश्त कर बाघिन की तलाश की। इसके साथ ही लगातार नजर बनाए रखने को पत्र भी लिखा है। हालांकि बाघिन की कहीं कोई मौजूदगी दिखाई न देने की बात कही जा रही है।








टीमें संसाधनों की मदद से लगातार निगरानी कर रही हैं। हालांकि बाघिन का कोई सुराग नहीं लग सका है। मंगलवार को सुरई रेंज प्रशासन से भी पत्राचार कर निगरानी बरतने को कहा गया। टीमों ने संयुक्त रूप से गश्त भी की। बाघिन को तलाश करने के लिए प्रयास जारी हैं। - भरत कुमार डीके, डीएफओ
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