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Pilibhit News: जंगल मार्गों पर रात में यात्रा के प्रतिबंध के आदेश का विरोध तेज
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डीएम को ज्ञापन देते आमआदमी पार्टी के पदाधिकारी। स्रोत संगठन
पीलीभीत। जिले में पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) से गुजरने वाले जंगल मार्गों पर रात में प्रतिबंध लगाने के आदेश को लेकर विरोध तेज हो गया है। राजनीति पार्टियों के अलावा किसान संगठन भी विरोध में सामने आने लगे हैं। शुक्रवार को भाकियू चढ़ूनी और आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन दिया। डीएम से वार्तालाप कर आदेश को वापस करने की मांग रखी।
आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष अमित मिश्रा ने पदाधिकारियों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से मुलाकात की। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि जिले के पूरनपुर-पीलीभीत, पूरनपुर-खटीमा मार्ग के अलावा पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग जिले के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल हैं। ये मार्ग जनपद मुख्यालय को प्रदेश की राजधानी लखनऊ, नेपाल सीमा, उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमा व प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ते हैं। उत्तराखंड के प्रसिद्ध मां पूर्णागिरि मंदिर, नानकमत्ता गुरुद्वारा, रीठा साहिब आदि स्थानों से होते हुए लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में एनटीसीए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर पीटीआर की ओर से लगाए इन मार्गों पर रात को लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के आदेश से किसान, व्यापारी, छात्र, नौकरीपेशा समेत अन्य लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
आदेश से आमजन में असुरक्षा एवं भय का वातावरण उत्पन्न हो रहा है। कृषि, व्यापार, पर्यटन एवं स्थानीय आवागमन पर सीधा नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऐसे में आदेश को वापस लेने और उसमें व्यावहारिक संशोधन करने की कृपा की मांग की गई। इस दौरान जिला महासचिव एडवोकेट संजय कुमार, जिलाध्यक्ष पंचायत प्रकोष्ठ विनोद कुमार भारती, नगर अध्यक्ष युवा इकाई राघव गिहार, प्रवेश, संजय, इंदरजीत, रिंकू दिवाकर, मनोज, सूरज आदि उपस्थित रहे । संवाद
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भाकियू नेता बोले, आदेश वापस नहीं हुआ तो आंदोलन को होंगे बाध्य
पीलीभीत। जंगल क्षेत्र से जुड़े रास्तों को बंद करने के आदेश के विरोध में शुक्रवार को भाकियू चढूनी के पदाधिकारी जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह कहलो के नेतृत्व में डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से मिले। ज्ञापन में कहा गया कि जंगल से गुजरने वाले कई रास्तों को रात में बंद करने के आदेश से किसान, ग्रामीण समेत अन्य जरूरतों से संबंधित आवाजाही करने वालों के लिए परेशानी बढ़ेगी। किसानों ने इन रास्तों को रात में बंद करने का आदेश वापस लेने की मांग की। ऐसा न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई। इसके अलावा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के चारों ओर फेंसिंग कराने की मांग उठाई गई। बताया गया कि वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व घोषित होने के समय फेंसिंग कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो सका है। गजरौला, कलीनगर सहित जंगल से सटे गांवों के आसपास शीघ्र फेंसिंग कराने की मांग की गई। किसानों ने बताया कि नीलगाय, भालू सहित अन्य जंगली जानवर खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था करने और नुकसान होने पर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है। डीएम ने जल्द ही समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पदाधिकारी वापस लौटे। इस मौके पर ब्लॉक अध्यक्ष मंगल सिंह, तहसील प्रभारी मनदीप सिंह,
ब्लॉक प्रभारी त्रिलोचन सिंह, तहसील सचिव जितेंद्र सिंह, गुरप्रीत सिंह, जसवंत सिंह, सुरेंद्र शर्मा, जाहिद खान आदि मौजूद रहे। डीएम ने आश्वासन दिया कि नौ मार्च को इस संबंध में बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें वन विभाग के अलावा किसान, ग्रामीण आदि मौजूद रहेंगे। संवाद
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जंगल के रास्तों से आवागमन पर रोक का आदेश वापस कराने की मांग
पूरनपुर। ओबीसी महासभा के प्रदेश सचिव संतराम विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जंगल के रास्तों पर रात को आवागमन रोकने के आदेश को वापस कराकर रास्तों पर तार फेंसिंग कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जंगल के रास्तों पर रात को आवागमन रोकने से किसानों सहित सभी वर्गों को भारी असुविधा होगी। किसान फसलों की बिक्री को ले जाने में समस्या होगी। पत्र में जंगल के रास्तों से रात को आवागमन के आदेश को वापस कराकर जंगल से निकलने वाले रास्तों पर तार फेसिंग कराने की मांग की गई। संवाद
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आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष अमित मिश्रा ने पदाधिकारियों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से मुलाकात की। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि जिले के पूरनपुर-पीलीभीत, पूरनपुर-खटीमा मार्ग के अलावा पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग जिले के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल हैं। ये मार्ग जनपद मुख्यालय को प्रदेश की राजधानी लखनऊ, नेपाल सीमा, उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमा व प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ते हैं। उत्तराखंड के प्रसिद्ध मां पूर्णागिरि मंदिर, नानकमत्ता गुरुद्वारा, रीठा साहिब आदि स्थानों से होते हुए लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में एनटीसीए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर पीटीआर की ओर से लगाए इन मार्गों पर रात को लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के आदेश से किसान, व्यापारी, छात्र, नौकरीपेशा समेत अन्य लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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आदेश से आमजन में असुरक्षा एवं भय का वातावरण उत्पन्न हो रहा है। कृषि, व्यापार, पर्यटन एवं स्थानीय आवागमन पर सीधा नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऐसे में आदेश को वापस लेने और उसमें व्यावहारिक संशोधन करने की कृपा की मांग की गई। इस दौरान जिला महासचिव एडवोकेट संजय कुमार, जिलाध्यक्ष पंचायत प्रकोष्ठ विनोद कुमार भारती, नगर अध्यक्ष युवा इकाई राघव गिहार, प्रवेश, संजय, इंदरजीत, रिंकू दिवाकर, मनोज, सूरज आदि उपस्थित रहे । संवाद
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भाकियू नेता बोले, आदेश वापस नहीं हुआ तो आंदोलन को होंगे बाध्य
पीलीभीत। जंगल क्षेत्र से जुड़े रास्तों को बंद करने के आदेश के विरोध में शुक्रवार को भाकियू चढूनी के पदाधिकारी जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह कहलो के नेतृत्व में डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से मिले। ज्ञापन में कहा गया कि जंगल से गुजरने वाले कई रास्तों को रात में बंद करने के आदेश से किसान, ग्रामीण समेत अन्य जरूरतों से संबंधित आवाजाही करने वालों के लिए परेशानी बढ़ेगी। किसानों ने इन रास्तों को रात में बंद करने का आदेश वापस लेने की मांग की। ऐसा न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई। इसके अलावा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के चारों ओर फेंसिंग कराने की मांग उठाई गई। बताया गया कि वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व घोषित होने के समय फेंसिंग कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो सका है। गजरौला, कलीनगर सहित जंगल से सटे गांवों के आसपास शीघ्र फेंसिंग कराने की मांग की गई। किसानों ने बताया कि नीलगाय, भालू सहित अन्य जंगली जानवर खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था करने और नुकसान होने पर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है। डीएम ने जल्द ही समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पदाधिकारी वापस लौटे। इस मौके पर ब्लॉक अध्यक्ष मंगल सिंह, तहसील प्रभारी मनदीप सिंह,
ब्लॉक प्रभारी त्रिलोचन सिंह, तहसील सचिव जितेंद्र सिंह, गुरप्रीत सिंह, जसवंत सिंह, सुरेंद्र शर्मा, जाहिद खान आदि मौजूद रहे। डीएम ने आश्वासन दिया कि नौ मार्च को इस संबंध में बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें वन विभाग के अलावा किसान, ग्रामीण आदि मौजूद रहेंगे। संवाद
जंगल के रास्तों से आवागमन पर रोक का आदेश वापस कराने की मांग
पूरनपुर। ओबीसी महासभा के प्रदेश सचिव संतराम विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जंगल के रास्तों पर रात को आवागमन रोकने के आदेश को वापस कराकर रास्तों पर तार फेंसिंग कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जंगल के रास्तों पर रात को आवागमन रोकने से किसानों सहित सभी वर्गों को भारी असुविधा होगी। किसान फसलों की बिक्री को ले जाने में समस्या होगी। पत्र में जंगल के रास्तों से रात को आवागमन के आदेश को वापस कराकर जंगल से निकलने वाले रास्तों पर तार फेसिंग कराने की मांग की गई। संवाद