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बिजली संशोधन विधेयक के विरोध में कल से काली पट्टी बांधेंगे कर्मी
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पीलीभीत। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक पावर कॉरपोरेशन के नकटादाना सब स्टेशन पर एसडीओ कार्यालय में हुई। इसमें बिजली संशोधन विधेयक 2020 और निजीकरण का पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया गया। एक जून को पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपने कार्यस्थल पर ही विरोध करेंगे। दोपहर तीन बजे से पांच बजे के बीच सामाजिक दूरी का पालन करते हुए रोडवेज के पास अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में सभा की जाएगी।
संयोजक दीपक नेगी ने कहा कि बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 और निजीकरण से खासकर किसानों और 300 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले गरीब उपभोक्ताओं को बिल के प्रतिगामी परिणामों से अवगत कराने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। नया विधेयक लागू होने से किसानों और गरीबों को बिजली दरों पर मिल रही सब्सिडी समाप्त हो जाएगी। किसी भी उपभोक्ता को लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी। वर्तमान में बिजली की लागत 6.78 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि निजीकरण एक्ट के बाद यह आठ रुपये से कम नहीं रहेगी। यह भी बताया कि ऐसे में किसानों को प्रतिमाह छह हजार रुपये और घरेलू उपभोक्ताओं को आठ हजार रुपये प्रतिमाह बिल देना होगा। इसे जन और कर्मचारी विरोधी बताते हुए विरोध का एलान किया गया। एसडीओ टाउन अतुल कुमार, जेई जहांगीर आलम, ओमकार, रवि सैनी, नरायन लाल आदि मौजूद रहे।
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संयोजक दीपक नेगी ने कहा कि बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 और निजीकरण से खासकर किसानों और 300 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले गरीब उपभोक्ताओं को बिल के प्रतिगामी परिणामों से अवगत कराने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। नया विधेयक लागू होने से किसानों और गरीबों को बिजली दरों पर मिल रही सब्सिडी समाप्त हो जाएगी। किसी भी उपभोक्ता को लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी। वर्तमान में बिजली की लागत 6.78 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि निजीकरण एक्ट के बाद यह आठ रुपये से कम नहीं रहेगी। यह भी बताया कि ऐसे में किसानों को प्रतिमाह छह हजार रुपये और घरेलू उपभोक्ताओं को आठ हजार रुपये प्रतिमाह बिल देना होगा। इसे जन और कर्मचारी विरोधी बताते हुए विरोध का एलान किया गया। एसडीओ टाउन अतुल कुमार, जेई जहांगीर आलम, ओमकार, रवि सैनी, नरायन लाल आदि मौजूद रहे।
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