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नोटबंदी से प्रचार सामग्री के कारोबार में छायी मंदी
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Fri, 06 Jan 2017 11:16 PM IST
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नोटबंदी से प्रचार सामग्री के कारोबार में छायी मंदी
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जैसा कि पहले से अनुमान लगाया जा रहा था, चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर में ही नोटबंदी का साफ असर पड़ता दिखाई दे रहा है। हालत यह है कि पिछले चुनावों में जहां महीनों पहले से प्रचार सामग्री के ऑर्डर दे दिए जाते थे, वहीं इस बार चुनाव की घोषणा होने के बाद भी यह कारोबार ठंडा पड़ा हुआ है। नोटबंदी के साथ सपा की रार और भाजपा के प्रत्याशी तय न होने का असर भी चुनाव प्रचार पर पड़ा है। यही वजह है कि प्रचार सामग्री का निर्माण करने वाले कारोबारियों के यहां फिलहाल सन्नाटा छाया हुआ है। नोटबंदी और कई दलों के टिकटों की घोषणा न होने की वजह से प्रत्याशी और टिकटों के दावेदार प्रचार सामग्री बनवाने के बजाय फिलहाल अपने क्षेत्र में जाकर जनसंपर्क करने को ही ज्यादा बेहतर मान रहे हैं। बसपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा तो पहले ही कर दी थी लेकिन सूची जारी होने की वजह से उन्हें अभी तक टिकट बदले जाने का डर था, लिहाजा उन्होंने भी प्रचार सामग्री छपवाने ऑर्डर रुकवा दिए थे। उधर, सपा नेतृत्व में चल रहे घमासान के कारण तीन सीटों पर दो-दो प्रत्याशियों की घोषणा की गई है। इनमें न यह तय है कि कौन चुनाव लड़ेगा, कौन नहीं और न यह कि प्रचार सामग्री पर पार्टी का सिंबल इस्तेमाल होगा या नहीं, लिहाजा सपा के प्रत्याशियों ने भी अभी तक प्रचार सामग्री के लिए ऑर्डर नहीं दिए हैं। यही वजह है कि शहर के प्रमुख प्रिंटिंग कारोबारी इस बार कारोबार काफी मंदा रहने की उम्मीद जता रहे हैं।
क्या कहते हैं प्रिंटिंग कारोबारी
यह जाहिर है कि नोटबंदी के चलते कारोबार पर पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार काफी असर पड़ेगा। कारोबार मंदा होने का दूसरा कारण यह है कि प्रमुख पार्टियों में प्रत्याशियों के टिकट क्लियर नहीं हुए हैं, जिसकी वजह से अभी कोई आर्डर नहीं दे रहा है। आचार संहिता लागू होने से नववर्ष की शुभकामना संदेश के लिए मिलने वाले ऑर्डर भी बंद हो गए हैं। नवनीत गुप्ता, नवनीत प्रिटिंग प्रेस
नामांकन के बाद हालात सुधरने के आसार
जब तक प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हो जाती, तब तक आर्डर आने की उम्मीद नहीं है। नामांकन के बाद ही स्थिति में सुधार हो सकेगा। कुछ पुराने आर्डर बसपा के थे लेकिन प्रत्याशियों ने अभी तक उनको रुकवा रखा था। चुनाव प्रचार सामग्री पर इस बार नोटबंदी का भी काफी असर रहेगा।
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अखिलेश शुक्ला, आकाश प्रिंटिंग प्रेस
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क्या कहते हैं प्रिंटिंग कारोबारी
यह जाहिर है कि नोटबंदी के चलते कारोबार पर पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार काफी असर पड़ेगा। कारोबार मंदा होने का दूसरा कारण यह है कि प्रमुख पार्टियों में प्रत्याशियों के टिकट क्लियर नहीं हुए हैं, जिसकी वजह से अभी कोई आर्डर नहीं दे रहा है। आचार संहिता लागू होने से नववर्ष की शुभकामना संदेश के लिए मिलने वाले ऑर्डर भी बंद हो गए हैं। नवनीत गुप्ता, नवनीत प्रिटिंग प्रेस
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नामांकन के बाद हालात सुधरने के आसार
जब तक प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हो जाती, तब तक आर्डर आने की उम्मीद नहीं है। नामांकन के बाद ही स्थिति में सुधार हो सकेगा। कुछ पुराने आर्डर बसपा के थे लेकिन प्रत्याशियों ने अभी तक उनको रुकवा रखा था। चुनाव प्रचार सामग्री पर इस बार नोटबंदी का भी काफी असर रहेगा।
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अखिलेश शुक्ला, आकाश प्रिंटिंग प्रेस