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आंखों को अच्छे लगते हों मगर बीमारी की सौगात भी देते हैं आतिशबाजी के रंग

Wed, 04 Nov 2020 11:25 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2020 11:25 PM IST
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Pollution problem
पीलीभीत। दिवाली पर आतिशबाजी की सतरंगी रोशनी कुछ पल के लिए भले ही भाती हो, मगर इनके रंग कैंसर जैसे घातक रोग भी पनपने के कारण बन जाते हैं। दरअसल पटाखों से निकलने वाली रंग बिरंगी रोशनी के लिए अलग-अलग केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। यह केमिकल जलने के बाद रंग बिरंगी रोशनी तो देते हैं, मगर इनसे निकलने वाली गैसें चर्म रोग समेत दूसरी बीमारियों का कारण बनती हैं।
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सुख और समृद्धि के पर्व दिवाली पर उत्साह उमंग स्वाभाविक है। इस हर्षोल्लास मेें लोग रम चुके हैं कि उन्हें प्रकृति से हो रहा खिलवाड़ भी नजर नहीं आता। दिवाली की रात आतिशबाजी को लेकर होड़ सी रहती है। यदि पड़ोसी ने चार राकेट दाग दिए तो दूसरा पड़ोसी खुद को उससे ज्यादा साधन संपन्न मानकर पूरी गली में ही चटाई बम बिछाकर आग लगा देता है। फलस्वरूप करीब 10 से 15 मिनट तक तेज धमाकों के साथ पूरी गली धुएं से भर जाती है। इससे गली में रहने वाले बच्चे और बुजुर्ग ही नहीं बल्कि इसका खामियाजा पूरे शहर को प्रदूषण के रूप में भुगतना पड़ता है।
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रंगीन रोशनी वाले पटाखे ज्यादा खतरनाक
पटाखों को रंगीन बनाने के लिए जिन केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, वह स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में लोगों को मौका कोई भी हो आतिशबाजी से बचना चाहिए। उपाधि महाविद्यालय के रसायन प्रवक्ता डॉ. विजय अग्रवाल के मुताबिक रॉकेट और अनार बम में लाल रंग के लिए सीजियम नाइट्रेट, हरे रंग के लिए बेरियम नाइट्रेट, पीले रंग के लिए सोडियम नाइट्रेट, नीले रंग के लिए डायक्सिन, नारंगी रंग के लिए सोडियम क्लोराइट आदि प्रयोग में लाया जाता है। यह सभी जलने के बाद गैस में परिवर्तित होते हैं। इससे छोटे बच्चों की वृद्धि, त्वचा पर चकत्ते, सांस लेने में तकलीफ, कैंसर, अल्जाइमर, ब्लडप्रेशर, किडनी संबंधी रोगों की आशंका रहती है।
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मौजूदा परिस्थितियों को देखते हमें हानिकारक पटाखों के इस्तेमाल से बचना होगा। विशेषज्ञ प्रदूषण बढ़ने पर कोरोना बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। पर्यावरण को साफ सुथरा रखने के लिए हानिकारक पटाखों के इस्तेमाल से परहेज करें। - सतीश कुमार शर्मा
महानगरों के अलावा अब प्रदूषण छोटे शहरों में बढ़ने लगा है। इसकी वजह यह है कि लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक नहीं हैं। दिवाली में चंद पल की खुशी के लिए इसे जहरीला बना देते हैं। लोगों को प्रदूषण रहित दिवाली मनानी चाहिए और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए। - कंहैयालाल, व्यापारी
पटाखों से नुकसान के अलावा हमें मिलता ही क्या है। पटाखों पर खर्च होने वाली रकम से हम घर की सजावट कर सकते हैं। जोकि चंद पल के पटाखों की तेज धमक से कहीं देर तक रोशन होते हैं। इससे वातावरण भी शुद्ध होता है। - देवव्रत शर्मा, व्यापारी

यह सच है कि पटाखों से निकलने वाली रंग बिरंगी रोशनी के लिए इसमें डायक्सिन जैसे हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। इससे पैदा होने वाले गैसें वातावरण को जहरीला बनाने के साथ कैंसर जैसे गंभीर रोगों को भी पनपने का मौका देती हैं। वर्तमान स्थिति में प्रदूषण रहित दिवाली ही मनाना उचित होगा। - डॉ. विपिन साहनी, चिकित्सक
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