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बैकफुट पर पुलिस : भीकमपुर में ग्रामीणों से संघर्ष में एफआईआर से हटाईं गंभीर धाराएं
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पीलीभीत। भीकमपुर गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए संघर्ष के मामले में बीसलपुर के भाजपा विधायक रामसरन वर्मा के पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने का कुछ असर अब विवेचना में दिखा है। जानलेवा हमले की धारा के साथ ही लोकसेवक को कर्तव्यों में बाधा पहुंचाने की धाराएं विवेचना के दौरान हटा दी गई हैं। घायल बताए गए पुलिसकर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट को इसका आधार बताया गया है। दस साल की सजा वाली दो संगीन धाराएं हटने से मामले में फंसे ग्रामीणों को कुछ राहत मिलना तय है।
बिलसंडा थाना क्षेत्र के भीकमपुर गांव में छह मई को लॉकडाउन का पालन कराने के दौरान पुलिस और ग्रामीणों में संघर्ष हुआ था। इस मामले में पुलिस ने जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा, महामारी अधिनियम, लोकसेवक को भय दिखाकर क्षति पहुंचाने समेत 18 धाराओं में 22 नामजद और 50 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज की थी। जम्मू कश्मीर में सेना में तैनात फौजी सुनील कुमार, झम्मनलाल, खेमकरन, दिनेश, देवेंद्र, उत्तम कुमार, महेश कुमार, संजीव, अमरपाल, धर्मवीर, छत्रपाल समेत 11 आरोपी जेल भेजे गए थे। ये सभी जमानत पर रिहा हो चुके हैं।
इस बीच विधायक रामसरन वर्मा ने ग्रामीणों का समर्थन करते हुए पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही निष्पक्ष कार्रवाई न होने पर इस्तीफे तक की चेतावनी दी थी। विवेचना थाना बिलसंडा से हटाकर बीसलपुर कोतवाली भेज दी गई थी। इसके बाद अब इस मामले में आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। दो संगीन धाराओं 307, 333 को विवेचना के दौरान हटा दिया। इन दोनों धाराओं में 10 साल की सजा का प्रावधान है। अब यदि आगे कोई और गिरफ्तार होता है तो उनके जेल जाने की नौबत नहीं आएगी। इस कार्रवाई को लेकर भले ही पुलिस का तर्क अलग हो, मगर इसे सीधे तौर पर विधायक के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।
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मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धारा 307 और 333 हटाई गई है। विवेचना अभी चल रही है। फिल्हाल अभी किसी का नाम नहीं हटाया गया है। निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। - अभय कुमार पांडेय, विवेचक
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बिलसंडा थाना क्षेत्र के भीकमपुर गांव में छह मई को लॉकडाउन का पालन कराने के दौरान पुलिस और ग्रामीणों में संघर्ष हुआ था। इस मामले में पुलिस ने जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा, महामारी अधिनियम, लोकसेवक को भय दिखाकर क्षति पहुंचाने समेत 18 धाराओं में 22 नामजद और 50 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज की थी। जम्मू कश्मीर में सेना में तैनात फौजी सुनील कुमार, झम्मनलाल, खेमकरन, दिनेश, देवेंद्र, उत्तम कुमार, महेश कुमार, संजीव, अमरपाल, धर्मवीर, छत्रपाल समेत 11 आरोपी जेल भेजे गए थे। ये सभी जमानत पर रिहा हो चुके हैं।
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इस बीच विधायक रामसरन वर्मा ने ग्रामीणों का समर्थन करते हुए पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही निष्पक्ष कार्रवाई न होने पर इस्तीफे तक की चेतावनी दी थी। विवेचना थाना बिलसंडा से हटाकर बीसलपुर कोतवाली भेज दी गई थी। इसके बाद अब इस मामले में आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। दो संगीन धाराओं 307, 333 को विवेचना के दौरान हटा दिया। इन दोनों धाराओं में 10 साल की सजा का प्रावधान है। अब यदि आगे कोई और गिरफ्तार होता है तो उनके जेल जाने की नौबत नहीं आएगी। इस कार्रवाई को लेकर भले ही पुलिस का तर्क अलग हो, मगर इसे सीधे तौर पर विधायक के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।
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मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धारा 307 और 333 हटाई गई है। विवेचना अभी चल रही है। फिल्हाल अभी किसी का नाम नहीं हटाया गया है। निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। - अभय कुमार पांडेय, विवेचक