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Pilibhit News: महिलाओं के कपड़े पहनकर भागे थे पुलिस अधिकारी
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बीसलपुर। आतंकवाद के दौरान सर्किल के एक पुलिस निरीक्षक और उपनिरीक्षक आतंकवादियों से जान बचाने के लिए महिलाओं के कपड़े पहनकर भागे थे।
90 के दशक में जब जिले में आतंकवाद चरम पर था। तब सर्किल के एक थाने में तैनात निरीक्षक स्तर के अधिकारी और एक उप निरीक्षक आतंकवादियों की सुरागरसी करने के लिए जंगल किनारे स्थित एक झाले पर शाम के समय गए थे। उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी झाले से दूर खड़ी कर दी थी। चालक और हमराही सिपाहियों को छोड़कर पैदल झाले पहुंचे थे।
पुलिस अधिकारी झाला स्वामी से वार्ता कर ही रहे थे। इसी समय आतंकवादी आ गए और उन्होंने गेट की कुंडी खटखटाई। कुंडी खटकते ही झाला स्वामी समझ गया कि आतंकवादी आ गए हैं। झाला स्वामी ने पुलिस अधिकारियों को इशारे में बताया कि बाबा लोग आ गए हैं। उस समय स्थानीय सिख आतंकवादियों को बाबा कहते थे। झाला स्वामी ने बड़ी फुर्ती से पुलिस अधिकारियों को कमरे में ले जाकर बैठा दिया।
उसके बाद झाला स्वामी ने गेट की कुंडी खोल दी और आतंकवादियों को पूरे सम्मान के साथ बरामदे में लाकर बैठा दिया। जलपान करने की व्यवस्था के नाम पर झाला स्वामी कमरे में गया और पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे लोग महिलाओं के कपड़े पहन कर और हाथ में पानी भरा लोटा लेकर निकल जाएं। ताकि आतंकवादी समझें कि घर की महिलाएं शौच के लिए खेतों पर जा रही हैं।
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पुलिस अधिकारियों ने झाला स्वामी का सुझाव मानते हुए महिलाओं के कपड़े पहन लिए और हाथों में पानी भरा लोटा लेकर आतंकवादियों के सामने से ही बाहर निकल गए। झाले से निकलने के बाद पुलिस अधिकारी काफी तेज गति में गाड़ी के पास पहुंचे और महिलाओं के कपड़े उतार कर फेंक दिए। उसके बाद पुलिस अधिकारी गाड़ी से थाने में गए। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को अपने उच्च अधिकारियों से भी पूरी तरह से छिपा लिया था। अब वे दोनों पुलिस अधिकारी सेवानिवृत हो गए हैं।
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आतंकवाद के दौर को काफी करीब से देखा
90 के दशक में आतंकवाद काफी चरम पर था। बिलसंडा के रहने वाले फुफेरे भाई सुधीर जिंदल का आतंकवादियों ने अपहरण किया था। क्षेत्र के सिखों ने दबाव बनवाकर सुधीर जिंदल को रिहा कराया था। आतंकवाद के दौरान बीसलपुर के व्यापारी भी काफी सतर्क रहते थे, क्योंकि आतंकवादी बीसलपुर की बाजार में भी आते थे। कई बार आतंकवादियों ने यहां के कुछ लोगों से अपहरण करने के मकसद से धनाढ्य लोगों के नाम भी पूछे थे। उसी समय नगर के कई धनाढ्य लोगों ने अनहोनी की आशंका से बरेली में अपने मकान बना लिए थे।
- विष्णु कुमार गोयल, व्यापारी मोहल्ल दुबे
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90 के दशक में जब जिले में आतंकवाद चरम पर था। तब सर्किल के एक थाने में तैनात निरीक्षक स्तर के अधिकारी और एक उप निरीक्षक आतंकवादियों की सुरागरसी करने के लिए जंगल किनारे स्थित एक झाले पर शाम के समय गए थे। उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी झाले से दूर खड़ी कर दी थी। चालक और हमराही सिपाहियों को छोड़कर पैदल झाले पहुंचे थे।
पुलिस अधिकारी झाला स्वामी से वार्ता कर ही रहे थे। इसी समय आतंकवादी आ गए और उन्होंने गेट की कुंडी खटखटाई। कुंडी खटकते ही झाला स्वामी समझ गया कि आतंकवादी आ गए हैं। झाला स्वामी ने पुलिस अधिकारियों को इशारे में बताया कि बाबा लोग आ गए हैं। उस समय स्थानीय सिख आतंकवादियों को बाबा कहते थे। झाला स्वामी ने बड़ी फुर्ती से पुलिस अधिकारियों को कमरे में ले जाकर बैठा दिया।
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उसके बाद झाला स्वामी ने गेट की कुंडी खोल दी और आतंकवादियों को पूरे सम्मान के साथ बरामदे में लाकर बैठा दिया। जलपान करने की व्यवस्था के नाम पर झाला स्वामी कमरे में गया और पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे लोग महिलाओं के कपड़े पहन कर और हाथ में पानी भरा लोटा लेकर निकल जाएं। ताकि आतंकवादी समझें कि घर की महिलाएं शौच के लिए खेतों पर जा रही हैं।
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पुलिस अधिकारियों ने झाला स्वामी का सुझाव मानते हुए महिलाओं के कपड़े पहन लिए और हाथों में पानी भरा लोटा लेकर आतंकवादियों के सामने से ही बाहर निकल गए। झाले से निकलने के बाद पुलिस अधिकारी काफी तेज गति में गाड़ी के पास पहुंचे और महिलाओं के कपड़े उतार कर फेंक दिए। उसके बाद पुलिस अधिकारी गाड़ी से थाने में गए। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को अपने उच्च अधिकारियों से भी पूरी तरह से छिपा लिया था। अब वे दोनों पुलिस अधिकारी सेवानिवृत हो गए हैं।
आतंकवाद के दौर को काफी करीब से देखा
90 के दशक में आतंकवाद काफी चरम पर था। बिलसंडा के रहने वाले फुफेरे भाई सुधीर जिंदल का आतंकवादियों ने अपहरण किया था। क्षेत्र के सिखों ने दबाव बनवाकर सुधीर जिंदल को रिहा कराया था। आतंकवाद के दौरान बीसलपुर के व्यापारी भी काफी सतर्क रहते थे, क्योंकि आतंकवादी बीसलपुर की बाजार में भी आते थे। कई बार आतंकवादियों ने यहां के कुछ लोगों से अपहरण करने के मकसद से धनाढ्य लोगों के नाम भी पूछे थे। उसी समय नगर के कई धनाढ्य लोगों ने अनहोनी की आशंका से बरेली में अपने मकान बना लिए थे।
- विष्णु कुमार गोयल, व्यापारी मोहल्ल दुबे