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अपराधियों को बना दिया पुलिस मित्र
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Tue, 06 Dec 2016 11:06 PM IST
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चोर के हाथ में चाबी दे दो तो चोरियां खुद रुक जाएंगी। इस कहावत को जिला पुलिस ने आत्मसात कर लिया है। शांति व्यवस्था कायम रखने में सहयोग के लिए बनाए गए पुलिस मित्रों में कई आपराधिक किस्म के लोग शामिल हैं। इन पर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। जुलूस-ए-मुहम्मदी 11 दिसंबर की रात हशमत नगर से निकाला जाएगा। एक साल पहले शामिल होने व अलग से जुलूस निकालने को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। पथराव, फायरिंग के बीच लाठीचार्ज भी हुआ था। इस बार प्रशासन ने जुलूस सकुशल संपन्न कराने को पुलिस मित्र बनाए हैं। पुलिस मित्र स्पेशल यूनिफार्म में जुलूस के दौरान मुस्तैद रहेंगे। शांति व्यवस्था में प्रशासन के साथ काम करने के उद्देश्य से दो सौ पुलिस बनाए गए हैं। इनमें कई ऐसे लोग पुलिस मित्र बन गए, जिनकी समाज में पहचान अपराधी के तौर पर है। उनके शामिल होने की चर्चाएं फैलने पर विभाग की खासी किरकिरी हो रही है।
मुखबिर तंत्र फेल होने का नतीजा तो नहीं !
यह कहना गलत नहीं होगा कि हाईटेक होने की दौड़ में पुलिस महकमे का मुखबिर तंत्र काफी कमजोर हो चुका है। पुलिस मित्र में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के भी शामिल किए जाने को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
कहीं तो बरती गई लापरवाही !
इसे पुलिस की लापरवाही कहा जाए या फिर जुलूस को सकुशल निपटाने में जल्दबाजी में लिया गया फैसला। इसकी जिम्मेदारी थाना और चौकी पुलिस को दी गई। थानों में जमे रहने वाले लोगों की कही सुनी पर ही फैसला तो नहीं ले लिया गया। अगर इसकी जांच की गई होती तो शायद ऐसा नहीं होता।
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पुलिस मित्र बनाने का कार्य एएसपी की निगरानी में कराया गया था। अगर किसी तरह का कोई आपराधिक किस्म का व्यक्ति इसमें शामिल है, तो उसको हटाया जाएगा। इसको लेकर जांच कराई जाएगी।
सभाराज, एसपी
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मुखबिर तंत्र फेल होने का नतीजा तो नहीं !
यह कहना गलत नहीं होगा कि हाईटेक होने की दौड़ में पुलिस महकमे का मुखबिर तंत्र काफी कमजोर हो चुका है। पुलिस मित्र में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के भी शामिल किए जाने को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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कहीं तो बरती गई लापरवाही !
इसे पुलिस की लापरवाही कहा जाए या फिर जुलूस को सकुशल निपटाने में जल्दबाजी में लिया गया फैसला। इसकी जिम्मेदारी थाना और चौकी पुलिस को दी गई। थानों में जमे रहने वाले लोगों की कही सुनी पर ही फैसला तो नहीं ले लिया गया। अगर इसकी जांच की गई होती तो शायद ऐसा नहीं होता।
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पुलिस मित्र बनाने का कार्य एएसपी की निगरानी में कराया गया था। अगर किसी तरह का कोई आपराधिक किस्म का व्यक्ति इसमें शामिल है, तो उसको हटाया जाएगा। इसको लेकर जांच कराई जाएगी।
सभाराज, एसपी