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नशेड़ी वाहन चालकों पर कार्रवाई से बचती है पुलिस
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2016 11:21 PM IST
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सड़क हादसा होने के बाद पुलिस अक्सर चालक के नशे में होने की बात कहती है लेकिन सवाल यह उठता है कि नशे में वाहन चलाना अपराध होने के बावजूद ऐसे चालकों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। अधिकांश मुकदमों में भी चालक के नशे में होने का जिक्र रहता है लेकिन संसाधन होने के बाद भी पुलिस चेकिंग करने तक की जहमत नहीं उठाती।
नशे की हालत में वाहन चलाना कानूनन अपराध है। वाहन चालक के नशे में होने की पहचान करने के लिए विभाग की ओर से पुलिस को ब्रीथ एनालाइजर मुहैया कराया गया है। संसाधनों के अभाव तो कभी स्टाफ का रोना रोने वाली यातायात पुलिस ब्रीथ एनालाइजर का इस्तेमाल करने से बचती रही है। दावे तो बड़े बड़े किए गए, लेकिन कई महीनों से नशेड़ी चालकों की चेकिंग ही नहीं की गई। अफसर सख्ती करते हैं तो इक्का-दुक्का चालान मशीनी जांच किए बिना ही काट दिए जाते हैं। खुद पुलिसकर्मियों को याद नहीं कि उन्होंने कब ब्रीथ एनालाइजर का प्रयोग किया था।
सड़क हादसों में छह महीने में जा चुकी हैं 87 जान
सड़क हादसों में मरने और घायल होने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। एक जनवरी से 30 जून तक जिले में पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 184 सड़क हादसे हुए। इनमें 87 लोगों की मौत हुई और 124 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इसके अलावा कई अन्य हादसे ऐसे भी है, जिनमें पुलिस कार्रवाई नहीं हुई।
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कुतर्क के सहारे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश
ब्रीथ एनालाइजर को प्रयोग में न लाने के पीछे पुलिस बेबुनियाद तर्क के सहारे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है। चेकिंग में मशीन का इस्तेमाल देख वाहन चालक रास्ता बदल जाते हैं, या फिर वाहन पुलिस को देख दूसरे साथी को दे दिया जाता है। इस तरह केे हास्यास्पद तर्क देकर पुलिस अपनी लापरवाही छिपाने की कोशिश करती है। अब तक क्या कार्रवाई हुई इस सवाल का जवाब भी किसी के पास नहीं।
पूर्व में ब्रीथ एनालाइजर का इस्तेमाल कराया गया था। यह सच है कि अब काफी समय से इसका प्रयोग नहीं हुआ है। टीएसआई को कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्ती की जाएगी।
- निर्मल विष्ट, सीओ सिटी/ट्रैफिक
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नशे की हालत में वाहन चलाना कानूनन अपराध है। वाहन चालक के नशे में होने की पहचान करने के लिए विभाग की ओर से पुलिस को ब्रीथ एनालाइजर मुहैया कराया गया है। संसाधनों के अभाव तो कभी स्टाफ का रोना रोने वाली यातायात पुलिस ब्रीथ एनालाइजर का इस्तेमाल करने से बचती रही है। दावे तो बड़े बड़े किए गए, लेकिन कई महीनों से नशेड़ी चालकों की चेकिंग ही नहीं की गई। अफसर सख्ती करते हैं तो इक्का-दुक्का चालान मशीनी जांच किए बिना ही काट दिए जाते हैं। खुद पुलिसकर्मियों को याद नहीं कि उन्होंने कब ब्रीथ एनालाइजर का प्रयोग किया था।
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सड़क हादसों में छह महीने में जा चुकी हैं 87 जान
सड़क हादसों में मरने और घायल होने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। एक जनवरी से 30 जून तक जिले में पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 184 सड़क हादसे हुए। इनमें 87 लोगों की मौत हुई और 124 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इसके अलावा कई अन्य हादसे ऐसे भी है, जिनमें पुलिस कार्रवाई नहीं हुई।
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कुतर्क के सहारे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश
ब्रीथ एनालाइजर को प्रयोग में न लाने के पीछे पुलिस बेबुनियाद तर्क के सहारे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है। चेकिंग में मशीन का इस्तेमाल देख वाहन चालक रास्ता बदल जाते हैं, या फिर वाहन पुलिस को देख दूसरे साथी को दे दिया जाता है। इस तरह केे हास्यास्पद तर्क देकर पुलिस अपनी लापरवाही छिपाने की कोशिश करती है। अब तक क्या कार्रवाई हुई इस सवाल का जवाब भी किसी के पास नहीं।
पूर्व में ब्रीथ एनालाइजर का इस्तेमाल कराया गया था। यह सच है कि अब काफी समय से इसका प्रयोग नहीं हुआ है। टीएसआई को कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्ती की जाएगी।
- निर्मल विष्ट, सीओ सिटी/ट्रैफिक