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पितृ पक्ष अलविदा, आज से मलमास शुरू, नवरात्र अगले माह
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पीलीभीत। पितृ पक्ष की अमावस्या के साथ बृहस्पतिवार को श्राद्ध समाप्त हो गए। आज यानी 18 सितंबर से मलमास शुरू हो रहे हैं। इसे अधिक मास और पुरुषोतम मास भी कहा जाता है। 18 सितंबर से 16 अक्तूबर तक मलमास चलेगा। इसके बाद नवरात्रि का प्रारंभ होगा। ऐसी मान्यता है कि मलमास में किए गए दान, पूजा-पाठ और व्रत का कई गुना फल मिलता है।
धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों में भागवत पुराण का भी विशेष पाठ किया जाता है। मलमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। यही वजह है कि इस बार शुभ मुहूर्त समेत लग्न 123 दिन के बजाय 148 दिन बाद 25 नवंबर से आरंभ होगा। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर श्री हरि निद्रा से जागेंगे। तभी मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
पंडित आशुतोष शर्मा का कहना है कि मलमास में सुबह उठकर भगवान विष्णु की आराधना करें, उन्हें केसर से तिलक करें और तुलसी की पूजा करें। भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं, साथ सूर्य को जल अर्पित करें। कुछ लोग मलमास में कन्याओं का पूजन भी करते हैं। इस महीने में जितना हो सके दान-पुण्य करें। ऐसी मान्यता है कि मलमास में किए गए दान, पूजा-पाठ और व्रत का कई गुना फल मिलता है।
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इसलिए आता है मलमास
चन्द्रमा 29.5 दिनों में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरा करता है। चन्द्रमा की 12 परिक्रमा 354 दिन में पूरी होती है। इसलिए चन्द्र वर्ष 354 दिन का होता है, जो सौर वर्ष से 11 दिन कम होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में 33 दिन का अंतर आ जाता है। इसी कमी को तीन वर्षों में 13 महीने मानकर एक महीने का मलमास पड़ता है।
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धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों में भागवत पुराण का भी विशेष पाठ किया जाता है। मलमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। यही वजह है कि इस बार शुभ मुहूर्त समेत लग्न 123 दिन के बजाय 148 दिन बाद 25 नवंबर से आरंभ होगा। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर श्री हरि निद्रा से जागेंगे। तभी मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
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पंडित आशुतोष शर्मा का कहना है कि मलमास में सुबह उठकर भगवान विष्णु की आराधना करें, उन्हें केसर से तिलक करें और तुलसी की पूजा करें। भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं, साथ सूर्य को जल अर्पित करें। कुछ लोग मलमास में कन्याओं का पूजन भी करते हैं। इस महीने में जितना हो सके दान-पुण्य करें। ऐसी मान्यता है कि मलमास में किए गए दान, पूजा-पाठ और व्रत का कई गुना फल मिलता है।
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इसलिए आता है मलमास
चन्द्रमा 29.5 दिनों में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरा करता है। चन्द्रमा की 12 परिक्रमा 354 दिन में पूरी होती है। इसलिए चन्द्र वर्ष 354 दिन का होता है, जो सौर वर्ष से 11 दिन कम होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में 33 दिन का अंतर आ जाता है। इसी कमी को तीन वर्षों में 13 महीने मानकर एक महीने का मलमास पड़ता है।