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फार्मासिस्ट बने डॉक्टर, सफाईकर्मी बांट रहे दवा
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बमरौली बिलसंडा का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। आयुर्वेदिक और यूनानी पद्धति पर आधारित चिकित्सा सेवा को लेकर सरकार गंभीर है। सरकारी दावों की जमीनी हकीकत देखने के लिए शनिवार को पड़ताल की गई तो खलीनवादा के अस्पताल में सफाईकर्मी दवाई बांटते नजर आए। अन्य अस्पतालों में भी कुछ ऐसा ही नजारा सामने आया।
जिले में 36 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। डाक्टरों की संख्या 26 है। दस अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। कहीं फार्मासिस्ट के सहारे अस्पताल चल रहे हैं। कहीं सफाई कर्मी के पास ही जिम्मेदारी है। प्रत्येक अस्पताल के लिए एक फार्मासिस्ट चाहिए। जिले में सिर्फ दस ही फार्मासिस्ट हैं। शनिवार को सुबह आठ से दोपहर दो बजे के बीच ओपीडी के समय में जायजा लिया गया तो तीन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिले। यह भी पता लगा कि किसी भी आयुर्वेदिक अस्पताल में पिछले दो वर्षों से कोई मरीज भर्ती नहीं किया गया जबकि मरीज भर्ती किए जाने का इंतजाम सरकार ने किए हैं।
1 - अमरिया क्षेत्र में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल खली नवादा में दिन में 11 बजे न फार्मासिस्ट थे, न ही डाक्टर। मरीजों को सफाईकर्मी जसवंत सिंह दवाई बांट रहे थे। वह जब दवाई बांट रहे थे। उस वक्त अस्पताल में भूड़ा कैमोर के अंसार अहमद और राजदा बेगम, गुलनाज के अलावा ग्राम फरदिया के रामकुमार इलाज के लिए आए थे। डॉक्टर न होने की वजह से राजदा बेगम अंसार अहमद और राजकुमार पुराने पर्चे पर दवा ले रहे थे।
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2- कलीनगर की आसरा आवासीय कॉलोनी के तीन छोटे से कमरों में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में दिन में 1.10 बजे डॉक्टर का कक्ष खाली मिला। फार्मासिस्ट लल्लन दुबे दवाई बांट रहे थे। वही मरीज की समस्या सुनकर दवाई लिख रहे थे। इस अस्पताल में दो वर्ष से कोई डॉक्टर नहीं है। मरीजों के लिए फार्मासिस्ट ही डॉक्टर हैं। रोजाना 60-65 मरीज आते हैं, जिन्हें फार्मासिस्ट ही परामर्श दे रहे हैं।
3- बमरौली के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में 1.40 बजे फार्मासिस्ट सुधा बिंद दवाई बांट रहे थे। वही मरीज भी देख रहे थे। डॉक्टर न होने की वजह से अस्पताल सप्ताह सिर्फ मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को खुलता है। फार्मासिस्ट की तीन दिन के लिए ड्यूटी गुलड़िया भूपसिंह में लगाई जाती है। सुधा बिंद ने बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को अस्पताल में ताला लटका रहता है। इन दिनों अस्पताल की सफाई के लिए स्वीपर भी नहीं रहता। गुलड़िया भूप सिंह में तीन दिन फार्मासिस्ट रहते हैं, जो मरीज देखते हैं। तीन स्वीपर पर्चे के आधार पर दवाई बांट देते हैं।
जिले में सिर्फ बमरौली ही एक ऐसा अस्पताल है, जहां कोई कर्मचारी नहीं है। जल्दी ही बमरौली में किसी कर्मचारी की नियुक्ति करके उसे भी संचालित कराया जाएगा। कर्मचारी और चिकित्सक कम होने की वजह से मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। ओपीडी का संचालन किया जा रहा है।
डॉ. मीरा वर्मा, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
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जिले में 36 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। डाक्टरों की संख्या 26 है। दस अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। कहीं फार्मासिस्ट के सहारे अस्पताल चल रहे हैं। कहीं सफाई कर्मी के पास ही जिम्मेदारी है। प्रत्येक अस्पताल के लिए एक फार्मासिस्ट चाहिए। जिले में सिर्फ दस ही फार्मासिस्ट हैं। शनिवार को सुबह आठ से दोपहर दो बजे के बीच ओपीडी के समय में जायजा लिया गया तो तीन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिले। यह भी पता लगा कि किसी भी आयुर्वेदिक अस्पताल में पिछले दो वर्षों से कोई मरीज भर्ती नहीं किया गया जबकि मरीज भर्ती किए जाने का इंतजाम सरकार ने किए हैं।
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1 - अमरिया क्षेत्र में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल खली नवादा में दिन में 11 बजे न फार्मासिस्ट थे, न ही डाक्टर। मरीजों को सफाईकर्मी जसवंत सिंह दवाई बांट रहे थे। वह जब दवाई बांट रहे थे। उस वक्त अस्पताल में भूड़ा कैमोर के अंसार अहमद और राजदा बेगम, गुलनाज के अलावा ग्राम फरदिया के रामकुमार इलाज के लिए आए थे। डॉक्टर न होने की वजह से राजदा बेगम अंसार अहमद और राजकुमार पुराने पर्चे पर दवा ले रहे थे।
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2- कलीनगर की आसरा आवासीय कॉलोनी के तीन छोटे से कमरों में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में दिन में 1.10 बजे डॉक्टर का कक्ष खाली मिला। फार्मासिस्ट लल्लन दुबे दवाई बांट रहे थे। वही मरीज की समस्या सुनकर दवाई लिख रहे थे। इस अस्पताल में दो वर्ष से कोई डॉक्टर नहीं है। मरीजों के लिए फार्मासिस्ट ही डॉक्टर हैं। रोजाना 60-65 मरीज आते हैं, जिन्हें फार्मासिस्ट ही परामर्श दे रहे हैं।
3- बमरौली के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में 1.40 बजे फार्मासिस्ट सुधा बिंद दवाई बांट रहे थे। वही मरीज भी देख रहे थे। डॉक्टर न होने की वजह से अस्पताल सप्ताह सिर्फ मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को खुलता है। फार्मासिस्ट की तीन दिन के लिए ड्यूटी गुलड़िया भूपसिंह में लगाई जाती है। सुधा बिंद ने बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को अस्पताल में ताला लटका रहता है। इन दिनों अस्पताल की सफाई के लिए स्वीपर भी नहीं रहता। गुलड़िया भूप सिंह में तीन दिन फार्मासिस्ट रहते हैं, जो मरीज देखते हैं। तीन स्वीपर पर्चे के आधार पर दवाई बांट देते हैं।
जिले में सिर्फ बमरौली ही एक ऐसा अस्पताल है, जहां कोई कर्मचारी नहीं है। जल्दी ही बमरौली में किसी कर्मचारी की नियुक्ति करके उसे भी संचालित कराया जाएगा। कर्मचारी और चिकित्सक कम होने की वजह से मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। ओपीडी का संचालन किया जा रहा है।
डॉ. मीरा वर्मा, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी

कलीनगर के आसरा आवासीय कालोनी में संचालित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में मरीज देखते फार्मासिस्ट। सं?- फोटो : PILIBHIT

अमरिया के आयुर्वेदिक अस्पताल में दवा लेने आए लोग। संवाद- फोटो : PILIBHIT