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जिले में तेज बुखार की चपेट में आ रहे लोग

Mon, 24 Aug 2015 11:04 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Mon, 24 Aug 2015 11:04 PM IST
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People in the district are in the grip of fever

जिले में तेज बुखार की चपेट में आए कई बच्चों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। इस संदिग्ध बुखार की चपेट में आए कई बच्चों को जिला अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है। एक ओर परिवार वाले इसे दिमागी बुखार होना बता रहे हैं वहीं सेहत महकमा इसे वायरल फीवर मानकर सभी बच्चों का इलाज कर रहा है। सीएमओ ने जिले में दिमागी बुखार फैलने से इंकार किया है।

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बरसाती सीजन के चलते संक्रामक रोगों ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। सरकारी समेत प्राइवेट अस्पतालों में बुखार की चपेट में आए मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले सप्ताह भर से तमाम मरीज अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। जिला अस्पताल में करीब छह बच्चों को भर्ती कराया गया है। उनके परिवार वालों का कहना है कि उनके बच्चों को दिमागी बुखार होने के कारण यहां भर्ती किया गया है।
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जबकि जिला अस्पताल प्रशासन दिमागी बुखार होने से साफ इंकार कर रहा है। डॉक्टर वायरल फीवर मानकर इन सभी बच्चों का इलाज कर रहे हैं। इनमें दो बच्चों को इमरजेंसी वार्ड में जबकि चार बच्चों को वार्ड में शिफ्ट किया गया।
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इनको कराया गया है भर्ती
- तेजवती (10) निवासी रुरा रामनगर
- सूरज (12) निवासी जसौली
- अभिषेक (12) निवासी खजुनिया नवीराम
- दिव्या (1) निवासी अखौला
- अर्जुन सिंह (11) निवासी सहजना
- रामू (13) निवासी मोहल्ला छोटा खुदागंज

अब तक हो चुकी चार मौतें
जिले में इस संदिग्ध बुखार से अब तक एक बच्ची समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें पूरनपुर तहसील के गांव गुलड़िया भूप सिंह निवासी दिवांगी, माधोटांडा के शराफत खां, गांव चांट फिरोजपुर निवासी जयराखन की मौत हो चुकी है। इनके परिवार वालों के मुताबिक उनके अपनों की मौत दिमागी बुखार से हुई है। सोमवार को परेवा निवासी जहीर की भी बुखार से मौत हो गई।

जिले में जांच के इंतजाम नहीं
जिले में दिमागी बुखार की जांच के लिए न तो सरकारी स्तर पर जांच की व्यवस्था है और न ही प्राइवेट अस्पतालों में। सीएमएस डॉ. आरसी शर्मा के मुताबिक सीएसएफ (रीढ़ का पानी) को लखनऊ भेजा जाता है। उसके बाद ही दिमारी बुखार की पुष्टि होती है।

स्नायु तंत्र पर पड़ता प्रभाव
डाक्टरों के मुताबिक दिमागी बुखार मनुष्य के स्नायुतंत्र पर प्रभाव डालता है। तेज बुखार आने के साथ सिरदर्द, अकड़न, जी मचलना, उल्टी आदि होती है। पीड़ित व्यक्ति ठीक से इलाज नहीं करा पाए तो वह कोमा में चला जाता है। दिमागी रूप से कमजोर होने की संभावना अधिक रहती है।

अधिकतर मरीज वायरल फीवर के
इन दिनों संक्रामक रोग फैल रहे हैं। अस्पताल में जो मरीज भर्ती हैं, उनमें अधिकतर वायरल फीवर से पीड़ित हैं। दिमागी बुखार का अभी तक कोई मरीज नहीं आया है।
- डॉ. आरसी शर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिले में दिमागी बुखार नहीं
जिले में दिमागी बुखार से बचाव को टीकाकरण अभियान चल रहा है। कुछ बच्चों को टीकाकरण के बाद बुखार आदि की समस्याएं आ रही है। उनका इलाज किया जा रहा है। पिछले पांच सालों से लेकर अब तक एक भी मरीज दिमागी बुखार का नहीं पाया गया है।

- डॉ. श्री ओम चौहान, सीएमओ


बुखार से वृद्ध की मौत
परेवावैश्य। गांव निवासी 75 वर्षीय जहीर खां की बुखार के चलते सोमवार दोपहर मौत हो गई। जहीर खां के पुत्र बबलू ने बताया कि उसके पिता को दो दिन पूर्व तेज बुखार आया था। अमरिया के एक प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराया गया। सोमवार सुबह डॉक्टर को दिखाने गए थे। वापस लौटकर आने के बाद दोपहर करीब 12 बजे उनकी मौत हो गई। बबलू के मुताबिक उसके पिता की मौत दिमागी बुखार से हुई है।

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