{"_id":"6339c5c1c9a341304134b5d8","slug":"people-crossed-23-positions-by-giving-better-feedback-on-the-app-pilibhit-news-bly4994810164","type":"story","status":"publish","title_hn":"एप पर बेहतर फीडबैक देकर लोगों ने पार कराए 23 पायदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एप पर बेहतर फीडबैक देकर लोगों ने पार कराए 23 पायदान
सार
शहर की सड़कें टूटी हैं, नाले चोक हैं, बरसात में पूरे शहर में पानी भर जाता है, बावजूद इसके यह सुनकर आप राहत जरूर महसूस कर सकते हैं कि स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछले साल की अपेक्षा इस बार कुछ सुधार हुआ है। आयुर्वेदिक कॉलेज और सुनगढ़ी के पास डलाव घर को हटाया गया।वर्ष - रैंक 2019- 3622020- 2592021- 1882022- 165 इन बिंदुओं ने सुधारी स्थिति - शहर की साफ सफाई - सड़कों पर कूड़ा नहीं जाने दिया गया- कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट बनना शुरू हुुआ- डोर टू डोर कूड़ा उठाना शुरू किया गया- एप पर सिटीजन फीडबैक बेहतर रहा- शहर खुले शौच से मुक्त हुआ- सीवरेज और गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए एसएसटीपी और एसटीपी प्लांट लगाए।- नाले नालियां साफ किए गए।- फाइटोरीमेडिएशन प्लांट बनना शुरू हुएक्या कहते हैं शहर के लोगफोटो-दस दिन पहले शहर में बरसात हुई थी। हालांकि हम लोगों को भी कुछ जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी, लेकिन पालिका की कार्यप्रणाली से लोग संतुष्ट नहीं।- डॉ. आदित्य पांडेय, शहरवासी पीलीभीत नगर पालिका को स्वच्छता सर्वेक्षण में 165वीं रैंक मिली है।
विज्ञापन
पीलीभीत में स्टेशन चौराहे के पास बरहा रोड पर लगा कूड़े का ढेर।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पीलीभीत को मिली 165वीं रैंक, पिछले साल थी 188वीं रैंक
लोग बोले- आंकड़ों में सुधरा शहर, धरातल पर हालात खराब
पीलीभीत। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को 165वीं रैंक मिली है, जो पिछले साल के मुकाबले साफ-सफाई के मामले में 23 अंक ज्यादा है। 23 अंकों का यह उछाल भी लोगों के एप पर दिए गए अच्छे फीडबैक के कारण है, नहीं तो शहर में ऐेसी कोई जगह नहीं जिसे स्वच्छता की मिसाल माना जा सके। यहां बता दें कि पिछली स्वच्छता रैंक 188 थी।
शहर की सड़कें टूटी हैं, नाले चोक हैं, बरसात में पूरे शहर में पानी भर जाता है, बावजूद इसके यह सुनकर आप राहत जरूर महसूस कर सकते हैं कि स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछले साल की अपेक्षा इस बार कुछ सुधार हुआ है। पिछले चार सालों में शहर के हालात भले ही न बदले हों लेकिन लोगों की बदौलत स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंक में सुधार जरूर हो रहा है।
वर्ष 2019 में शहर को 362वीं रैंक मिली थी। ये सबसे खराब स्थिति थी। उसके बाद से सुधार होना शुरू हुआ। 2020 में 259 रैंक रही। पिछले साल स्थिति और बेहतर हुई और पीलीभीत 188 रैंक हासिल करने में कामयाब रहा। हालांकि पिछले साल कूड़ा निस्तारण और नदियों में जाने वाले प्रदूषण में मामले में नंबर कम मिले थे। इस बार रैंक में 23 अंकों का सुधार हुआ है और 165वीं रैंक मिली है। इसके पीछे नगर पालिका के अधिकारियों का मानना है कि डोर-टू डोर कूड़ा कलेक्शन के साथ आबादी के बीच बने डलावघरों को बाहर किया गया। आयुर्वेदिक कॉलेज और सुनगढ़ी के पास डलाव घर को हटाया गया।
विज्ञापन
वर्ष - रैंक
2019- 362
2020- 259
2021- 188
2022- 165
इन बिंदुओं ने सुधारी स्थिति
- शहर की साफ सफाई
- सड़कों पर कूड़ा नहीं जाने दिया गया
- कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट बनना शुरू हुुआ
- डोर टू डोर कूड़ा उठाना शुरू किया गया
- एप पर सिटीजन फीडबैक बेहतर रहा
- शहर खुले शौच से मुक्त हुआ
- सीवरेज और गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए एसएसटीपी और एसटीपी प्लांट लगाए।
- नाले नालियां साफ किए गए।
- फाइटोरीमेडिएशन प्लांट बनना शुरू हुए
दस दिन पहले शहर में बरसात हुई थी। पूरा शहर टापू बन गया था। दुकानों तक में पानी घुस गया व्यापारियों को लाखों का नुकसान हुआ। रैकिंग सुधरने से खुशी है, लेकिन धरातल पर साफ सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए और प्रयास करने होंगे।
- सौरभ सक्सेना, व्यापारी नेता
चंद्र घंटों की बारिश ने पालिका की शहर व्यवस्था की पोल खोल दी। डोर टू डोर कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि हम लोगों को भी कुछ जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी, लेकिन पालिका की कार्यप्रणाली से लोग संतुष्ट नहीं।
- डॉ. आदित्य पांडेय, शहरवासी
पीलीभीत नगर पालिका को स्वच्छता सर्वेक्षण में 165वीं रैंक मिली है। पिछले साल 188वीं रैंक मिली थी। हमारा लक्ष्य है अगले साल टॉप-100 में जगह बनाना है।
- सोबित सिंह, कोआर्डिनेटर स्वच्छता सर्वेक्षण
विज्ञापन
लोग बोले- आंकड़ों में सुधरा शहर, धरातल पर हालात खराब
पीलीभीत। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को 165वीं रैंक मिली है, जो पिछले साल के मुकाबले साफ-सफाई के मामले में 23 अंक ज्यादा है। 23 अंकों का यह उछाल भी लोगों के एप पर दिए गए अच्छे फीडबैक के कारण है, नहीं तो शहर में ऐेसी कोई जगह नहीं जिसे स्वच्छता की मिसाल माना जा सके। यहां बता दें कि पिछली स्वच्छता रैंक 188 थी।
शहर की सड़कें टूटी हैं, नाले चोक हैं, बरसात में पूरे शहर में पानी भर जाता है, बावजूद इसके यह सुनकर आप राहत जरूर महसूस कर सकते हैं कि स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछले साल की अपेक्षा इस बार कुछ सुधार हुआ है। पिछले चार सालों में शहर के हालात भले ही न बदले हों लेकिन लोगों की बदौलत स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंक में सुधार जरूर हो रहा है।
विज्ञापन
वर्ष 2019 में शहर को 362वीं रैंक मिली थी। ये सबसे खराब स्थिति थी। उसके बाद से सुधार होना शुरू हुआ। 2020 में 259 रैंक रही। पिछले साल स्थिति और बेहतर हुई और पीलीभीत 188 रैंक हासिल करने में कामयाब रहा। हालांकि पिछले साल कूड़ा निस्तारण और नदियों में जाने वाले प्रदूषण में मामले में नंबर कम मिले थे। इस बार रैंक में 23 अंकों का सुधार हुआ है और 165वीं रैंक मिली है। इसके पीछे नगर पालिका के अधिकारियों का मानना है कि डोर-टू डोर कूड़ा कलेक्शन के साथ आबादी के बीच बने डलावघरों को बाहर किया गया। आयुर्वेदिक कॉलेज और सुनगढ़ी के पास डलाव घर को हटाया गया।
विज्ञापन
वर्ष - रैंक
2019- 362
2020- 259
2021- 188
2022- 165
इन बिंदुओं ने सुधारी स्थिति
- शहर की साफ सफाई
- सड़कों पर कूड़ा नहीं जाने दिया गया
- कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट बनना शुरू हुुआ
- डोर टू डोर कूड़ा उठाना शुरू किया गया
- एप पर सिटीजन फीडबैक बेहतर रहा
- शहर खुले शौच से मुक्त हुआ
- सीवरेज और गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए एसएसटीपी और एसटीपी प्लांट लगाए।
- नाले नालियां साफ किए गए।
- फाइटोरीमेडिएशन प्लांट बनना शुरू हुए
दस दिन पहले शहर में बरसात हुई थी। पूरा शहर टापू बन गया था। दुकानों तक में पानी घुस गया व्यापारियों को लाखों का नुकसान हुआ। रैकिंग सुधरने से खुशी है, लेकिन धरातल पर साफ सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए और प्रयास करने होंगे।
- सौरभ सक्सेना, व्यापारी नेता
चंद्र घंटों की बारिश ने पालिका की शहर व्यवस्था की पोल खोल दी। डोर टू डोर कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि हम लोगों को भी कुछ जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी, लेकिन पालिका की कार्यप्रणाली से लोग संतुष्ट नहीं।
- डॉ. आदित्य पांडेय, शहरवासी
पीलीभीत नगर पालिका को स्वच्छता सर्वेक्षण में 165वीं रैंक मिली है। पिछले साल 188वीं रैंक मिली थी। हमारा लक्ष्य है अगले साल टॉप-100 में जगह बनाना है।
- सोबित सिंह, कोआर्डिनेटर स्वच्छता सर्वेक्षण