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UP: चपरासी ने दो पत्नियों के खातों में भेजी सबसे ज्यादा रकम, इल्हाम ने फर्जी आईडी बनाकर किया करोड़ों का गबन
Sat, 02 May 2026 12:15 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 02 May 2026 12:15 PM IST
सार
यूपी के पीलीभीत में सरकारी धनराशि को गबन करने का मामला सामने आया है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय (डीआईओएस) में पांच करोड़ के घोटाले का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोपी चपरासी ने अपनी दो पत्नियों और रिश्तेदारों के खाते में रकम ट्रांसफर की थी। फर्जी बेनिफिशियरी आईडी बनाकर आरोपी ये खेल किया था।
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सरकारी धनराशि को गबन करने का मामला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय (डीआईओएस) में पांच करोड़ के घोटाले में पुलिस ने सात महिलाओं को गिरफ्तार किया। इनमें मुख्य आरोपी इल्हाम की दो पत्नियां, साली, सास और तीन अन्य परिचित महिलाएं हैं।
शुक्रवार शाम एएसपी विक्रम दहिया ने कहा कि मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने 13 फरवरी 2026 को थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज बीसलपुर में कार्यरत चपरासी इल्हाम उर्र रहमान शम्सी डीआईओएस कार्यालय से अटैच था। वह वेतन बिल और टोकन जनरेशन का कार्य देखता था।
इल्हाम ने कूटरचित तरीके से फर्जी बेनिफिशियरी (लाभार्थी) आईडी तैयार कर 12 सितंबर 2024 से फरवरी 2026 तक 98 ट्रांजेक्शन के माध्यम से करीब 1.01 करोड़ रुपये अपनी पत्नी के खाते में ट्रेजरी के जरिये ट्रांसफर कर गबन किया।
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जांच में यह रकम काफी बड़ी पाई गई, जो दूसरे खातों में भेजी गई थी। कोतवाली नगर में दर्ज हुई रिपोर्ट की जांच के दौरान पुलिस ने 53 खातों में संदिग्ध लेनदेन के करीब 5.50 करोड़ रुपये फ्रीज करा दिए थे।
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शुक्रवार शाम एएसपी विक्रम दहिया ने कहा कि मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने 13 फरवरी 2026 को थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज बीसलपुर में कार्यरत चपरासी इल्हाम उर्र रहमान शम्सी डीआईओएस कार्यालय से अटैच था। वह वेतन बिल और टोकन जनरेशन का कार्य देखता था।
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इल्हाम ने कूटरचित तरीके से फर्जी बेनिफिशियरी (लाभार्थी) आईडी तैयार कर 12 सितंबर 2024 से फरवरी 2026 तक 98 ट्रांजेक्शन के माध्यम से करीब 1.01 करोड़ रुपये अपनी पत्नी के खाते में ट्रेजरी के जरिये ट्रांसफर कर गबन किया।
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जांच में यह रकम काफी बड़ी पाई गई, जो दूसरे खातों में भेजी गई थी। कोतवाली नगर में दर्ज हुई रिपोर्ट की जांच के दौरान पुलिस ने 53 खातों में संदिग्ध लेनदेन के करीब 5.50 करोड़ रुपये फ्रीज करा दिए थे।
इन्हें किया गया गिरफ्तार
मुख्य आरोपी की एक पत्नी अर्शी खातून को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने दो अन्य पत्नियों संभल जिले के थाना रामसत्ती के मोहल्ला जगत निवासी लुबना और बुलंदशहर के खुर्जा की जामुन वाली गली निवासी आजरा खान, लुबना की बहन फातिमा नवी, आजरा की मां नाहिद के साथ ही बिजनौर के मोहल्ला काजीपारा निवासी परवीन खातून, गाजियाबाद के मोहननगर की आशकारा परवीन और खुर्जा की आफिया खान को गिरफ्तार किया। इनमें से किसके खाते में कितनी रकम भेजी गई, इसका भी पुलिस ने खुलासा किया है।
मुख्य आरोपी की एक पत्नी अर्शी खातून को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने दो अन्य पत्नियों संभल जिले के थाना रामसत्ती के मोहल्ला जगत निवासी लुबना और बुलंदशहर के खुर्जा की जामुन वाली गली निवासी आजरा खान, लुबना की बहन फातिमा नवी, आजरा की मां नाहिद के साथ ही बिजनौर के मोहल्ला काजीपारा निवासी परवीन खातून, गाजियाबाद के मोहननगर की आशकारा परवीन और खुर्जा की आफिया खान को गिरफ्तार किया। इनमें से किसके खाते में कितनी रकम भेजी गई, इसका भी पुलिस ने खुलासा किया है।
लुबना और अजारा के खातों में भेजी थी सर्वाधिक रकम, रियल स्टेट में भी खपाई
पांच करोड़ के चर्चित घोटाले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी करने कर खुलासा करते हुए एएसपी विक्रम दहिया ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की थी। इनमें लुबना के खाते में करीब 2.37 करोड़, अजारा खान के खाते में 2.12 करोड़, फातिमा के खाते में 1.03 करोड़, आफिया के खाते में 80 लाख से अधिक, परवीन खातून के खाते में करीब 48 लाख, नाहिद के खाते में 95 लाख और आशकारा परवीन के खाते में करीब 38 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
पांच करोड़ के चर्चित घोटाले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी करने कर खुलासा करते हुए एएसपी विक्रम दहिया ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की थी। इनमें लुबना के खाते में करीब 2.37 करोड़, अजारा खान के खाते में 2.12 करोड़, फातिमा के खाते में 1.03 करोड़, आफिया के खाते में 80 लाख से अधिक, परवीन खातून के खाते में करीब 48 लाख, नाहिद के खाते में 95 लाख और आशकारा परवीन के खाते में करीब 38 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
गिरफ्तार आरोपियों में लुबना नवी और अजारा खान मुख्य आरोपी इल्हाम की पत्नी हैं। एक अन्य पत्नी अर्शी को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है। जबकि इल्हाम हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत पर है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बरेली स्थित जेएचएम इंफ्राहोम प्राइवेट लिमिटेड के खाते में 90 लाख और ओरिका होम्स बिल्डर के खाते में 17.18 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जिन्हें जांच के दौरान होल्ड कराया है। पुलिस ने एफडी के रूप में जमा करीब 59 लाख रुपये भी फ्रीज कराए हैं।
अधिकारियों और कर्मचारियों पर नहीं हुई कार्रवाई
करोड़ के इस घोटाले में इल्हाम शम्सी ने जिन आईडी का प्रयोग कर करोड़ों की सरकारी धनराशि को ठिकाने लगाया। उसमें इल्हाम के अलावा डीआईओएस से लेकर वित्त एवं लेखा अधिकारी और कोषागार के भी अधिकारी कर्मचारी की संलिप्तता जग जाहिर हुई थी। इस मामले में शासन स्तर से भी टीम गठित की गई, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है। इससे तमाम सवाल उठ रहे हैं।
करोड़ के इस घोटाले में इल्हाम शम्सी ने जिन आईडी का प्रयोग कर करोड़ों की सरकारी धनराशि को ठिकाने लगाया। उसमें इल्हाम के अलावा डीआईओएस से लेकर वित्त एवं लेखा अधिकारी और कोषागार के भी अधिकारी कर्मचारी की संलिप्तता जग जाहिर हुई थी। इस मामले में शासन स्तर से भी टीम गठित की गई, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है। इससे तमाम सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षकों के वेतन बिल की आड़ में भेजता रहा करोड़ों रुपये
आरोपी डीआईओएस कार्यालय में तैनात रहे चपरासी इल्हाम शम्सी ने विभागीय अफसर से लेकर बाबू तक को अपने विश्वास में लिया और उनके पोर्टल का दुरुपयोग कर शिक्षकों के वेतन बिन की आड़ में करोड़ों की धनराशि को अपने रिश्तेदार और अन्य परिचितों के खाते में भेजता रहा।
आरोपी डीआईओएस कार्यालय में तैनात रहे चपरासी इल्हाम शम्सी ने विभागीय अफसर से लेकर बाबू तक को अपने विश्वास में लिया और उनके पोर्टल का दुरुपयोग कर शिक्षकों के वेतन बिन की आड़ में करोड़ों की धनराशि को अपने रिश्तेदार और अन्य परिचितों के खाते में भेजता रहा।
पुलिस की जांच में अब तक करीब 50 से अधिक खाता सामने आए हैं। इनमें पुलिस ने पांच करोड़ से अधिक की धनराशि को फ्रीज कर दिया है। अन्य खातों की जांच भी जा रही है। जिसमें यह कहा जा रहा है घोटाले की धनराशि का दायरा और बढ़ सकता है।
कार्यालय से हटाने के बाद दोबारा पैर जमाने में भी सफल हुआ था इल्हाम
बीसलपुर के जनता इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात इल्हाम ने वर्ष 2015 में डीआईओएस कार्यालय में सेवाएं शुरू की थी। तत्कालीन डीआईओएस ने संबद्धीकरण करने के बाद चपरासी को कार्यालय के अधीन किया था। बताया जाता है कि इसके बाद करीब चार साल तक वह कार्यालय में जमा रहा।
बीसलपुर के जनता इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात इल्हाम ने वर्ष 2015 में डीआईओएस कार्यालय में सेवाएं शुरू की थी। तत्कालीन डीआईओएस ने संबद्धीकरण करने के बाद चपरासी को कार्यालय के अधीन किया था। बताया जाता है कि इसके बाद करीब चार साल तक वह कार्यालय में जमा रहा।
कंप्यूटर का जानकारी होने के चलते धीरे-धीरे वह कार्यालय में दखल बढ़ता रहा। बताया जाता है कि करीब तीन साल पूर्व यहां तैनात रहे डीआईओएस में उसका संबद्धीकरण निरस्त कर दिया था, लेकिन फिर इल्हाम कार्यालय में पैर जमाने में सफल हो गया।