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धान खरीद : क्रय केंद्र बनाने से लेकर खरीद तक हावी हैं माफिया
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पीलीभीत। एक अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद डिप्टी आरएमओ पर गाज गिरने के बाद सवालों के घेरे में है। इस बार भी क्रय केंद्र बनाने से लेकर खरीद प्रक्रिया में माफिया की मनमानी हावी है। यही कारण है कि शासन से मिले 3.20 लाख मीट्रिक टन (एमटी) लक्ष्य के मुकाबले जिले में करीब सात हजार एमटी ही खरीद हो सकी है। जबकि जिले में धान की कटाई लगभग समाप्त होने को है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि क्रय केंद्र बनाने की प्रक्रिया जुलाई आखिर में शुरू कर दी गई थी। इस दौरान नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से केंद्र बनाए गए। एक-एक ग्राम पंचायत में तीन-तीन केंद्र बनाए गए जबकि कई इलाके ऐसे थे जहां 10 से 20 किलोमीटर दूरी तक केंद्र बनाए गए। कुल 161 केंद्र खोले गए। सबसे ज्यादा खेल पूरनपुर क्षेत्र में हुआ।
एक अक्तूबर से खरीद शुरू होने के बाद शासन ने खरीद नीति और खरीद का लक्ष्य तय किया। इसके तहत 145 केंद्र बनने थे। शासन के निर्देशों को दरकिनार कर 148 केंद्र बनाए गए। कुछ दिन पहले ही डीएम ने 19 केंद्र निरस्त किए और छह नए धान खरीद केंद्र बनाए। केंद्रों की इस गड़बड़ी की शिकायत शासन तक पहुंची।
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वहीं अगर खरीद प्रक्रिया की बात करें तो शुरू के दो सप्ताह तक क्रय केंद्रों पर खरीद ही नहीं हुई। इस दौरान राइस मिल मालिकों और व्यापारियों ने जमकर धान खरीदा। केंद्रों पर किसानों को मानकों का बहाना बनाकर लौटाया जाता रहा। कई जगह किसानों ने हंगामा भी किया लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। पूरनपुर में तो डीएम की किसान से नोकझोंक तक हो गई। केंद्र बनाने, खरीद प्रक्रिया और मिलों के संबद्धीकरण में हुए खेल की खबर शासन तक पहुंची तो खरीद में अनियमितता बरतने पर डिप्टी आरएमओ विकास चंद्र तिवारी को निलंबित कर दिया गया। अब इस कार्रवाई से खलबली है।
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हर स्तर पर हुआ खेल
अगर केंद्र बनाने की प्रक्रिया की बात करें तो सहकारी समितियों के माध्यम से प्रस्ताव दिए जाते हैं। उसके बाद खरीद एजेंसियां वहां केंद्र बनाती हैं। एजेंसी या विभाग के कर्मचारी को केंद्र प्रभारी बनाया जाता है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई ऐसे लोगों के कहने पर केंद्र बनाए गए जिनपर पूर्व में तमाम आरोप लगे थे। पुलिस कार्रवाई तक हुई थी। यह भी चर्चा रही कि प्रस्ताव लिखवाने के नाम पर वसूली की गई। हालांकि अधिकारी इन आरोपों को खारिज करते रहे।
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कई और पर भी गिर सकती है गाज
पिछले दिनों पूरनपुर के एएमओ राम कैलाश सोनकर को खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी करने पर हटा दिया गया था। अब डिप्टी आरएमओ निलंबित कर दिया गया। अधिकरियों का कहना है कि अंदरखाने जांच चल रही है। क्रय एजेंसी के कुछ कर्मचारी और विभाग के कई अधिकारी रडार पर हैं। ऐसे अफसरों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
डिप्टी आरएमओ पर जो कार्रवाई हुई है वो आरएफसी की रिपोर्ट पर हुई है। बाकी खरीद प्रक्रिया में तेजी आई है। क्रय केंद्रों से धान के उठान की समस्या आ रही थी। मिल मालिकों के साथ बैठक की है। उठान भी शुरू हो जाएगा। बारिश के चलते शुरुआत में कम खरीद हो सकी। लक्ष्य के अनुरूप खरीद पूरी होगी।
- प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम
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विभागीय सूत्रों का कहना है कि क्रय केंद्र बनाने की प्रक्रिया जुलाई आखिर में शुरू कर दी गई थी। इस दौरान नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से केंद्र बनाए गए। एक-एक ग्राम पंचायत में तीन-तीन केंद्र बनाए गए जबकि कई इलाके ऐसे थे जहां 10 से 20 किलोमीटर दूरी तक केंद्र बनाए गए। कुल 161 केंद्र खोले गए। सबसे ज्यादा खेल पूरनपुर क्षेत्र में हुआ।
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एक अक्तूबर से खरीद शुरू होने के बाद शासन ने खरीद नीति और खरीद का लक्ष्य तय किया। इसके तहत 145 केंद्र बनने थे। शासन के निर्देशों को दरकिनार कर 148 केंद्र बनाए गए। कुछ दिन पहले ही डीएम ने 19 केंद्र निरस्त किए और छह नए धान खरीद केंद्र बनाए। केंद्रों की इस गड़बड़ी की शिकायत शासन तक पहुंची।
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वहीं अगर खरीद प्रक्रिया की बात करें तो शुरू के दो सप्ताह तक क्रय केंद्रों पर खरीद ही नहीं हुई। इस दौरान राइस मिल मालिकों और व्यापारियों ने जमकर धान खरीदा। केंद्रों पर किसानों को मानकों का बहाना बनाकर लौटाया जाता रहा। कई जगह किसानों ने हंगामा भी किया लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। पूरनपुर में तो डीएम की किसान से नोकझोंक तक हो गई। केंद्र बनाने, खरीद प्रक्रिया और मिलों के संबद्धीकरण में हुए खेल की खबर शासन तक पहुंची तो खरीद में अनियमितता बरतने पर डिप्टी आरएमओ विकास चंद्र तिवारी को निलंबित कर दिया गया। अब इस कार्रवाई से खलबली है।
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हर स्तर पर हुआ खेल
अगर केंद्र बनाने की प्रक्रिया की बात करें तो सहकारी समितियों के माध्यम से प्रस्ताव दिए जाते हैं। उसके बाद खरीद एजेंसियां वहां केंद्र बनाती हैं। एजेंसी या विभाग के कर्मचारी को केंद्र प्रभारी बनाया जाता है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई ऐसे लोगों के कहने पर केंद्र बनाए गए जिनपर पूर्व में तमाम आरोप लगे थे। पुलिस कार्रवाई तक हुई थी। यह भी चर्चा रही कि प्रस्ताव लिखवाने के नाम पर वसूली की गई। हालांकि अधिकारी इन आरोपों को खारिज करते रहे।
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कई और पर भी गिर सकती है गाज
पिछले दिनों पूरनपुर के एएमओ राम कैलाश सोनकर को खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी करने पर हटा दिया गया था। अब डिप्टी आरएमओ निलंबित कर दिया गया। अधिकरियों का कहना है कि अंदरखाने जांच चल रही है। क्रय एजेंसी के कुछ कर्मचारी और विभाग के कई अधिकारी रडार पर हैं। ऐसे अफसरों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
डिप्टी आरएमओ पर जो कार्रवाई हुई है वो आरएफसी की रिपोर्ट पर हुई है। बाकी खरीद प्रक्रिया में तेजी आई है। क्रय केंद्रों से धान के उठान की समस्या आ रही थी। मिल मालिकों के साथ बैठक की है। उठान भी शुरू हो जाएगा। बारिश के चलते शुरुआत में कम खरीद हो सकी। लक्ष्य के अनुरूप खरीद पूरी होगी।
- प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम