प्रापर्टी खरीद में एग्रीमेंट का चलन बढ़ाया

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Thu, 16 Jan 2020 09:51 PM IST
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पीलीभीत। नोटबंदी का बताए गए उद्देश्य बहुत ज्यादा पूरे होते तो नजर नहीं आए, मगर प्रॉपर्टी कारोबार पर ब्रेक लग गए। माफिया ने इसमें भी तोड़ निकाल लिया। नंबर दो का धन खपाने के लिए माफिया ने किसानों से जमीनों का एग्रीमेंट कराकर स्टांप चोरी करनी शुरू कर दी। माफिया कृषि योग्य जमीनें किसानों से कम रेट पर एग्रीमेंट कराकर न केवल हर महीने करोड़ों के स्टांप चोरी कर रहे हैं बल्कि राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
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हाल ही में राज्य सरकार ने राजस्व बढ़ोत्तरी के लिए स्टांप बिक्री और रजिस्ट्री शुल्क की दरें बढ़ाने पर मंथन शुरू किया है। मगर, नोटबंदी के बाद पीलीभीत में स्टांप बिक्री हर साल घट रही है। इसके चलते राजस्व में भी कमी आ रही है। वर्ष 2016-17 से केवल एक बार ही रजिस्ट्रियों की संख्या बढ़ी। बाकी हर साल रजिस्ट्री की संख्या में कमी होती गई। इसके चलते सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचा। यह अब भी हो रहा है। इसलिए इस वित्तीय वर्ष में सबसे कम जमीनों की रजिस्ट्रियां हुई हैं। इसका असर राजस्व वसूली की भारी कमी के रूप में सामने आ रहा है।
जमीन के कम रेट दर्शाकर भूमाफिया कर रहे स्टांप चोरी
जमीन कारोबार से जुड़े माफिया रजिस्ट्री शुल्क से लेकर स्टांप खरीदने में खेल करते हैं। यह कृषि योग्य जमीन का किसानों से कम रेट पर सौदा करते हैं। फिर उसका एक निश्चित रेट पर एग्रीमेंट करा लेते हैं। उसके बाद उस जमीन पर मकान बनाकर खड़े करते हैं। जब ग्राहक उनको खरीदने पहुंचता है तो वह सीधे उसी किसान से उस मकान का बैनामा करा देते हैं। इससे जमीन की दो बार खरीद बिक्री में एक बार का स्टांप शुल्क पूरी तरह बच जाता है।
प्रॉपर्टी कारोबारी असली जमीन मालिकों को कम मूल्य बताकर उनकी जमीनों का बैनामा दूसरी पार्टियों को अधिक मूल्य पर बेचकर रजिस्ट्री शुल्क में हेरफेर करते हैं। इसमें सरकारी सिस्टम की भी शह होती है। फिर जब सर्किल रेट बढ़ने का नंबर आता है तो यही भू-माफिया राजस्व विभाग से मिलकर उस इलाके का सर्किल रेट बढ़वा लेते हैं। इससे इनकी जमीन की कीमतें भी बढ़ जाती हैं और उस पर बनने वाली कॉलोनियों की भी। प्रशासन ने बीते महीनों में कई ऐसे मामले पकड़े थे, जिसमें राजस्व की जमकर चोरी की गई, लेकिन अफसरों ने लेन-देने कर वे सब मामले दबा दिए।
राजस्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री से 73 करोड़ 70 लाख का राजस्व हासिल किया गया। मगर चालू वित्तीय वर्ष में रजिस्ट्री से मात्र 56 करोड़ दो लाख रुपये ही मिल पाए। इस साल अब तक के नौ महीने में मात्र 9827 जमीनों की रजिस्ट्री हुई। पिछले वर्षों की तुलना में जमीनों के बैनामों का यह आंकड़ा बहुत कम है। मतलब साफ है कि नोटबंदी के बाद सिस्टम की शह पर होने वाली हर साल की स्टांप चोरी और नंबर दो का पैसा प्रॉपर्टी में न लग पाने से जमीनों के बैनामों की संख्या में लगातार गिरावट आयी है।
सरकार ने रजिस्ट्री शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर उसको अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू की है। नई नीति के अनुसार रजिस्ट्री शुल्क की नई दरें प्रस्तावित हैं। हालांकि इनके लागू होने की तारीख अभी तय नहीं हैं, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि नई रजिस्ट्री दरें जल्द लागू हो सकती हैं। रजिस्ट्री की नई दर 50 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति पर दो प्रतिशत या अधिकतम 20 हजार रुपये होगी। 50 लाख से अधिक की संपत्ति पर अधिकतम 20 हजार रुपये शुल्क ही लगेगा। जबकि अब तक 20 लाख रुपये की रजिस्ट्री कराए जाने पर ही रजिस्ट्री शुल्क वसूला जाता है।
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