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चर्चित अनिल पाल हत्याकांड में पुन: विवेचना के दिए आदेश
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पीलीभीत। चर्चित अनिल पाल हत्याकांड प्रकरण के विवेचक द्वारा न्यायालय में दाखिल आरोपपत्र पर वादी ने न्यायालय में गलत धारा में आरोप पत्र दाखिल करने पर आपत्ति दाखिल की। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगलदेव सिंह ने सुनवाई के बाद क्षेत्राधिकारी (अपराध) को अपने अधीनस्थ अधिकारी से नियमानुसार पुनः विवेचना कराने का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि 14 फरवरी को मोहल्ला छोटा खुदागंज के रामौतार ने थाना कोतवाली में कंपनी संचालक वेद प्रकाश कश्यप व निधि मिश्रा के विरुद्ध अनिल पाल की हत्या कर शव छत से लटकाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने वेद प्रकाश कश्यप को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेजा।
विवेचना के दौरान मृतक को आत्महत्या के लिए विवश करने का मामला पाते हुए आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया। वादी रामौतार ने आरोपपत्र पर न्यायालय में आपत्ति दाखिल कर कहा कि हत्या के मामले में आत्महत्या के लिए विवश करने का आरोपपत्र में उल्लेख किया गया, जबकि विवेचना की प्रक्रिया एवं निष्पक्षता का ख्याल नहीं रखा गया।
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कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एवं गवाहों के बयान संकलित नहीं किए गए। न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुपालन के बिना ही जल्दबाजी में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद संबंधित क्षेत्राधिकारी (अपराध) को मामले की अग्रिम विवेचना अधीनस्थ अधिकारी से कराए जाने का आदेश दिया। संवाद
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गौरतलब है कि 14 फरवरी को मोहल्ला छोटा खुदागंज के रामौतार ने थाना कोतवाली में कंपनी संचालक वेद प्रकाश कश्यप व निधि मिश्रा के विरुद्ध अनिल पाल की हत्या कर शव छत से लटकाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने वेद प्रकाश कश्यप को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेजा।
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विवेचना के दौरान मृतक को आत्महत्या के लिए विवश करने का मामला पाते हुए आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया। वादी रामौतार ने आरोपपत्र पर न्यायालय में आपत्ति दाखिल कर कहा कि हत्या के मामले में आत्महत्या के लिए विवश करने का आरोपपत्र में उल्लेख किया गया, जबकि विवेचना की प्रक्रिया एवं निष्पक्षता का ख्याल नहीं रखा गया।
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कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एवं गवाहों के बयान संकलित नहीं किए गए। न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुपालन के बिना ही जल्दबाजी में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद संबंधित क्षेत्राधिकारी (अपराध) को मामले की अग्रिम विवेचना अधीनस्थ अधिकारी से कराए जाने का आदेश दिया। संवाद