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Pilibhit News: 14 माह में सिर्फ 40 फीसदी बन सके आभा आईडी कार्ड
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धर्मपाल यादव ।
बीसलपुर। इस ब्लॉक क्षेत्र में पिछले 14 माह में केवल 40 फीसदी लोगों के आभा आईडी कार्ड बन पाए हैं। यदि इसी धीमी गति से काम हुआ तो कार्ड बनने में तीन वर्ष लग जाएंगे। यहां 2.35 लाख लोगों के कार्ड बनने हैं।
इस ब्लॉक क्षेत्र में पिछले वित्तीय वर्ष के प्रथम माह अप्रैल से लोगों के आभा आईडी कार्ड बनने शुरू हुए थे। जो अब तक सिर्फ 40 फीसदी ही बन पाए हैं। 60 फीसदी लोगों के कार्ड बनना शेष हैं।
बता दें कि इस कार्य के लिए ग्रामीण क्षेत्र में 28 तो नगर क्षेत्र में तीन टीमें लगाई गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 1.35 लाख लोगों के और नगर क्षेत्र में लगभग एक लाख लोगों के कार्ड बनाए जाने हैं।
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फिलहाल कार्ड बनने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। जाहिर है कि इसी गति से कार्य चलता रहा था तो शेष 60 फीसदी लोगों के कार्ड बनने में अभी 22 माह और लगेंगे। इस प्रकार कार्ड बनने का कार्य तीन वर्ष में पूरा हो पाएगा।
शासन ने 31 मार्च 2024 तक सभी लोगों के कार्ड बनाए जाने का आदेश दिया था, लेकिन यहां शासन की मंशा के अनुरूप कार्य नहीं हो पा रहा है। इससे लोगों में आक्रोश है।
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क्या है आभा आईडी कार्ड
आभा आईडी कार्ड में संबंधित व्यक्ति की बीमारियों का पूरा विवरण होगा। कोई व्यक्ति चेकअप कराने जाएगा तो डॉक्टर उस व्यक्ति का आभा आईडी कार्ड का अध्ययन करेगा। उसके बाद ही दवाई देगा।
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आभा आईडी कार्ड बेहद धीमी गति से बनाए जाने के मामले में संबंधित अधिकारी पूरी तरह से जिम्मेदार है। अधिकारियों को चाहिए कि वे कार्य तेजी से कराएं।
- धर्मपाल यादव, गांव गोवल
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कार्ड बनाने का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में अधिकतर लोगों को इस योजना से काफी बिलंब से लाभ मिल सकेगा। जरूरी है कि कार्ड बनाने के कार्य में तेजी लाई जाए।
- राजेश कुमार, मोहल्ला दुबे
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शासन ने ग्रामीण क्षेत्र में आभा आईडी कार्ड बनाने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं और नगर क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंपी है। जो सही से अपने दायित्वों का निर्वहन नही कर रहीं हैं। जिस कारण कार्य पूरा होने में देरी हो रही है। कार्य को गति देने के लिए संबंधित को निर्देशित किया जाएगा।
-डॉ. लेखराज गंगवार, अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बीसलपुर
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इस ब्लॉक क्षेत्र में पिछले वित्तीय वर्ष के प्रथम माह अप्रैल से लोगों के आभा आईडी कार्ड बनने शुरू हुए थे। जो अब तक सिर्फ 40 फीसदी ही बन पाए हैं। 60 फीसदी लोगों के कार्ड बनना शेष हैं।
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बता दें कि इस कार्य के लिए ग्रामीण क्षेत्र में 28 तो नगर क्षेत्र में तीन टीमें लगाई गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 1.35 लाख लोगों के और नगर क्षेत्र में लगभग एक लाख लोगों के कार्ड बनाए जाने हैं।
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फिलहाल कार्ड बनने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। जाहिर है कि इसी गति से कार्य चलता रहा था तो शेष 60 फीसदी लोगों के कार्ड बनने में अभी 22 माह और लगेंगे। इस प्रकार कार्ड बनने का कार्य तीन वर्ष में पूरा हो पाएगा।
शासन ने 31 मार्च 2024 तक सभी लोगों के कार्ड बनाए जाने का आदेश दिया था, लेकिन यहां शासन की मंशा के अनुरूप कार्य नहीं हो पा रहा है। इससे लोगों में आक्रोश है।
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क्या है आभा आईडी कार्ड
आभा आईडी कार्ड में संबंधित व्यक्ति की बीमारियों का पूरा विवरण होगा। कोई व्यक्ति चेकअप कराने जाएगा तो डॉक्टर उस व्यक्ति का आभा आईडी कार्ड का अध्ययन करेगा। उसके बाद ही दवाई देगा।
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आभा आईडी कार्ड बेहद धीमी गति से बनाए जाने के मामले में संबंधित अधिकारी पूरी तरह से जिम्मेदार है। अधिकारियों को चाहिए कि वे कार्य तेजी से कराएं।
- धर्मपाल यादव, गांव गोवल
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कार्ड बनाने का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में अधिकतर लोगों को इस योजना से काफी बिलंब से लाभ मिल सकेगा। जरूरी है कि कार्ड बनाने के कार्य में तेजी लाई जाए।
- राजेश कुमार, मोहल्ला दुबे
शासन ने ग्रामीण क्षेत्र में आभा आईडी कार्ड बनाने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं और नगर क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंपी है। जो सही से अपने दायित्वों का निर्वहन नही कर रहीं हैं। जिस कारण कार्य पूरा होने में देरी हो रही है। कार्य को गति देने के लिए संबंधित को निर्देशित किया जाएगा।
-डॉ. लेखराज गंगवार, अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बीसलपुर

धर्मपाल यादव ।