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Pilibhit News: एक साल बाद भी नहीं शुरू हो सकी शिक्षकों की ऑनलाइन निगरानी
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पीलीभीत। कई बार सरकारी स्कूलों के शिक्षक कक्षाएं चलने के दौरान भी नदारद रहते हैं। इससे निपटने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से निगरानी को लेकर विगत वर्ष आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के बाद शिक्षकों की ऑनलाइन निगरानी की जानी थी, लेकिन जिले में तैनात शिक्षा विभाग के अधिकारी एक साल बाद भी इस आदेश का पालन नहीं करा पाए।
दरअसल, बीते कुछ सालों में शासन की ओर से परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने को लेकर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। तमाम योजनाओं के जरिये कवायद जारी है। बावजूद इसके आदेश तो पारित कर दिए जाते हैं, लेकिन उनका पालन जिले में बैठे अधिकारी नहीं करा पाते। इसी में एक आदेश शिक्षकों की ऑनलाइन निगरानी का भी था, जिसका यहां अनुपालन नहीं हो पाया।
बता दें कि औचक निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के कक्षाओं से नदारद रहने के कई मामले सामने आने के बाद शिक्षा निदेशक की ओर से आदेश जारी किया गया। जिसमे निपुण भारत मिशन को मानकों के अनुरूप लागू करने व स्कूलों की गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रकोष्ठ गठित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यह आदेश सिर्फ फाइलों तक ही रहा और जिला स्तर पर निगरानी के लिए कमेटी गठित नहीं हो सकी।
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इस तरह से होनी थी शिक्षकों की निगरानी
निदेशक की ओर से जारी आदेश के बाद जिले में निगरानी के लिए कमेटी गठित की जानी थी। इस कमेटी को बीएसए की ओर से जिलेभर के शिक्षाकर्मियों के मोबाइल नंबर मुहैया कराए जाने थे। यह निगरानी कमेटी प्रतिदिन 10 स्कूलों को चिह्नित करती और कक्षा संचालन के दौरान वीडियो या वॉयस कॉल से शिक्षकों की लोकेशन लेती। तीन से अधिक बार फोन नहीं उठाने पर शिक्षक को खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान था।-- -
फिलहाल ऐसे किसी आदेश की जानकारी मुझे नहीं है। शिक्षकों को स्कूल खुलने पर टैबलेट दिए जाएंगे। उसमें ही पूरी जानकारी रहेगी।
- अमित कुमार सिंह, बीएसए
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दरअसल, बीते कुछ सालों में शासन की ओर से परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने को लेकर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। तमाम योजनाओं के जरिये कवायद जारी है। बावजूद इसके आदेश तो पारित कर दिए जाते हैं, लेकिन उनका पालन जिले में बैठे अधिकारी नहीं करा पाते। इसी में एक आदेश शिक्षकों की ऑनलाइन निगरानी का भी था, जिसका यहां अनुपालन नहीं हो पाया।
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बता दें कि औचक निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के कक्षाओं से नदारद रहने के कई मामले सामने आने के बाद शिक्षा निदेशक की ओर से आदेश जारी किया गया। जिसमे निपुण भारत मिशन को मानकों के अनुरूप लागू करने व स्कूलों की गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रकोष्ठ गठित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यह आदेश सिर्फ फाइलों तक ही रहा और जिला स्तर पर निगरानी के लिए कमेटी गठित नहीं हो सकी।
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इस तरह से होनी थी शिक्षकों की निगरानी
निदेशक की ओर से जारी आदेश के बाद जिले में निगरानी के लिए कमेटी गठित की जानी थी। इस कमेटी को बीएसए की ओर से जिलेभर के शिक्षाकर्मियों के मोबाइल नंबर मुहैया कराए जाने थे। यह निगरानी कमेटी प्रतिदिन 10 स्कूलों को चिह्नित करती और कक्षा संचालन के दौरान वीडियो या वॉयस कॉल से शिक्षकों की लोकेशन लेती। तीन से अधिक बार फोन नहीं उठाने पर शिक्षक को खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान था।
फिलहाल ऐसे किसी आदेश की जानकारी मुझे नहीं है। शिक्षकों को स्कूल खुलने पर टैबलेट दिए जाएंगे। उसमें ही पूरी जानकारी रहेगी।
- अमित कुमार सिंह, बीएसए