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शासन तक पहुंचा एक साल पुराने भुगतान का विवाद तो बुलाई बैठक
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पीलीभीत। बीते साल हुई धान खरीद में उठान के चार करोड़ के भुगतान को लेकर राइस मिलर, ठेकेदार और एफसीआई के बीच चल रही खींचतान शासन तक पहुंची तो समाधान के लिए अफसर संजीदा हुए। डिप्टी आरएमओ ने राइस मिलर और ठेकेदारों को बुलाकर बातचीत की और ऑनलाइन आरएफसी ने भी ऑनलाइन दिक्कत को सुना। काफी जद्दोजहद के बाद समाधान निकल सका। वहीं, इस बार के परिवहन उठान के भुगतान को लेकर भी यही प्रक्रिया अपनाने की रणनीति बनाई गई।
साल 2019 में हुई धान खरीद के बाद एफसीआई में करीब 25 लाख क्विंटल चावल भेजा गया था। परिवहन ठुलाई का करीब चार करोड़ रुपये का भुगतान होना था। भुगतान में उस वक्त पेच फंस गया जब एफसीआई ने भुगतान ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के जरिए काम के लिए चुने गए ठेकेदारों को भुगतान करने की बात कह दी। चूंकि चावल का उठान राइस मिलर के द्वारा कराया गया था तो राइस मिलर को ही भुगतान चाहिए था। इसे लेकर एक साल से खींचतान चल रही थी, मगर कोई हल नहीं निकल सका था।
बीते दिनों मामला शासन तक पहुंच गया। शासन के अफसरों ने इस समस्या के समाधान के लिए निर्देशित किया। शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ डॉ. अविनाश झा ने अपने कार्यालय में समाधान के लिए राइस मिलर और ठेकेेदारों के साथ बैठक की। इसमें भुगतान को लेकर बातचीत की गई। आरएफसी बरेली ने भी ऑनलाइन सभी को सुना। करीब एक घंटे चली वार्ता के बाद हल निकाला जा सका है।
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एफसीआई जो पेमेंट करेगी, उसी से भुगतान राइस मिलर को किया जाएगा। इसके लिए ठेकेदारों को सात दिन के भीतर एक शपथ पत्र देना होगा। इसमें लिखना होगा कि उनके पक्ष से ही राइस मिलर ने उठान कराया था। इस बार भी इसी के तहत भुगतान प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दोनों पक्ष सहमत भी हुए हैं।
- डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ
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साल 2019 में हुई धान खरीद के बाद एफसीआई में करीब 25 लाख क्विंटल चावल भेजा गया था। परिवहन ठुलाई का करीब चार करोड़ रुपये का भुगतान होना था। भुगतान में उस वक्त पेच फंस गया जब एफसीआई ने भुगतान ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के जरिए काम के लिए चुने गए ठेकेदारों को भुगतान करने की बात कह दी। चूंकि चावल का उठान राइस मिलर के द्वारा कराया गया था तो राइस मिलर को ही भुगतान चाहिए था। इसे लेकर एक साल से खींचतान चल रही थी, मगर कोई हल नहीं निकल सका था।
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बीते दिनों मामला शासन तक पहुंच गया। शासन के अफसरों ने इस समस्या के समाधान के लिए निर्देशित किया। शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ डॉ. अविनाश झा ने अपने कार्यालय में समाधान के लिए राइस मिलर और ठेकेेदारों के साथ बैठक की। इसमें भुगतान को लेकर बातचीत की गई। आरएफसी बरेली ने भी ऑनलाइन सभी को सुना। करीब एक घंटे चली वार्ता के बाद हल निकाला जा सका है।
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एफसीआई जो पेमेंट करेगी, उसी से भुगतान राइस मिलर को किया जाएगा। इसके लिए ठेकेदारों को सात दिन के भीतर एक शपथ पत्र देना होगा। इसमें लिखना होगा कि उनके पक्ष से ही राइस मिलर ने उठान कराया था। इस बार भी इसी के तहत भुगतान प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दोनों पक्ष सहमत भी हुए हैं।
- डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ