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Pilibhit News: चार लाख का चेक बाउंस होने के मामले में एक साल की सजा, आठ लाख का जुर्माना
Mon, 07 Sep 2026 11:48 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:48 PM IST
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पीलीभीत। सिविल जज त्वरित न्यायालय/न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष सिंह ने चार लाख रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में आरोपी को दोषी पाते हुए आठ लाख रुपये जुर्माना और एक साल की सजा सुनाई।
अदालत में दाखिल परिवाद के मुताबिक ग्राम बाजारगंज पिपरिया मजरा निवासी चरनजीत सिंह ने वीर सिंह से कृषि भूमि खरीदने का सौदा 15 लाख रुपये में किया था। आरोपी को अलग-अलग किस्तों में कुल चार लाख रुपये दिए और बाद में बैनामा कराने को कहा। इसके बाद आरोपी टालमटोल करता रहा। अंत में जमीन बेचने से मना कर दिया। जब उससे अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की कढ़ेरचौरा पूरनपुर शाखा का चार लाख रुपये का चेक छह जुलाई 2024 को जारी किया।
चेक भुगतान के लिए बैंक में लगाया। खाते में पर्याप्त धनराशि न होने की टिप्पणी के साथ चेक अनादरित हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद रकम वापस नहीं की। तब परिवादी ने अदालत में मुकदमा दायर किया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी वीर सिंह को दोषी माना। अदालत ने कहा कि मामला वर्ष 2024 से लंबित है और चेक की धनराशि अब तक अदा नहीं की गई है। ऐसे में जुर्माना राशि आठ लाख रुपये में से 50 हजार रुपये राज्य सरकार के पक्ष में जमा करने तथा शेष 7.50 लाख रुपये परिवादी को वाद खर्च समेत क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया।
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आरोपी पत्नी की जमानत अर्जी मंजूर
- पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का लगा था आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। पत्नी को दूसरे व्यक्ति से फोन पर बात करते पकड़ लिए जाने से शुरू हुआ पति-पत्नी का झगड़ा पति को मौत की दहलीज तक ले गया। पत्नी पर पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा। कोर्ट ने आरोपी महिला की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
अभियोजन के मुताबिक, चार जून 2026 की रात आठ बजे माया देवी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उनके पुत्र धर्मेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी रेखा को एक अन्य व्यक्ति से फोन पर बात करते हुए पकड़ लिया था। इसी बात पर दोनों के बीच मारपीट और लड़ाई-झगड़ा होने लगा। रेखा के लगातार प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने पर धर्मेंद्र कुमार ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। इधर आरोपी रेखा देवी की ओर से सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की गई। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि रेखा निर्दोष है। उसने अपने पति को प्रताड़ित नहीं किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने रेखा की जमानत मंजूर कर ली है।
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अदालत में दाखिल परिवाद के मुताबिक ग्राम बाजारगंज पिपरिया मजरा निवासी चरनजीत सिंह ने वीर सिंह से कृषि भूमि खरीदने का सौदा 15 लाख रुपये में किया था। आरोपी को अलग-अलग किस्तों में कुल चार लाख रुपये दिए और बाद में बैनामा कराने को कहा। इसके बाद आरोपी टालमटोल करता रहा। अंत में जमीन बेचने से मना कर दिया। जब उससे अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की कढ़ेरचौरा पूरनपुर शाखा का चार लाख रुपये का चेक छह जुलाई 2024 को जारी किया।
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चेक भुगतान के लिए बैंक में लगाया। खाते में पर्याप्त धनराशि न होने की टिप्पणी के साथ चेक अनादरित हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद रकम वापस नहीं की। तब परिवादी ने अदालत में मुकदमा दायर किया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी वीर सिंह को दोषी माना। अदालत ने कहा कि मामला वर्ष 2024 से लंबित है और चेक की धनराशि अब तक अदा नहीं की गई है। ऐसे में जुर्माना राशि आठ लाख रुपये में से 50 हजार रुपये राज्य सरकार के पक्ष में जमा करने तथा शेष 7.50 लाख रुपये परिवादी को वाद खर्च समेत क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया।
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आरोपी पत्नी की जमानत अर्जी मंजूर
- पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का लगा था आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। पत्नी को दूसरे व्यक्ति से फोन पर बात करते पकड़ लिए जाने से शुरू हुआ पति-पत्नी का झगड़ा पति को मौत की दहलीज तक ले गया। पत्नी पर पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा। कोर्ट ने आरोपी महिला की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
अभियोजन के मुताबिक, चार जून 2026 की रात आठ बजे माया देवी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उनके पुत्र धर्मेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी रेखा को एक अन्य व्यक्ति से फोन पर बात करते हुए पकड़ लिया था। इसी बात पर दोनों के बीच मारपीट और लड़ाई-झगड़ा होने लगा। रेखा के लगातार प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने पर धर्मेंद्र कुमार ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। इधर आरोपी रेखा देवी की ओर से सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की गई। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि रेखा निर्दोष है। उसने अपने पति को प्रताड़ित नहीं किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने रेखा की जमानत मंजूर कर ली है।