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इंजेक्शन की जगह अब ओरल ट्रीटमेंट से हो सकेगा एमडीआर टीबी मरीजों का इलाज
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पीलीभीत। एमडीआर टीबी मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब उनका इलाज नई दवा बेटाकुलीन से किया जाएगा। उनको इंजेक्शन देने के बजाए ओरल ट्रीटमेंट द्वारा इलाज किया जा सकेगा। जिला क्षय रोग केंद्र पर भारत सरकार द्वारा भेजी गई दवाएं मरीजों को दी गईं।
एमडीएम टीबी। ये टीबी की वो स्टेज होती है जिसमें प्रचलित दवाएं (डॉट्स उपचार) नाकाम होने लगती हैं। एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी कहलाती है। सामान्य टीबी के उपचार में पांच फर्स्ट लाइन दवाएं लगभग फेल हो गई हैं। इसके कारण एमडीआर-टीबी के केस बढ़ते जा रहे हैं। इसके लिए बेटाकुलीन दवा बनाई गई है। ये दवा जिला क्षय रोग केंद्र पर पहुंच गई।
सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक देश टीबी मुक्त होगा। टीबी वार्ड में भर्ती मरीजों को सीएमओ डॉ. आलोक शर्मा, सीएमएस डॉ. विजय कुमार तिवारी, कार्यवाहक जिला टीबी अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा ये दवा दी गई। इस दवा के आने से टीबी के मरीजों को इंजेक्शन नहीं दिया जाएगा। अब सारे टीबी के मरीज को ओरल ट्रीटमेंट के द्वारा ही इलाज किया जाएगा।
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अब लंबे समय तक इंजेक्शन के दर्द से आराम मिल जाएगा। जिला क्षय रोग केंद्र द्वारा मरीजों को ये दवा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। यह दवा छह माह तक लगातार दी जाएगी और इसके साथ और भी एमडीआर की दवाएं भी मरीज को 9 से 11 महीने तक लगातार दी जाएंगी।
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एमडीएम टीबी। ये टीबी की वो स्टेज होती है जिसमें प्रचलित दवाएं (डॉट्स उपचार) नाकाम होने लगती हैं। एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी कहलाती है। सामान्य टीबी के उपचार में पांच फर्स्ट लाइन दवाएं लगभग फेल हो गई हैं। इसके कारण एमडीआर-टीबी के केस बढ़ते जा रहे हैं। इसके लिए बेटाकुलीन दवा बनाई गई है। ये दवा जिला क्षय रोग केंद्र पर पहुंच गई।
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सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक देश टीबी मुक्त होगा। टीबी वार्ड में भर्ती मरीजों को सीएमओ डॉ. आलोक शर्मा, सीएमएस डॉ. विजय कुमार तिवारी, कार्यवाहक जिला टीबी अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा ये दवा दी गई। इस दवा के आने से टीबी के मरीजों को इंजेक्शन नहीं दिया जाएगा। अब सारे टीबी के मरीज को ओरल ट्रीटमेंट के द्वारा ही इलाज किया जाएगा।
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अब लंबे समय तक इंजेक्शन के दर्द से आराम मिल जाएगा। जिला क्षय रोग केंद्र द्वारा मरीजों को ये दवा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। यह दवा छह माह तक लगातार दी जाएगी और इसके साथ और भी एमडीआर की दवाएं भी मरीज को 9 से 11 महीने तक लगातार दी जाएंगी।