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Pilibhit News: मझोला में अनुमति के बाद भी बाघ को नहीं पकड़ा, दहशत
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ना जहां सुखद संदेश है, वहीं दूसरी ओर जंगल से बाहर उनकी बढ़ती चहलकदमी ग्रामीणों के लिए खतरा बनती जा रही है। न्यूरिया और घुंघचाई में बाघ खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं तो अनुमति मिलने के बाद भी मझोला क्षेत्र में घूम रहे बाघ को विभाग नहीं पकड़ सका है। इससे दहशत है।
बाघों की बेहतर मौजूदगी के कारण देश और दुनिया में पहचान बनाने वाले पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना भी चुनौती हैं। आंकड़ों के अनुसार टाइगर रिजर्व में 75 से अधिक बाघों की मौजूदगी है। यह बाघ पर्यटन सत्र के दौरान पीटीआर को सुर्खियां दिलाते हैं, लेकिन जंगल से बाहर इनकी मौजूदगी लोगों पर मौत बनकर मंडराती है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
पिछले कुछ माह की बात करें तो जिले में पांच लोगों की बाघ के हमले में मौत हुई, वहीं एक बाघ को विभाग ने बेहोश कर पकड़ा है। इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। कई इलाकों में बाघों की चहलकदमी बरकरार है। इससे ग्रामीणों में दहशत है, फसलों की रखवाली प्रभावित हो रही है।
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परिस्थितियों को देखते हुए सामाजिक वानिकी विभाग की ओर से मझोला क्षेत्र में घूम रहे बाघ को पकड़ने के लिए शासन से अनुमति ली गई, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी उसकी पकड़ने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
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बाघों के जंगल से बाहर आने का सिलसिला जारी, वीडियो वायरल
टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर बाघों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। न्यूरिया, मझोला क्षेत्र के अलावा घुंघचाई क्षेत्र में भी बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। इन बाघों के वीडियो भी वायरल हो रहे है। वन विभाग फिलहाल निगरानी और जागरूकता पर अधिक जोर दे रहा है
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जंगल से सटे इलाकों में गन्ने की खेती भी हमलों का कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल से सटे इलाकों में गन्ने की बढ़ती खेती भी बाघ के हमलों का कारण बन रही है। जंगल सीमा से सटे इलाकों में बाघ गन्ने के खेतों में आसानी से शरण ले रहे हैं। ऐसे में इंसानों के उसके करीब पहुंचने पर हमले की स्थिति पैदा हो जाती है। इसको रोकने के लिए खेती में बदलाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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जंगल से सटे इलाकों में बाघों की चहलकदमी के मद्देनजर ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है। मझोला क्षेत्र में घूम रहे बाघ को पकड़ने की अनुमति मिल गई है। उसकी लोकेशन उत्तराखंड की सीमा में देखी जा रही है। टीमों को लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही बाघ को बेहोश कर पकड़ा जाएगा।
- भरत कुमार डीके, डीएफओ सामाजिक वानिकी
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बाघों की बेहतर मौजूदगी के कारण देश और दुनिया में पहचान बनाने वाले पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना भी चुनौती हैं। आंकड़ों के अनुसार टाइगर रिजर्व में 75 से अधिक बाघों की मौजूदगी है। यह बाघ पर्यटन सत्र के दौरान पीटीआर को सुर्खियां दिलाते हैं, लेकिन जंगल से बाहर इनकी मौजूदगी लोगों पर मौत बनकर मंडराती है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
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पिछले कुछ माह की बात करें तो जिले में पांच लोगों की बाघ के हमले में मौत हुई, वहीं एक बाघ को विभाग ने बेहोश कर पकड़ा है। इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। कई इलाकों में बाघों की चहलकदमी बरकरार है। इससे ग्रामीणों में दहशत है, फसलों की रखवाली प्रभावित हो रही है।
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परिस्थितियों को देखते हुए सामाजिक वानिकी विभाग की ओर से मझोला क्षेत्र में घूम रहे बाघ को पकड़ने के लिए शासन से अनुमति ली गई, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी उसकी पकड़ने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
बाघों के जंगल से बाहर आने का सिलसिला जारी, वीडियो वायरल
टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर बाघों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। न्यूरिया, मझोला क्षेत्र के अलावा घुंघचाई क्षेत्र में भी बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। इन बाघों के वीडियो भी वायरल हो रहे है। वन विभाग फिलहाल निगरानी और जागरूकता पर अधिक जोर दे रहा है
जंगल से सटे इलाकों में गन्ने की खेती भी हमलों का कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल से सटे इलाकों में गन्ने की बढ़ती खेती भी बाघ के हमलों का कारण बन रही है। जंगल सीमा से सटे इलाकों में बाघ गन्ने के खेतों में आसानी से शरण ले रहे हैं। ऐसे में इंसानों के उसके करीब पहुंचने पर हमले की स्थिति पैदा हो जाती है। इसको रोकने के लिए खेती में बदलाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
जंगल से सटे इलाकों में बाघों की चहलकदमी के मद्देनजर ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है। मझोला क्षेत्र में घूम रहे बाघ को पकड़ने की अनुमति मिल गई है। उसकी लोकेशन उत्तराखंड की सीमा में देखी जा रही है। टीमों को लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही बाघ को बेहोश कर पकड़ा जाएगा।
- भरत कुमार डीके, डीएफओ सामाजिक वानिकी