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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   No clear cause of death of the elephant autopsy

पोस्टमार्टम में हाथी की मौत का कारण स्पष्ट नहीं

Thu, 15 Sep 2016 10:51 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Thu, 15 Sep 2016 10:51 PM IST
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गुन्हान में मृत मिले हाथी का पशु चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया लेकिन  मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। उसका बिसरा सुरक्षित करने के बाद विभाग ने शव जलवा दिया।।
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नेपाल सीमा से सटे बराही रेंज के गुन्हान क्षेत्र में बुधवार दोपहर शारदा और बमनी नदी के मुहाने के पास दलदली स्थान पर 6-7 वर्ष के युवा हाथी का शव मिला था। बृहस्पतिवार को पूरनपुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नेमपाल सिंह और डॉ. राजकुमार सहित तीन लोगों की टीम ने करीब एक बजे के बाद घटना स्थल पहुंचकर हाथी का पोस्टमार्टम किया। जिसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इस दौरान टाइगर रिजर्व के एसडीओ डीपी सिंह, रेंजर अनिल शाह व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी मौजूद रहे। वन अधिकारियों के अनुसार दलदल में फंसने के बाद हार्ट फेल होने से हाथी की मौत होने की आशंका है। फिलहाल चिकित्सकों ने बिसरा सुरक्षित रख लिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी के माथे, सूंड़, कान, पीठ सहित कई स्थानों पर चोट के निशान थे। उनसे खून भी बहा था। घटना स्थल की स्थिति किसी आपराधिक घटना की ओर इशारा कर रही है। सूत्रों का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद किसी भी बवाल से बचने के लिए वन विभाग ने हाथी के शव दफन करने के बजाए लकड़ी और घास एकत्र कर जला दिया।
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शाम को फिर पहुंचा हाथियों का झुंड
दोपहर को पोस्टमार्टम और हाथी के अंतिम संस्कार के बाद अधिकारियों की टीम जैसे ही शारदा नदी पार कर वापस पहुंची वैसे ही 15-20 हाथियों का झुंड पुन: गुन्हान और कुतिया कवर क्षेत्र पहुंच गया। इस पर वनविभाग के अधिकारी कर्मचारी पटाखे आदि लेकर पुन: घटना स्थल लौट गए।
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प्रथम दृष्टया हाथी की मौत दलदल में फंसने के कारण होना प्रतीत हो रही है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं मिली है। चिकित्सकों ने बिसरा सुरक्षित किया है। हत्या अथवा किसी वन्यजीव अपराध से जुड़ा मामला नहीं है।

- वीके सिंह, वनसंरक्षक, बरेली वृत्त
आज होगी टाइगर रिजर्व मुख्यालय में बैठक
गुन्हान क्षेत्र में पिछले कई दिनों से हाथियों के देखे जाने को वनसंरक्षक ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि किसी जमाने में पीलीभीत के जंगल में हाथियों का कॉरीडोर हुआ था तो जो कालांतर में समाप्त हो गया। टाइगर रिजर्व की आवोहवा हाथियों के अनुकूल है और हाथियों का टाइगर रिजर्व में आना शुभ संकेत है। शुक्रवार को वह इसको लेकर दोनों डिवीजन के अधिकारियों के साथ टाइगर रिजर्व मुख्यालय में बैठक करेंगे। जिसमें हाथियों एवं मानव की सुरक्षा पर रणनीति बनाई जाएगी।
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