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अश्व पर सवार होकर आएंगी मां जगदंबा
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पीलीभीत। चैत्र नवरात्र की शुरूआत 13 अप्रैल से होगी। नवरात्र इस बार पूरे नौ दिन रहेगी। इस नवरात्र में मां जगदंबा अश्व पर सवारी करके पधारेगी। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मंगलवार के दिन अश्विनी नक्षत्र, अमृत सिद्ध योग बन रहा है। सूर्य रात्रि में मेष राशि में प्रवेश करेगा। यह अति शुभ फलदायी होंगे।
पंडित आशुतोष शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र की शुरूआत चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी 13 अप्रैल से होगी। नवरात्र के नौ दिवसों में मां जगदंबा के नौ स्वरूपों की पूजा, आराधना विधि-विधान से की जाएगी। मार्कंडेय पुराण के अनुसार मां दुर्गा का विधि-विधान से पूजन करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। कष्ट दूर होते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। समापन 22 अप्रैल को दशमी में होगा। चैत्र नवरात्र पर कलश स्थापना प्रात:काल 6:20 से लेकर 9:59 बजे शुभ मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11.41 से दोपहर 12:32 तक रहेगा। 12 अप्रैल की सुबह 8:01 बजे से प्रतिपदा लगेगी जोकि दूसरे दिन 13 अप्रैल की सुबह 10:17 बजे तक रहेगी। मंगलवार के दिन चैत्र नवरात्र का आरंभ होने पर मां दुर्गा का आगमन अश्व पर हो रहा है। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्र पर प्रतिपदा की सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक अमृत सिद्धि योग तथा अश्विनी नक्षत्र रहेगा। इस बीच घट स्थापना फलदायी होगा। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि नवरात्र पर मां दुर्गा पृथ्वी पर आती है। यहां वह नौ दिनों तक वास करते हुए भक्तों की साधना से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती है।
कब कौन से रूप का पूजन करें
प्रतिपदा- मां शैलपुत्री की पूजा और घट स्थापना
द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा
चतुर्थी- मां कूष्मांडा पूजा
पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा
षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा
सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा
अष्टमी- मां महागौरी
नवमी- मां सिद्धिदात्री
घट स्थापना मुहूर्त
घट स्थापना शुभ मुहूर्त - प्रात:काल 6:20 से 9:59 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - पूर्वाह्न 11:41 बजे से 12:32 बजे तक
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पंडित आशुतोष शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र की शुरूआत चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी 13 अप्रैल से होगी। नवरात्र के नौ दिवसों में मां जगदंबा के नौ स्वरूपों की पूजा, आराधना विधि-विधान से की जाएगी। मार्कंडेय पुराण के अनुसार मां दुर्गा का विधि-विधान से पूजन करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। कष्ट दूर होते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। समापन 22 अप्रैल को दशमी में होगा। चैत्र नवरात्र पर कलश स्थापना प्रात:काल 6:20 से लेकर 9:59 बजे शुभ मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11.41 से दोपहर 12:32 तक रहेगा। 12 अप्रैल की सुबह 8:01 बजे से प्रतिपदा लगेगी जोकि दूसरे दिन 13 अप्रैल की सुबह 10:17 बजे तक रहेगी। मंगलवार के दिन चैत्र नवरात्र का आरंभ होने पर मां दुर्गा का आगमन अश्व पर हो रहा है। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्र पर प्रतिपदा की सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक अमृत सिद्धि योग तथा अश्विनी नक्षत्र रहेगा। इस बीच घट स्थापना फलदायी होगा। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि नवरात्र पर मां दुर्गा पृथ्वी पर आती है। यहां वह नौ दिनों तक वास करते हुए भक्तों की साधना से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती है।
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कब कौन से रूप का पूजन करें
प्रतिपदा- मां शैलपुत्री की पूजा और घट स्थापना
द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा
चतुर्थी- मां कूष्मांडा पूजा
पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा
षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा
सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा
अष्टमी- मां महागौरी
नवमी- मां सिद्धिदात्री
घट स्थापना मुहूर्त
घट स्थापना शुभ मुहूर्त - प्रात:काल 6:20 से 9:59 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - पूर्वाह्न 11:41 बजे से 12:32 बजे तक