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मुफलिसीः पिता ने बेटी की शादी के लिए जोड़े थे 30 हजार रुपये, इलाज में सब खर्च हुए

Tue, 20 Sep 2022 12:46 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 Sep 2022 12:46 AM IST
सार

लखनऊ में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली दुष्कर्म पीड़ित किशोरी का परिवार बेहद गरीब है।आखिरी समय में बेटी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।पिता का कहना था कि उसके पास इतने रुपये नहीं हैं कि वह दूसरी जगह ले जाकर या अच्छे अस्पताल में इलाज करवा सके।

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Muflissi... had raised 30 thousand for marriage, all expenses in treatment,
गांव के मुख्य मार्ग पर दिन भर पसरा रहा सन्नाटा। संवाद - फोटो : PILIBHIT

विस्तार

पीलीभीत। लखनऊ में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली दुष्कर्म पीड़ित किशोरी का परिवार बेहद गरीब है। पिता मजदूरी करते हैं। उनके पास सिर्फ दो बीघा जमीन है। गांव में दो कमरों का छोटा सा घर है। किशोरी के पिता ने बताया कि बेटी की शादी के लिए उन्होंने अब तक 30 हजार रुपये इकट्ठे किए थे। लेकिन उसके इलाज में सब खर्च हो गए। अब उसके पास कुछ नहीं बचा।
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पिता के मुताबिक दम तोड़ने वाली बेटी सबसे बड़ी थी, इसके बाद दूसरी बेटी और सबसे छोटा बेटा है। गरीबी के कारण बड़ी बेटी को पढ़ा नहीं सका। दोनों छोटे बच्चे सरकारी स्कूल में जाते हैं। वह मजदूरी करके दिन में दो-ढाई सौ रुपये कमा लेता है। इसी में पूरे परिवार का पेट पालता है। बड़ी लड़की की शादी के लिए उसने अभी से रुपये इकट्ठा करने शुरू कर दिए थे। जुटाए गए 30 हजार रुपये इलाज में खर्च होंगे, उसे ऐसा नहीं पता था।
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पिता ने बताया कि उसके पास आयुष्मान कार्ड है। उससे भी करीब एक-डेढ़ लाख का इलाज हुआ। पीलीभीत पुलिस ने दस हजार रुपये भिजवाए थे। आखिरी समय में बेटी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। 800 रुपये का एक पाइप लाकर दिया। लेकिन वह भी काम नहीं आ सका और बिटिया हमेशा-हमेशा के लिए हमें छोड़ कर चली गई।
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डॉक्टर के पर्चे पर लिख दिया...बाहर ले जाने में असमर्थ हूं
सात सितंबर को जब किशोरी जिला अस्पताल पहुंची तो करीब 70-80 प्रतिशत झुलसी हुई थी। गंभीर हालत देखते हुए जिला अस्पताल के डॉक्टर आरएस यादव ने उसे लखनऊ रेफर के लिए लिख दिया था। पिता को बताया था कि लड़की की हालत बेहद नाजुक है। इस पर पिता ने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए किशोरी को लखनऊ ले जाने में असमर्थता जताई। पिता का कहना था कि उसके पास इतने रुपये नहीं हैं कि वह दूसरी जगह ले जाकर या अच्छे अस्पताल में इलाज करवा सके। इसलिए मजबूरी में उसने रेफर वाले पर्चे पर लिख दिया था कि मैं लड़की को बाहर ले जाने में असमर्थ हूं।

परिवार के खाते में भेजी 4.12 लाख की सहायता राशि
समाज कल्याण विभाग की तरफ से पीड़ित परिवार को 8.25 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसकी आधी राशि चार लाख, 12 हजार, 500 रुपये सोमवार को पीड़ित किशोरी के पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। शेष राशि चार्जशीट लगने के बाद दी जाएगी। एडीएम एफआर राम सिंह गौतम ने बताया कि सहायता राशि की किस्त पीड़ित परिवार के खाते में भेज दी है।
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