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जिला अस्पताल में पुलिस कस्टडी से बंदी भागने की अफवाह, मचा हड़कंप

Sat, 02 Jul 2022 01:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 01:18 AM IST
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Mental patient fled from district hospital, noise of prisoner escaping from custody
जिला अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ से जानकारी करते एसपी दिनेश कुमार पी। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। जिला अस्पताल से सुबह सात बजे एक मानसिक रोगी वार्ड का दरवाजा तोड़कर भाग गया। उसे पुलिस ने भर्ती कराया था। इसीलिए पुलिस हिरासत से बंदी के भागने की अफवाह फैल गई। इस खबर से पुलिस भी चौकन्नी हो गई। एसपी फोर्स के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और जानकारी जुटाई तो हकीकत पता लगी। उसकी पत्नी अस्पताल में छोड़कर चली गई थी।
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माधोटांडा थाना के गांव कलीनगर निवासी विशारुद्दीन मानसिक रोगी बताया जा रहा है। 24 जून को विशारुद्दीन का गांव के ही राजेश कुमार के साथ झगड़ा हो गया था। इस पर राजेश ने मारपीट, गालीगलौज, जान से मारने की धमकी और एससी एसटी के तहत विशारुद्दीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने विशारुद्दीन की मानसिक स्थिति को देखते हुए 41 ए का नोटिस देकर उसे उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया।
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मेडिकल परीक्षण के लिए पुलिस उसे सीएचसी पूरनपुर लेकर गई। पूरनपुर से मानसिक अस्पताल बरेली रेफर कर दिया गया। बरेली अस्पताल प्रशासन ने विशारुद्दीन की मेडिकल परीक्षण के लिए 29 जून को पीलीभीत जिला अस्पताल भेज दिया। तब से वह जिला अस्पताल में तीसरे मंजिल पर कक्ष संख्या 12 में भर्ती था। मानसिक रोगी होने के कारण वह स्टाफ पर हमला करने लगा था। इसलिए उसे अकेले वार्ड में भर्ती कर ताला डाल दिया गया।
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शुक्रवार सुबह वह गेट तोड़कर भाग गया था। इधर शोर मचा कि जिला अस्पताल से पुलिस हिरासत से बंदी भाग निकला है। इससे पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। एसपी दिनेश कुमार पी, एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी, सीओ सिटी सुनील दत्त, कोतवाल हरीशवर्धन सिंह और एलआईयू कर्मी भी पहुंच गए। माधोटांडा इंस्पेक्टर ने बताया कि जब विशारुद्दीन को देखा गया तो करीब 11 बजे वह अपने घर पहुंच गया था।
सात बजे भागा, 12 बजे हुई खबर
जिला अस्पताल से भले ही मरीज सुबह भागा हो मगर अस्पताल प्रशासन और पुलिस को दोपहर 12 बजे तब जानकारी हुई, जब सोशल मीडिया पर बंदी भागने की खबर वायरल हुई। जबकि जिला अस्पताल के डॉ. रमाकांत का कहना है कि वह आठ बजे ड्यूटी पर पहुंचे और मरीजों को देखते हुए जब नौ बजे विशारुद्दीन के कमरे में पहुंचे तो ताला टूटा देख तत्काल कोतवाली के लिए मेमो बना दिया, मगर किसी ने रिसीव नहीं किया।
स्टाफ कक्ष के सामने से भागा मरीज, सीएमएस को भी पता नहीं
जिस कक्ष से मानसिक रोगी सुबह भागा था उस कक्ष के ठीक सामने स्टाफ कक्ष है। इसके बाद भी मरीज के बारे में स्टाफ ने सीएमएस को बताने की जहमत नहीं उठाई। ऐसे में जिला अस्पताल स्टाफ कितना जागरूक है। इसका भी आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

- एससी एसटी में विशारुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पुलिस ने 41 का नोटिस देकर उसे परिवारवालों के सुपुर्द कर दिया था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिवारवालों ने पुलिस ने उसको भर्ती कराने में मदद मांगी थी। तभी एक सिपाही को भेजा गया था। विशारुद्दीन पुलिस की कस्टडी में नहीं था। - दिनेश कुुमार पी, एसपी
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