{"_id":"866b58361b81d552a6ef587df5f1c5f2","slug":"meena-laws-got-to-stay-right-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मीना को ससुराल में रहने का मिला हक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मीना को ससुराल में रहने का मिला हक
plibhit
Updated Fri, 04 Dec 2015 10:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपर सत्र न्यायाधीश अहसान हुसैन ने घरेलू हिंसा के मामले में पति की अपील खारिज कर दी है। एसीजेएम राजेश कुमार का फैसला बरकरार रखा है। विवाहिता मीना को अब पति के घर में रहने का अधिकार मिल गया है।
कसबा पूरनपुर की मीना का विवाह पीलीभीत शहर के मोहल्ला आशफजान निवासी महेश वर्मा के पुत्र राजन वर्मा के साथ करीब 12 साल पहले हुआ है। पति व ससुराल वालों ने दहेज में 50 हजार रुपये की मांग को लेकर पांच फरवरी 07 को मीना को मारपीट कर घर से निकाल दिया है। तब से वह अपने मायके में रह रही है। इस बीच पति ने मीना से तलाक लेने को याचिका भी की थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने इस तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अनुतोष पाने को मीना ने कोर्ट में अर्जी दी थी। एसीजेएम राजेश कुमार ने 26 मई 15 को फैसला सुनाया था। पति और ससुराल वालों को आदेश दिया गया था कि वे भविष्य में मीना के साथ घरेलू हिंसा न करें। वह ससुराल में रहे और ससुराल में निजी उपयोग की चीजों का प्रयोग करें। उसे 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति भी ससुराल वाले अदा करें। कोर्ट ने पति को यह भी आदेश दिया था कि वह पत्नी को ससम्मान विदा कराकर ले जाए और राजीखुशी रखे। पति और ससुराल वालों ने इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में अपील की थी। अपर सत्र न्यायाधीश अहसान हुसैन ने सुनवाई के बाद पति और ससुराल वालों की अपील खारिज कर दी है। निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है।
400 मामले लंबित हैं कोर्ट में
पीलीभीत। एसीजेएम डीएन सिंह की अदालत में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत करीब 400 शिकायतें लंाबित हैं। इनमें से आधी फाइलें गवाही में चल रही है। मीना के फैसले से अन्य पीड़ित महिलाओं को लाभ मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
कसबा पूरनपुर की मीना का विवाह पीलीभीत शहर के मोहल्ला आशफजान निवासी महेश वर्मा के पुत्र राजन वर्मा के साथ करीब 12 साल पहले हुआ है। पति व ससुराल वालों ने दहेज में 50 हजार रुपये की मांग को लेकर पांच फरवरी 07 को मीना को मारपीट कर घर से निकाल दिया है। तब से वह अपने मायके में रह रही है। इस बीच पति ने मीना से तलाक लेने को याचिका भी की थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने इस तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अनुतोष पाने को मीना ने कोर्ट में अर्जी दी थी। एसीजेएम राजेश कुमार ने 26 मई 15 को फैसला सुनाया था। पति और ससुराल वालों को आदेश दिया गया था कि वे भविष्य में मीना के साथ घरेलू हिंसा न करें। वह ससुराल में रहे और ससुराल में निजी उपयोग की चीजों का प्रयोग करें। उसे 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति भी ससुराल वाले अदा करें। कोर्ट ने पति को यह भी आदेश दिया था कि वह पत्नी को ससम्मान विदा कराकर ले जाए और राजीखुशी रखे। पति और ससुराल वालों ने इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में अपील की थी। अपर सत्र न्यायाधीश अहसान हुसैन ने सुनवाई के बाद पति और ससुराल वालों की अपील खारिज कर दी है। निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है।
विज्ञापन
400 मामले लंबित हैं कोर्ट में
पीलीभीत। एसीजेएम डीएन सिंह की अदालत में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत करीब 400 शिकायतें लंाबित हैं। इनमें से आधी फाइलें गवाही में चल रही है। मीना के फैसले से अन्य पीड़ित महिलाओं को लाभ मिलेगा।
विज्ञापन