{"_id":"6a36f48a9617963140023a70","slug":"making-birdhouses-for-sparrow-conservation-pilibhit-news-c-121-1-pbt1005-162317-2026-06-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: गौरेया संरक्षण के लिए बना रहीं बर्ड हाउस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: गौरेया संरक्षण के लिए बना रहीं बर्ड हाउस
विज्ञापन
महिलाओं की ओर से बनाए गए गोरैया के लिए छोटे घर। स्रोत विभाग।
महिलाओं को सशक्त बनाए जाने के लिए विभाग दे रहा प्रशिक्षण
पीलीभीत। गौरेया संरक्षण के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से बर्ड हाउस बनाए जा रहे हैं। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से भी सशक्त भी हो रही हैं। महिलाओं को सशक्त बनाए जाने के लिए विभाग की ओर से इन महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही यह महिलाएं प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जुड़ रही हैं।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन की ओर से करीब 30 से अधिक महिलाओं को गौरेया संरक्षण के लिए बर्ड हाउस बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद करीब 10 महिलाएं इसके संरक्षण के लिए आगे आई हैं। अब यह महिलाएं गौरेया के लिए बर्ड हाउस का निर्माण कर रही हैं। इसके साथ ही सरकारी विभागों की ओर से लगाई जाने वाली प्रदर्शनी व बाजार में इनको बेच रही हैं। इससे यह महिलाएं न सिर्फ गौरेया संरक्षण कर रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी बन रही हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की उपायुक्त वंदना सिंह ने बताया कि महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया था। अब कुछ महिलाओं ने इसका काम भी शुरू कर दिया है। संवाद
विज्ञापन
पीलीभीत। गौरेया संरक्षण के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से बर्ड हाउस बनाए जा रहे हैं। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से भी सशक्त भी हो रही हैं। महिलाओं को सशक्त बनाए जाने के लिए विभाग की ओर से इन महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही यह महिलाएं प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जुड़ रही हैं।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन की ओर से करीब 30 से अधिक महिलाओं को गौरेया संरक्षण के लिए बर्ड हाउस बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद करीब 10 महिलाएं इसके संरक्षण के लिए आगे आई हैं। अब यह महिलाएं गौरेया के लिए बर्ड हाउस का निर्माण कर रही हैं। इसके साथ ही सरकारी विभागों की ओर से लगाई जाने वाली प्रदर्शनी व बाजार में इनको बेच रही हैं। इससे यह महिलाएं न सिर्फ गौरेया संरक्षण कर रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी बन रही हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की उपायुक्त वंदना सिंह ने बताया कि महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया था। अब कुछ महिलाओं ने इसका काम भी शुरू कर दिया है। संवाद
विज्ञापन