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Pilibhit News: नौ करोड़ से एफडीआर तकनीक से बनेगा मझोला-ड्यूनीडैम मार्ग

Wed, 08 Jan 2025 11:49 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Wed, 08 Jan 2025 11:49 PM IST
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Majhola-Dunidam road will be built with FDR technology for Rs. 9 crores
मझोला से डयूनी डाम जाने वाला जर्जर मार्ग।संवाद
पीलीभीत। मझोला से ड्यूनीडैम मार्ग के दिन बहुरे हैं। लंबे समय से क्षतिग्रस्त इस मार्ग का निर्माण नौ करोड़ रुपये और एफडीआर यानी फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (पूरी गहराई पुनर्ग्रहण) तकनीक से कराया जाएगा। लोक निर्माण विभाग की जिले में यह पहली सड़क है, जो एफडीआर तकनीक से बनाई जाएगी। स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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मझोला से ड्यूनीडैम की दूरी करीब 10 किलोमीटर है। सड़क का करीब आठ किलोमीटर हिस्सा लंबे समय से गड्ढों में तब्दील है। जुलाई में आई बाढ़ ने इस मार्ग को और ज्यादा खस्ताहाल कर दिया। तीन स्थानों पर सड़क कट गई। विभाग ने रोड़े व मिट्टी डालकर जैसे-तैसे आवागमन बहाल किया।
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सड़क खस्ताहाल होने से 30 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग का प्रयोग वाहन चालक अमरिया और हरिद्वार हाईवे पर पहुंचने में भी करते हैं। सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने कई बार मांग की और शिकायती पत्र अफसरों को दिया था। अब इस सड़क के निर्माण को मंजूरी मिल गई है।
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इन गांवों के ग्रामीणों को मिलेगी आवागमन में सुविधा
गिधौर, ढाया फार्म, फुलिया फार्म, भंडारा, बहरुआ, रानी कॉलोनी, टोडरपुर, जोशी कॉलोनी, सूरजपुर, मझरा फार्म, बड़वार, दहा फार्म, ढाकी फार्म, ऐठपुर आदि के करीब 30 गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।

साढ़े पांच मीटर चौड़ाई में बनेगा 8.1 किमी मार्ग
लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता राजेश चौधरी ने बताया कि मझोला-ड्यूनीडैम मार्ग का प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है। नौ करोड़ की लागत से 8.1 किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया जाएगा। सड़क की चौड़ाई साढ़े पांच मीटर होगी। अब इसकी टेंडर प्रक्रिया चल रही है।


यह है एफडीआर तकनीक

एफडीआर यानी फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (पूरी गहराई पुनर्ग्रहण) को एक रीसाइक्लिंग तरीका कहा जा सकता है। इसमें खराब हो चुकी सड़क को उखाड़कर निकले मैटेरियल को दोबारा तैयार कर पूरी सड़क पर डाल दिया जाता है। एक्सईएन राजेश चौधरी ने बताया कि सड़क की धूल को साफ करने के बाद उस पर फैब्रिक को बिछाया जाता है, ताकि वह नमी को सोख ले। इस तकनीकी से सड़क निर्माण में लागत भी कम आती है। सड़क टिकाऊ बनती है, जल्दी मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती है।
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