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असहयोग आंदोलन से पहले पीलीभीत रेलवे स्टेशन पर बीस मिनट रुके थे महात्मा गांधी

Sat, 02 Oct 2021 01:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:01 AM IST
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Mahatma Gandhi stayed for twenty minutes at Pilibhit railway station before the non-cooperation movement
पीलीभीत। बहुत कम लोगों को पता होगा कि पीलीभीत जनपद से महात्मा गांधी का सीधा जुड़ाव रहा है। क्रांतिकारी कुंवर भगवान सिंह उनसे प्रेरित होकर ही आजादी के आंदोलन में कूदे थे। महात्मा गांधी खुद तीन बार पीलीभीत आए। असहयोग आंदोलन शुरू होने से पहले ट्रेन से सफर करते वक्त गांधी जी पीलीभीत रेलवे स्टेशन से होकर गुजरे थे। अली बंधु उनके साथ थे। जैसे ही आजादी के दीवानों को पता चला तो लोग स्टेशन पर एकत्र हो गए। स्टेशन पर ही मंच बनाया गया और गांधी जी को लोगों ने देखा।
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आजादी के आंदोलन को लेकर मौलाना मोहम्मद अली ने संबोधित किया पर गांधी जी नहीं बोले, वह सिर्फ मंच पर बैठे रहे। करीब 20 मिनट तक गांधी जी अपने पहले दौरे में पीलीभीत स्टेशन पर रहे। दूसरी बार जब गांधी जी पीलीभीत आए तो नगर पालिका की ओर से उनका स्वागत और अभिनंदन किया गया। गांधी जी को एक चांदी की तस्तरी सम्मान स्वरूप भेंट की गई। तस्तरी भेंट करने वालों ने तब गांधी जी से कहा था- यह स्वदेशी है। इस पर गांधी जी बोले- इसमें तो अंग्रेजी के अक्षर खुदे हुए हैं। यह कहते हुए गांधी ने राजभाषा हिंदी का गौरव बढ़ाया था। तीसरी बार महात्मा गांधी सन् 1930 के नमक सत्याग्रह आंदोलन के दौरान पीलीभीत आए। साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी ने पीलीभीत के अपराजेय योद्धा कुंवर भगवान सिंह में महात्मा गांधी की पीलीभीत यात्राओं का उल्लेख किया है।
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असहयोग आंदोलन से हिली थी अंग्रेजी शासन की नींव
अंग्रेजी शासन की बढ़ती ज्यादतियों का विरोध करने के लिए महात्मा गांधी ने पहली अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन का आगाज किया था। कुछ ही वर्षों में शहरों से लेकर गांव देहात में आंदोलन का असर दिखाई देने लगा था। स्वतंत्रता संग्राम के लिए 1857 की क्रांति के बाद अगर अंग्रेजी शासन की नींव किसी आंदोलन से हिली थी तो वह था असहयोग आंदोलन। लेकिन अहम बात यह भी है कि असहयोग आंदोलन से पूर्व दो बार गांधी जी पीलीभीत आए थे। असहयोग आंदोलन का असर पीलीभीत में ज्यादा नहीं जोर नहीं था, पर खिलाफत आंदोलन का असर दिखने लगा था। कल्लन शाह खिलाफत का झंडा उठाया करते थे। उनका एक गीत आजादी के आंदोलन के लिए लोगों को प्रेरित करता था जिसके बोल थे- कल्लन चले पैइयां-पैइंया, झंडा उठाइ के। सुधीर विद्यार्थी द्वारा लिखित किताब अपराजेय योद्धा कुंवर भगवान सिंह में इसका उल्लेख है।
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