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Pilibhit News: रामभक्त हनुमान ने जलाई सोने की लंका

Tue, 29 Oct 2024 02:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 29 Oct 2024 02:41 AM IST
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Lord Ram's devotee Hanuman burnt the golden Lanka
अमरिया में रामलीला में लीला का किया गया मंचन।संवाद
अमरिया। रामलीला में सोमवार को लंका दहन की लीला का मंचन वृंदावन से आए कलाकारों ने किया । सोने की लंका का दहन होते ही वहां मौजूद लोग श्री राम के जयकारे लगाने लगे।
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हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका जाते हैं, यहां पर अशोक वाटिका में बैठीं माता सीता को राक्षस तरह तरह की यातनाएं दे रहे हैं। कुछ क्षण बीतने के बाद प्रभु श्रीराम द्वारा दी गई मुद्रिका को माता सीता के सामने डालकर हनुमान जी परिचय देते हैं, माता सीता की आज्ञा लेकर फल खाने के लिए चले जाते हैं।
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जहां फल खाने के लिए हनुमान जी वृक्षों को तहस-नहस करने लगते हैं। पहरेदार उन्हें रोक नहीं पाते। सूचना पर रावण सेना के साथ पुत्र अक्षय कुमार को रोकने के लिए भेजता है। हनुमान जी सभी को परास्त कर देते हैं। इस पर रावण अपने पुत्र मेघनाद को हनुमान को पकड़ने के लिए भेजता हैं। मेघनाद हनुमान जी को बांधकर रावण के पास ले जाता है।
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जहां सभी हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने के सुझाव देते हैं। इसके बाद राक्षस हनुमान जी की पूंछ में आग लगा देते हैं। इसके बाद हनुमान जी लघु रूप धारण कर लंका में आग लगा देते हैं। यही लीला को विराम दिया जाता है।
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रावण-अंगद संवाद, लक्ष्मण को शक्ति लगने की लीला का मंचन

पूरनपुर। रामलीला में सोमवार को रावण-अंगद संवाद और लक्ष्मण को शक्ति लगने की लीला का मंचन किया गया।
मंचन में दिखाया गया कि लंका दहन और रामेश्वरम स्थापना के बाद श्रीराम के दूत अंगद रावण के दरबार में पहुंचते हैं। अंगद दरबार में रावण को श्रीराम से संधि कर सीता जी को वापस करने के लिए कहते है। तब रावण उसका पैर पकड़कर फेंकने के लिए अपनी सैनिकों से कहता है तो अंगद उसका एक पैर ही किसी के न उठा पाने की बात कहते हैं।

किसी से न पैर न हिलने पर रावण खुद अंगद का पैर उठाने को बढ़ता है। तब अंगद अपना पैर पीछे कर रावण को श्रीराम के पैर पकड़ने के लिए कहते है। दूत के लौटने के बाद दोनों ओर से युद्ध होता है। युद्ध में मेघनाद ब्रह्म्म शक्ति का प्रयोग करते है। जिसके लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते है। लक्ष्मण के मूर्छित होते ही रामा दल में शोक की लहर दौड़ जाती है। बाद में हनुमान जी लंका पहुंचकर सुषैण वैद्य को लाते है। सुषैण वैद्य के बताने पर वे संजीवनी बूटी की तलाश में निकल जाते है। यहीं लीला का विराम दिया जाता है। संवाद
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