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लौटने लगे प्रवासी तो कम पड़ने लगीं बसें
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एक रोडवेज बस में ठूसीं गई सवारियां।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना संक्रमण बढ़ने पर प्रवासियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। दिल्ली में लॉकडाउन लगा तो वापसी का सिलसिला तेज हो गया है। वहीं, पंचायत चुनाव के चलते बसों की संख्या कम हो चुकी हैं। ऐसे में प्रवासियों को सवारी के लिए सर्वाधिक परेशान होना पड़ रहा है। दिल्ली से आने वाली बसें ठसाठस भरी र्हुइं हैं।
रोजी रोटी कमाने के लिए जिले के भी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली रहते हैं। दिल्ली में संक्रमण बढ़ा तो लॉकडाउन लगाया गया है। अभी 26 अप्रैल तक किए गए लॉकडाउन के बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। ऐसे में प्रवासियों ने वापसी का ही मन बनाया है। अभी वाहनों की आवाजाही है, कहीं आगे चलकर यह भी पिछले साल की तरह बंद न हो जाएं, इसलिए कोई रिस्क नहीं ले रहा। लगातार प्रवासियों की वापसी बढ़ गई है। मंगलवार को दिल्ली से आने वाली सभी बसें फुल थीं। नौगवां चौराहा पर उतर रहे प्रवासी मजदूरों के चेहरों पर लॉकडाउन का डर दिखाई दे रहा था। इधर, पंचायत चुनाव के चलते कई बसें गैर जनपद चुनाव ड्यूटी में गई हुई हैं। पीलीभीत -दिल्ली रूट पर 40 बसों का संचालन हो रहा था। चुनाव शुरू होने के बाद 24 बसें रह गईं थीं। सोमवार को उमड़ी भीड़ को देखकर मंगलवार को दिल्ली रूट पर 13 बसों को बढ़ा दिया गया। मगर, ये बसें भी प्रवासियों की संख्या के आगे नाकाफी साबित रही। कई बसों में यात्री ठूसकर भरे हुए थे।
दिल्ली से आने की बात भी छिपाते नजर आए प्रवासी
दिल्ली में लॉकडाउन के बाद वापसी करने वाले प्रवासी बचते से नजर आए। अगर कोई उनसे पूछे तो वह दिल्ली से वापसी करने की बात छिपा रहे थे। कोई लखनऊ तो कोई आगरा आदि शहरों का नाम लेकर टाल रहा था। यह सब कोरोना जांच से बचने के लिए माना जाता रहा।
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संक्रमित हो जाएं, मगर घर तो पहुंच गए
दिल्ली से पीलीभीत पहुंची बस में सवार प्रवासी रामलाल समेत अन्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में लॉकडाउन की सीमा बढ़ाई जा सकती है। काम धंधे बंद हो गए थे, कहीं पिछले साल की तरह न फंस जाए, इसलिए वापसी में देरी नहीं की। फिर तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाता। किसी तरह अपने घर पहुंच गए। अगर संक्रमित भी हो जाते हैं तो अपने घर तो पहुंच गए।
दिल्ली रूट पर एक ट्रेन, उसमें भी जनरल कोच नहीं
दिल्ली से लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए पीलीभीत आने के लिए सिर्फ रोडवेज बसों का ही सहारा है। इस रूट पर दिल्ली के लिए सिर्फ एक ट्रेन है। उसमें भी जनरल कोच नहीं है। ऐसे में मजदूरों के लिए इस ट्रेन से कोई लाभ नहीं है। हालांकि इस ट्रेन से मंगलवार को बड़ी संख्या में दिल्ली की ओर से अन्य यात्री जंक्शन पर उतरे। रोडवेज बसों की कमी इन दिनों प्रवासी मजदूरों के लिए काफी खल रही है। यही आलम रहा तो फिर प्रवासी मजदूरों के लिए पैदल ही घरों की ओर रुख करना पड़ सकता है।
प्रवासियों की संख्या सैकड़ों में, कोरोना जांच किट सिर्फ 75
परिवहन निगम के बस स्टैंड पर यात्रियों की कोरोना जांच के लिए कोविड जांच केंद्र खोला गया है। शत प्रतिशत जांच के निर्देश दिए गए हैं। मगर, स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का आकलन इसी बात से किया जा सकता है कि मंगलवार को दोपहर दो बजे तक सिर्फ 25 लोगों की जांच हुई थी। स्वास्थ्यकर्मियों से एंटीजन किट की जानकारी पर पता चला कि केंद्र पर इस समय करीब 75 किट उपलब्ध है। बाकी स्टॉक में हैं। खास बात तो यह है कि सभी रूट पर से करीब चार सौ से अधिक प्रवासी आ रहे हैं। मगर, इतनी कम किट लेकर ही कर्मचारी को बैठा रखा है।
पंचायत चुनाव में बसों को भेजा गया है। दिल्ली रूट पर 24 बसों का संचालन किया जा रहा था। मंगलवार को 13 बसें और बढ़ा दी गई हैं। दिल्ली से लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए लगातार बसों का बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। चुनाव से लौट रहीं बसों को तत्काल भेजा जा रहा है। - वीके गंगवार, एआरएम परिवहन निगम
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रोजी रोटी कमाने के लिए जिले के भी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली रहते हैं। दिल्ली में संक्रमण बढ़ा तो लॉकडाउन लगाया गया है। अभी 26 अप्रैल तक किए गए लॉकडाउन के बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। ऐसे में प्रवासियों ने वापसी का ही मन बनाया है। अभी वाहनों की आवाजाही है, कहीं आगे चलकर यह भी पिछले साल की तरह बंद न हो जाएं, इसलिए कोई रिस्क नहीं ले रहा। लगातार प्रवासियों की वापसी बढ़ गई है। मंगलवार को दिल्ली से आने वाली सभी बसें फुल थीं। नौगवां चौराहा पर उतर रहे प्रवासी मजदूरों के चेहरों पर लॉकडाउन का डर दिखाई दे रहा था। इधर, पंचायत चुनाव के चलते कई बसें गैर जनपद चुनाव ड्यूटी में गई हुई हैं। पीलीभीत -दिल्ली रूट पर 40 बसों का संचालन हो रहा था। चुनाव शुरू होने के बाद 24 बसें रह गईं थीं। सोमवार को उमड़ी भीड़ को देखकर मंगलवार को दिल्ली रूट पर 13 बसों को बढ़ा दिया गया। मगर, ये बसें भी प्रवासियों की संख्या के आगे नाकाफी साबित रही। कई बसों में यात्री ठूसकर भरे हुए थे।
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दिल्ली से आने की बात भी छिपाते नजर आए प्रवासी
दिल्ली में लॉकडाउन के बाद वापसी करने वाले प्रवासी बचते से नजर आए। अगर कोई उनसे पूछे तो वह दिल्ली से वापसी करने की बात छिपा रहे थे। कोई लखनऊ तो कोई आगरा आदि शहरों का नाम लेकर टाल रहा था। यह सब कोरोना जांच से बचने के लिए माना जाता रहा।
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संक्रमित हो जाएं, मगर घर तो पहुंच गए
दिल्ली से पीलीभीत पहुंची बस में सवार प्रवासी रामलाल समेत अन्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में लॉकडाउन की सीमा बढ़ाई जा सकती है। काम धंधे बंद हो गए थे, कहीं पिछले साल की तरह न फंस जाए, इसलिए वापसी में देरी नहीं की। फिर तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाता। किसी तरह अपने घर पहुंच गए। अगर संक्रमित भी हो जाते हैं तो अपने घर तो पहुंच गए।
दिल्ली रूट पर एक ट्रेन, उसमें भी जनरल कोच नहीं
दिल्ली से लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए पीलीभीत आने के लिए सिर्फ रोडवेज बसों का ही सहारा है। इस रूट पर दिल्ली के लिए सिर्फ एक ट्रेन है। उसमें भी जनरल कोच नहीं है। ऐसे में मजदूरों के लिए इस ट्रेन से कोई लाभ नहीं है। हालांकि इस ट्रेन से मंगलवार को बड़ी संख्या में दिल्ली की ओर से अन्य यात्री जंक्शन पर उतरे। रोडवेज बसों की कमी इन दिनों प्रवासी मजदूरों के लिए काफी खल रही है। यही आलम रहा तो फिर प्रवासी मजदूरों के लिए पैदल ही घरों की ओर रुख करना पड़ सकता है।
प्रवासियों की संख्या सैकड़ों में, कोरोना जांच किट सिर्फ 75
परिवहन निगम के बस स्टैंड पर यात्रियों की कोरोना जांच के लिए कोविड जांच केंद्र खोला गया है। शत प्रतिशत जांच के निर्देश दिए गए हैं। मगर, स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का आकलन इसी बात से किया जा सकता है कि मंगलवार को दोपहर दो बजे तक सिर्फ 25 लोगों की जांच हुई थी। स्वास्थ्यकर्मियों से एंटीजन किट की जानकारी पर पता चला कि केंद्र पर इस समय करीब 75 किट उपलब्ध है। बाकी स्टॉक में हैं। खास बात तो यह है कि सभी रूट पर से करीब चार सौ से अधिक प्रवासी आ रहे हैं। मगर, इतनी कम किट लेकर ही कर्मचारी को बैठा रखा है।
पंचायत चुनाव में बसों को भेजा गया है। दिल्ली रूट पर 24 बसों का संचालन किया जा रहा था। मंगलवार को 13 बसें और बढ़ा दी गई हैं। दिल्ली से लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए लगातार बसों का बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। चुनाव से लौट रहीं बसों को तत्काल भेजा जा रहा है। - वीके गंगवार, एआरएम परिवहन निगम