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बढ़ते खाद के दाम...मुश्किल में किसान
सार
धान की रोपाई के बाद किसानों को फॉस्फेट खाद के दामों ने रुलाया।समय पर खाद बाजार में उपलब्ध नहीं हुई मारामारी की स्थिति पैदा हो जाएगी।कजरी के रहने वाले किसान विक्की बताते हैं धान की फसल तैयार है।
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ललौरीखेड़ा पीसीएफ गोदाम में निरीक्षण करते जिला कृषि अधिकारी व अन्य। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
विस्तार
पीलीभीत। धान की रोपाई के बाद किसानों को फॉस्फेट खाद के दामों ने रुलाया। उसके बाद मौसम अनुकूल न रहने के कारण वैकल्पिक सिंचाई की व्यवस्था की मार झेलनी पड़ी। अब रबी की फसल में महंगी खाद की चिंता सताने लगी है, क्योंकि जिले में वर्तमान में डीएपी की उपलब्धता बेहद कम है। सप्लाई कम होने के कारण पिछले साल की तरह इस बार भी डीएपी निर्धारित कीमत से ज्यादा कीमत पर बिकने के हालात पैदा हो गए हैं।
अक्तूबर से रबी का सीजन शुरू हो रहा है। जिले में करीब 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुआई होने का अनुमान है। गेहूं की बुुआई के लिए हर साल करीब 18 हजार एमटी से ज्यादा डीएपी खाद की जरूरत होती है। मौजूदा समय में सहकारी समितियों और बफर गोदाम में साढ़े चार हजार एमटी से ज्यादा डीएपी मौजूद है।
इन दिनों डीएपी की सप्लाई बेहद कम है। समय पर खाद बाजार में उपलब्ध नहीं हुई मारामारी की स्थिति पैदा हो जाएगी। खाद की किल्लत होने पर किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ेगी। पिछले साल की बात करें तो डीएपी की कीमत 1200 रुपये थी, लेकिन किसानों को 1600 रुपये प्रति बैग तक कीमत चुकानी पड़ी थी। दूसरी तरफ प्राइवेट दुकानों पर भी डीएपी की सप्लाई बेहद कम है। इसका असर अभी से देखने को मिल रहा है।
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‘समय पर खाद नहीं मिलती तो ब्लैक में खरीदनी पड़ती है’
पूरनपुर क्षेत्र के गांव जादौंपुर खुर्द के राम औतार बताते हैं कि पिछले साल सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिल रही थी। उन्होंने ब्लैक में 1600 रुपये में डीएपी खरीदी। कजरी के रहने वाले किसान विक्की बताते हैं धान की फसल तैयार है। अक्तूबर के पहले सप्ताह में कट जाएगी। वह अभी से डीएपी खाद का बंदोबस्त करने में जुट गए हैं। समितियों पर नवंबर में खाद आती है जबकि जरूरत अक्तूबर में ही होती है। मजबूरन प्राइवेट दुकानों से डीएपी खरीदनी पड़ती है।
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साढ़े चार हजार एमटी से ज्यादा डीएपी उपलब्ध होने का दावा
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव व एआर कोऑपरेटिव वीर विक्रम सिंह ने शनिवार को ललौरीखेड़ा स्थित पीसीएफ के गोदाम का निरीक्षण किया। यहां डीएपी की उपलब्धता देखी व स्टॉक चेक किया। कृषि अधिकारी विनोद यादव ने बताया कि खरीफ के सीजन में 12580 मीट्रिक टन डीएपी मिलने का लक्ष्य था। इसके मुकाबले जिले 15740 एमटी उपलब्ध हुई। 10897 एमटी डीएपी का वितरण हुआ। अब भी जिले में 4843 एमटी डीएपी सहकारी समितियों व गोदामों में उपलब्ध है। एक अक्तूबर को जिले को रबी फसलों की बुआई के लिए लक्ष्य मिल जाएगा।
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बढ़ चुके हैं फॉस्फेट खाद के दाम
इस बार खरीफ की सीजन में सरकार ने डीएपी के कीमत 1200 से बढ़ाकर 1350 रुपये प्रति बैग कर दी है। एनपीके खाद के दाम 1175 रुपये से बढ़ाकर 1440 रुपये प्रति बैग हो गए। दूसरी तरफ सिंगल सुपर फॉस्फेट की कीमत 360 से बढ़कर 510 रुपये प्रति बैग हो गई। गेहूं की बुआई में सबसे ज्यादा डीएपी और सिंगल सुपर फास्फेट की मांग रहती है।
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अक्तूबर से रबी का सीजन शुरू हो रहा है। जिले में करीब 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुआई होने का अनुमान है। गेहूं की बुुआई के लिए हर साल करीब 18 हजार एमटी से ज्यादा डीएपी खाद की जरूरत होती है। मौजूदा समय में सहकारी समितियों और बफर गोदाम में साढ़े चार हजार एमटी से ज्यादा डीएपी मौजूद है।
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इन दिनों डीएपी की सप्लाई बेहद कम है। समय पर खाद बाजार में उपलब्ध नहीं हुई मारामारी की स्थिति पैदा हो जाएगी। खाद की किल्लत होने पर किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ेगी। पिछले साल की बात करें तो डीएपी की कीमत 1200 रुपये थी, लेकिन किसानों को 1600 रुपये प्रति बैग तक कीमत चुकानी पड़ी थी। दूसरी तरफ प्राइवेट दुकानों पर भी डीएपी की सप्लाई बेहद कम है। इसका असर अभी से देखने को मिल रहा है।
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‘समय पर खाद नहीं मिलती तो ब्लैक में खरीदनी पड़ती है’
पूरनपुर क्षेत्र के गांव जादौंपुर खुर्द के राम औतार बताते हैं कि पिछले साल सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिल रही थी। उन्होंने ब्लैक में 1600 रुपये में डीएपी खरीदी। कजरी के रहने वाले किसान विक्की बताते हैं धान की फसल तैयार है। अक्तूबर के पहले सप्ताह में कट जाएगी। वह अभी से डीएपी खाद का बंदोबस्त करने में जुट गए हैं। समितियों पर नवंबर में खाद आती है जबकि जरूरत अक्तूबर में ही होती है। मजबूरन प्राइवेट दुकानों से डीएपी खरीदनी पड़ती है।
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साढ़े चार हजार एमटी से ज्यादा डीएपी उपलब्ध होने का दावा
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव व एआर कोऑपरेटिव वीर विक्रम सिंह ने शनिवार को ललौरीखेड़ा स्थित पीसीएफ के गोदाम का निरीक्षण किया। यहां डीएपी की उपलब्धता देखी व स्टॉक चेक किया। कृषि अधिकारी विनोद यादव ने बताया कि खरीफ के सीजन में 12580 मीट्रिक टन डीएपी मिलने का लक्ष्य था। इसके मुकाबले जिले 15740 एमटी उपलब्ध हुई। 10897 एमटी डीएपी का वितरण हुआ। अब भी जिले में 4843 एमटी डीएपी सहकारी समितियों व गोदामों में उपलब्ध है। एक अक्तूबर को जिले को रबी फसलों की बुआई के लिए लक्ष्य मिल जाएगा।
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बढ़ चुके हैं फॉस्फेट खाद के दाम
इस बार खरीफ की सीजन में सरकार ने डीएपी के कीमत 1200 से बढ़ाकर 1350 रुपये प्रति बैग कर दी है। एनपीके खाद के दाम 1175 रुपये से बढ़ाकर 1440 रुपये प्रति बैग हो गए। दूसरी तरफ सिंगल सुपर फॉस्फेट की कीमत 360 से बढ़कर 510 रुपये प्रति बैग हो गई। गेहूं की बुआई में सबसे ज्यादा डीएपी और सिंगल सुपर फास्फेट की मांग रहती है।