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आंखों देखी - कुचलती चली गईं गाड़ियां, चीखें निकलीं तो मौत का मंजर सामने आया
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पीलीभीत। चंद मिनटों में मौत का ऐसा मंजर सामने आया जिसे बयां करते-करते किसानों की आंख में आक्रोश भरे आंसू आ जाते हैं। पीलीभीत जिले के पूरनपुर के तमाम किसान लखीमपुर जिले में घटनास्थल पर मौजूद थे। किसानों ने बताया कि गाड़ियां किसानों को कुचलते हुए आगे बढ़ रही थीं। चीखे निकलीं तो मौत का मंजर सामने आ गया।
रविवार का दिन था। उस वक्त तीन से साढ़े तीन बजे का समय रहा होगा। मैं पूरनपुर क्षेत्र के किसानों के संग करीब था। तिकुनिया के अग्रसेन क्रीडा स्थल पर संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ता थे। तमाम किसान सड़क के किनारे मंत्री का विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र थे। कई किसान हाथों में काले झंडे लिए हुए थे। वे रुक-रुक कर नारेबाजी कर रहे मौके पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी और पुलिसकर्मी हमसे कह रहे थे कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर लेना लेकिन अचानक तेज रफ्तार के साथ दो तीन गाड़ियां आईं। सड़क के किनारे खड़े किसानों को कुचलती हुईं चली गईं। इसमें दो गाड़ियां किसानों को कुचलने के बाद अपना संतुलन खो बैठीं और पलट गईं। गोलियां चलने की आवाज भी आईं। मौके पर भगदड़ मच गई। घायल किसानों को उठाया और पुलिस और प्रशासन की गाड़ियों से अस्पताल भेजा गया।
कुलवंत सिंह, भाकियू के तहसील स्तरीय पदाधिकारी
मौत के मंजर से मचा था कोहराम
मैंने अपनी आंखों से पूरा मंजर देेखा है। किसानों की सभा समापन की ओर थी और किसान अपने-अपने घरों की ओर जाने वाले थे। प्रशासन ने भी विरोध-प्रदर्शन के चलते मंत्री के काफिले का रूट
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डायवर्ट कर दिया था लेकिन अचानक तीन लग्जरी गाड़ियां आईं। इन गाड़ियों ने सड़क के किनारे खड़े किसानों को कुचला तो लोग जान बचाने के लिए खेतों की और दौड़ पड़े। कई लोग नाले में गिर गए। ऐसा लगता कि मंत्री किसानों को सबक सिखाने के लिए जो बयान दिया था, उसी बयान को उनके बेटे ने सच कर दिखाया। जब किसानों को कुचला गया तब मैं करीब 100 मीटर की दूरी पर था मैंने देखा कि सड़क पर भगदड़ है। मैं गया तो देखा कि किसान शहीद हो गए है और कुचलने वालों की भी गाड़ी पलट गई।
दिलबाग सिंह, किसान, पूरनपुर
काले झंडे दिखाने की वजह से कुचला गया किसानों को
जहां किसानों को कुचला गया मैं उसके करीब ही सभा स्थल पर अपने आठ-दस कार्यकर्ताओं के संग में था। कार्यकर्ता काले झंडे दिखाने के लिए खड़े थे। तभी मैंने देखा कि खुली गाड़ी में शस्त्र लहराते हुए कुछ लोग निकल रहे हैं। जब किसानों ने काले झंडे दिखाकर नारेबाजी की तो उन्हें कुचल दिया गया। कुचले जाने से भगदड़ मची और इसके बाद वे गाड़ियां भी पलट गईं जिन्होंने किसानों को कुचला था। ऐसा लगता है किसानों को जानबूझकर मारा गया है।
देवेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू महाशक्ति
शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों को कुचला गया
किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। कोई किसान सड़क पर नहीं था। सभी किसान सड़क के किनारे चल रहे थे। घरों को जाने की तैयारी थी क्योंकि किसानों की सभा खत्म हो गई थी। अचानक आई गाड़ियों के काफिले उन्हें कुचला है। अफरातफरी मची। जो कुचल गए थे। उन्हें उठाने के साथ घायलों को भी उठाया। लेकिन भगदड़ के माहौल में कई किसान खेतों और नाले में भी गिरे। ऐसा मौत का मंजर देखा कि दिल सिहर उठता है। पूरा मंजर पुलिस और प्रशासन ने भी देखा है।
गुरप्रीत सिंह, पूरनपुर
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रविवार का दिन था। उस वक्त तीन से साढ़े तीन बजे का समय रहा होगा। मैं पूरनपुर क्षेत्र के किसानों के संग करीब था। तिकुनिया के अग्रसेन क्रीडा स्थल पर संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ता थे। तमाम किसान सड़क के किनारे मंत्री का विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र थे। कई किसान हाथों में काले झंडे लिए हुए थे। वे रुक-रुक कर नारेबाजी कर रहे मौके पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी और पुलिसकर्मी हमसे कह रहे थे कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर लेना लेकिन अचानक तेज रफ्तार के साथ दो तीन गाड़ियां आईं। सड़क के किनारे खड़े किसानों को कुचलती हुईं चली गईं। इसमें दो गाड़ियां किसानों को कुचलने के बाद अपना संतुलन खो बैठीं और पलट गईं। गोलियां चलने की आवाज भी आईं। मौके पर भगदड़ मच गई। घायल किसानों को उठाया और पुलिस और प्रशासन की गाड़ियों से अस्पताल भेजा गया।
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कुलवंत सिंह, भाकियू के तहसील स्तरीय पदाधिकारी
मौत के मंजर से मचा था कोहराम
मैंने अपनी आंखों से पूरा मंजर देेखा है। किसानों की सभा समापन की ओर थी और किसान अपने-अपने घरों की ओर जाने वाले थे। प्रशासन ने भी विरोध-प्रदर्शन के चलते मंत्री के काफिले का रूट
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डायवर्ट कर दिया था लेकिन अचानक तीन लग्जरी गाड़ियां आईं। इन गाड़ियों ने सड़क के किनारे खड़े किसानों को कुचला तो लोग जान बचाने के लिए खेतों की और दौड़ पड़े। कई लोग नाले में गिर गए। ऐसा लगता कि मंत्री किसानों को सबक सिखाने के लिए जो बयान दिया था, उसी बयान को उनके बेटे ने सच कर दिखाया। जब किसानों को कुचला गया तब मैं करीब 100 मीटर की दूरी पर था मैंने देखा कि सड़क पर भगदड़ है। मैं गया तो देखा कि किसान शहीद हो गए है और कुचलने वालों की भी गाड़ी पलट गई।
दिलबाग सिंह, किसान, पूरनपुर
काले झंडे दिखाने की वजह से कुचला गया किसानों को
जहां किसानों को कुचला गया मैं उसके करीब ही सभा स्थल पर अपने आठ-दस कार्यकर्ताओं के संग में था। कार्यकर्ता काले झंडे दिखाने के लिए खड़े थे। तभी मैंने देखा कि खुली गाड़ी में शस्त्र लहराते हुए कुछ लोग निकल रहे हैं। जब किसानों ने काले झंडे दिखाकर नारेबाजी की तो उन्हें कुचल दिया गया। कुचले जाने से भगदड़ मची और इसके बाद वे गाड़ियां भी पलट गईं जिन्होंने किसानों को कुचला था। ऐसा लगता है किसानों को जानबूझकर मारा गया है।
देवेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू महाशक्ति
शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों को कुचला गया
किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। कोई किसान सड़क पर नहीं था। सभी किसान सड़क के किनारे चल रहे थे। घरों को जाने की तैयारी थी क्योंकि किसानों की सभा खत्म हो गई थी। अचानक आई गाड़ियों के काफिले उन्हें कुचला है। अफरातफरी मची। जो कुचल गए थे। उन्हें उठाने के साथ घायलों को भी उठाया। लेकिन भगदड़ के माहौल में कई किसान खेतों और नाले में भी गिरे। ऐसा मौत का मंजर देखा कि दिल सिहर उठता है। पूरा मंजर पुलिस और प्रशासन ने भी देखा है।
गुरप्रीत सिंह, पूरनपुर