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Pilibhit News: केरल मॉडल से थमेगी मानव-वन्यजीव संघर्ष की रफ्तार

Thu, 20 Aug 2026 01:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 01:48 AM IST
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Kerala model to curb the pace of human-wildlife conflict
केरल से पांच दिवसीय प्रशिक्षण लेकर लौटे पीटीआर के डीएफओ, अधिकारियों के साथ साझा किए वैज्ञानिक प्रबंधन के अनुभव
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पीलीभीत। तराई के जंगलों से सटे गांवों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व अब केरल मॉडल का अध्ययन कर उसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने पर मंथन करेगा। केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण लेकर लौटे पीटीआर के डीएफओ मनीष सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान सीखी गईं साक्ष्य आधारित रणनीतियों, तकनीकी उपायों और अंतरविभागीय समन्वय की जानकारी अधिकारियों व अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ साझा की।
प्रशिक्षण में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का वैज्ञानिक तरीके से आकलन कर उनके आधार पर रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया। केरल में वन्यजीवों की मौजूदगी और संघर्ष की तीव्रता के आधार पर क्षेत्रों को अलग-अलग जोन में बांटकर समस्या को चार स्तरों में वर्गीकृत किया गया है। लेवल-04 को सबसे गंभीर स्थिति माना जाता है, जिसमें तत्काल बड़े हस्तक्षेप की जरूरत होती है। लेवल-03 में तनावपूर्ण स्थिति को स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सहयोग से नियंत्रित किया जाता है। लेवल-02 में संवाद और समन्वय के जरिए समाधान निकाला जाता है, जबकि सामान्य स्थिति को लेवल-01 में रखा गया है।
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डीएफओ ने बताया कि केरल में हाथियों के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पहले लेवल-04 तक पहुंच गई थी। मिशन मोड में किए गए प्रयासों से इसे अब लेवल-02 तक लाया गया है। इसी अनुभव का अध्ययन कर पीटीआर में बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्यजीवों से जुड़े संघर्ष के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी। केरल मॉडल की खासियत यह है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की जिम्मेदारी केवल वन विभाग तक सीमित नहीं रहती। उच्चस्तरीय समिति हर माह स्थिति की समीक्षा करती है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, वन्यजीव प्रबंधन और ग्रामीणों की आजीविका सुरक्षा के लिए अलग-अलग मिशन बनाकर काम किया जाता है। पीटीआर में भी विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने की तैयारी है। संवाद
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सर्पा एप की तर्ज पर विकसित हो सकती है व्यवस्था
केरल में सांपों से होने वाले हादसों पर नियंत्रण के लिए सेंट्रलाइज्ड सर्पा एप संचालित है। सांप दिखने पर नागरिक फोटो अपलोड करते हैं और जीपीएस लोकेशन कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम तैनात है, जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित रेस्क्यू करती है। इसी तर्ज पर पीटीआर प्रशासन भविष्य में वन्यजीवों से संबंधित सूचना और त्वरित रेस्क्यू के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने की रणनीति पर भी जोर दिया जा रहा है।
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