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काशीराम कॉलोनी में पानी और बिजली की किल्लत
पीलीभीत।
Updated Mon, 01 Jun 2015 11:29 PM IST
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सूबे का निजाम बदलने के बाद कांशीराम कॉलोनी
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(आवास विकास) में समस्याओं की झड़ी लग गई। कॉलोनीवासियों को शुद्ध पेयजल और
बिजली की किल्लत झेलनी पड़ रही है। साफ-सफाई व्यवस्था से भी दो-चार होना
पड़ रहा है। अधिकारी भी अब इनकी समस्याओं को कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
तत्कालीन बसपा सरकार ने वर्ष 2009 में 240 परिवारों को इस कॉलोनी में बसाया था। सरकार रहने तक सुविधाएं मिलती रहीं, लेकिन सरकार बदलते ही सुविधाओं का अकाल हो गया। गंदगी से पटी सड़कें और बजबजाती नालियां, 1600 आबादी वाली इस कॉलोनी की पहचान बन चुकी हैं। सड़कों पर बिखरा कूड़ा और जगह-जगह कूड़े के लगे ढेर कॉलोनी के हालात खुद बयां कर रहे हैं। चोक नालियों और सड़कों की सफाई खुद कॉलोनीवासी करते हैं। कॉलोनी की बिजली सप्लाई अक्सर काट दी जाती है, जबकि आसपास के मोहल्लों में सप्लाई रहती है। स्ट्रीट लाइट पूरी तरह से ठप पड़ी हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल की है। यहां लगे 10 हैंडपंपों में मात्र चार हैंडपंप चालू हालत में तो हैं, लेकिन उनका पानी पीने योग्य नहीं है। पांच माह पूर्व नगरपालिका ने पेयजल सप्लाई ओवरहेड टैंक से जोड़ दी थी, लेकिन दूसरी और तीसरी मंजिल पर पानी की एक भी बूंद नहीं पहुंच रही। मजबूरन कॉलोनी वालों को घरों से 50-50 मीटर दूर हैंडपंपों से पानी लाना पड़ता है। कॉलोनी के अधिकतर सीवर टैंक भी फुल हो चुके हैं। टैंकों के आसपास बने क्वार्टरों में रहने वालों का बुरा हाल है। इनसे उठती दुर्गंध ने हर किसी का जीना मुहाल कर रखा है।
तत्कालीन बसपा सरकार ने वर्ष 2009 में 240 परिवारों को इस कॉलोनी में बसाया था। सरकार रहने तक सुविधाएं मिलती रहीं, लेकिन सरकार बदलते ही सुविधाओं का अकाल हो गया। गंदगी से पटी सड़कें और बजबजाती नालियां, 1600 आबादी वाली इस कॉलोनी की पहचान बन चुकी हैं। सड़कों पर बिखरा कूड़ा और जगह-जगह कूड़े के लगे ढेर कॉलोनी के हालात खुद बयां कर रहे हैं। चोक नालियों और सड़कों की सफाई खुद कॉलोनीवासी करते हैं। कॉलोनी की बिजली सप्लाई अक्सर काट दी जाती है, जबकि आसपास के मोहल्लों में सप्लाई रहती है। स्ट्रीट लाइट पूरी तरह से ठप पड़ी हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल की है। यहां लगे 10 हैंडपंपों में मात्र चार हैंडपंप चालू हालत में तो हैं, लेकिन उनका पानी पीने योग्य नहीं है। पांच माह पूर्व नगरपालिका ने पेयजल सप्लाई ओवरहेड टैंक से जोड़ दी थी, लेकिन दूसरी और तीसरी मंजिल पर पानी की एक भी बूंद नहीं पहुंच रही। मजबूरन कॉलोनी वालों को घरों से 50-50 मीटर दूर हैंडपंपों से पानी लाना पड़ता है। कॉलोनी के अधिकतर सीवर टैंक भी फुल हो चुके हैं। टैंकों के आसपास बने क्वार्टरों में रहने वालों का बुरा हाल है। इनसे उठती दुर्गंध ने हर किसी का जीना मुहाल कर रखा है।