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कारगिल विजय दिवस विशेषः कारगिल में दुश्मनों को पीछे खदेड़ते हुए शहीद हो गए थे हवलदार सुरेंद्र सिंह

Sat, 25 Jul 2020 02:38 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 02:38 AM IST
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kargil vijay diwas
पूरनपुर। कल कारगिल विजय दिवस है। 20 साल पहले पड़ोसी देश पाकिस्तान ने आतंकियों को ढाल बनाकर कारगिल में अचानक हमला बोल दिया था। उसमें भारतीय सेना ने पूरी बहादुरी से पाक समर्थित आतंकियों और दुश्मन की सेना से लड़ते हुए उन्हें पीछे खदेड़ा। पाकिस्तान के सैनिकों को हारकर पीछे लौटना पड़ा। उस कारगिल युद्ध में पीलीभीत का भी लाल देश की खातिर शहीद हो गया था। मगर, शहीद होने से पहले हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा ने दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए द्रास सेक्टर से पीछे खदेड़ते हुए पाक सेना का भारी नुकसान पहुंचाया था। उसके बाद वह वतन की आन बान और शान की खातिर शहीद हो गए।
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शहीद सूबेदार का परिवार अब भी क्षेत्र के रुदपुर हरीपुर गांव में रहता है। बलागर सिंह के घर चार जनवरी 1961 को जन्मे सुरेंद्र सिंह लवाणा 18 अगस्त 1989 को सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए उन्हें भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में तैनात किया गया। वहां 10 दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेडें हुईं। 29 मई 1999 को वतन की रक्षा करते हुए सूबेदार सुरेंद्र सिंह लवाणा शहीद हो गए थे। उन्हें उच्च सेवा मेडल और सिंह सेवा मेडल से पुरस्कृत किया गया था।
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पति की शहादत के बाद पत्नी गुरमीत कौर की दुनिया सूनी हो गई। मगर, उसने फिर भी हौसला नहीं खोया। अपना ध्यान बच्चों की परवरिश पर लगाया। हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा का सपना था कि वह आगे चलकर अपने दोनों बेटों को भी फौज में भर्ती कराएंगे। पति की शहादत के बाद गुरमीत कौर ने भी अपने बेटों को फौज में शामिल करने का मकसद बनाया। सेना के कुछ अफसर उनके दोनों बेटों को सैनिक स्कूल में भर्ती कराने के लिए अपने साथ ही ले गए। मगर, दोनों बेटे कुछ समय बाद वापस घर आ गए। उसके बाद एक हादसे में बड़े बेटे की जान चली गई। परिवार को तमाम दुख सहन करने पड़े, मगर, शहीद की वीर नारी को गर्व है कि उसके पति ने देश की खातिर शहादत दी। उसका कहना है कि परिवार का जो भी सम्मान है, वह पति की खातिर है। शहीद के पूरे परिवार को भी इस बात का गर्व है कि सुरेंद्र सिंह ने कारगिल विजय में अपना योगदान देकर देश की रक्षा की।
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पिता और दो भाइयों ने भी फौज में रहकर की देश सेवा
शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा के पिता बलागर सिंह, शहीद के सबसे बड़े भाई रंजीत सिंह और छोटे अमरजीत सिंह ने भी फौज में रहकर देश की सेवा की। शहीद के मझले भाई गुरमेज सिंह और छोटे भाई कृपाल सिंह, सतनाम सिंह घर में रहकर खेती करते हैं। पूरे परिवार को हर साल आने वाला कारगिल विजय दिवस अच्छे से याद है।
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