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गरीबों को नौ साल में नहीं हो पाया 300 कांशीराम आवासों का आवंटन

Sun, 06 Sep 2020 06:17 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2020 06:17 PM IST
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Kanshiram awas
बीसलपुर। बसपा सरकार में गरीबों के रहने के लिए वर्ष 2011 में 300 आवासों की कांशीराम कॉलोनी बनाई गई थी। जब तक इन आवासों के आवंटन का नंबर आया तब तक राज्य में सपा की सरकार बन गई। अफसर इस ओर से पूूरी तरह शिथिल हो गए। पांच साल सपा की सरकार रहने के बाद साढ़े तीन साल भाजपा की सरकार को भी हो चुके हैं, लेकिन आठ करोड़ सें ज्यादा की लागत से बने कांशीराम आवास नौ साल बाद भी गरीबों को आवंटित नहीं हो पाए। जबकि आवास विहीन तमाम परिवार दशकों से किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं और झुग्गी झोंपड़ियों में रह रहे हैं।
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बसपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए प्रत्येक शहर और कस्बे में कांशीराम कॉलोनियां बनाई थीं। इसी क्रम में बीसलपुर में भी 300 आवासों की कांशीराम कॉलोनी बनी थी। इन आवासों का निर्माण आवास विकास परिषद (बरेली खंड) ने 8.10 करोड़ की लागत से किया था। कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तृतीय चरण में बने इन आवासों का आवंटन बसपा सरकार में नहीं हो पाया। उसके बाद प्रदेश में सपा की सरकार बन गई। उसमें कांशीराम आवास उपेक्षित हो गए। सपा सरकार ने कांशीराम शहरी आवास योजना की जगह लोहिया आवास योजना चला दी। लिहाजा, कांशीराम कॉलोनी में 8.10 करोड़ की लागत से बने आवास आवंटन में किसी ने भी पहल नहीं की। फिर वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार आई तो कांशीराम आवास और लोहिया आवासीय योजनाओं की जगह प्रधानमंत्री आवास योजना लागू कर दी गई। परिणाम स्वरूप कांशीराम आवास फिर आवंटित नहीं हो पाए। अब कांशीराम आवासीय कॉलोनी के भवन जर्जर होने लगे हैं, जबकि तमाम गरीब परिवार किराए के घर या सड़क पर झुग्गी झोंपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। कांशीराम आवासों में जुआरी दिन में आकर जुआ खेलते हैं। रात में यहां असामाजिक तत्व शरण लेते हैं। बसपा की सरकार क्या गई, अफसरों ने कांशीराम आवास आवंटन प्रक्रिया से स्वयं को दूर कर लिया। जबकि यही अफसर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के दौरे की भनक लगते ही कांशीराम कॉलोनी की तरफ भागने लगते थे।
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क्या कहते हैं पात्र
14 साल से किराए के मकान में रह रहा हूं। कांशीराम आवास के लिए दस साल पहले आवेदन किया था। आवास नहीं मिला। नगरपालिका में कई प्रार्थना पत्र दिए। कोई नतीजा नहीं निकला। आवास मिलने की उम्मीद पूरी नहीं हुई। -राजीव कुमार, मोहल्ला दुर्गाप्रसाद।
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हम 2500 रुपये महीना किराए के मकान में रहते हैं। परिवार में तीन लोग हैं। कांशीराम कालोनी में आवास लेने के लिए नगरपालिका के तमाम चक्कर लगाए, मगर नतीजा नहीं निकला। करोड़ों के मकान बेकार पड़े हैं। -अतुल मिश्रा, मोहल्ला पटेलनगर
करोड़ों की लागत से बने कांशीराम आवास बेकार पड़े हैं। अब ये जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। किसी को दे देेते तो परिवार का गुजारा चलता। नगरपालिका ने कार्रवाई नहीं की। हमें आवास मिलने की उम्मीद नहीं है। -योगेंद्र कुमार, मोहल्ला बख्तावरलाल।
हमें तो कांशीराम कॉलोनी में आवास मिलने की उम्मीद नहीं रह गई है। कांशीराम कालोनी बनते ही आवास पाने के लिए नगरपालिका में चक्कर लगाए थे। अब तक आवास नहीं मिल पाया। अब तो उम्मीद टूट चुकी है। -जसवीर, मोहल्ला सराय कालोनी।

सात सितंबर तक जमा होंगे आवेदन
कांशीराम कालोनी के आवास आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पात्र अपने आवेदन सात सितंबर तक जमा कर सकते हैं। आवास आवंटन की नियमावली भी बना ली गई है। नियमानुसार आवासों का आवंटन किया जाएगा। -वंदना शर्मा, ईओ नगरपालिका बीसलपुर
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