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Pilibhit News: पीटीआर में बघेरा एप से जंगल सफारी वाहनों को करेंगे ट्रैक
Fri, 28 Feb 2025 11:48 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 28 Feb 2025 11:48 PM IST
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पीलीभीत। कान्हा टाइगर रिजर्व से भ्रमण कर लौटे पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) के अफसर वहां इस्तेमाल होने वाली कई तकनीक को स्थानीय स्तर पर लागू करने की तैयारी में है। इनमें बघेरा एप भी शामिल है। इस एप के माध्यम से जंगल सफारी वाहनों को ट्रैक किया जाता है। वाहन की स्पीड और लोकेशन का भी पता लगाया जा सकता है। कई अन्य बदलाव भी जल्द होंगे।
पिछले दिनों पीटीआर के एसडीओ रमेश चौहान के नेतृत्व में एक टीम कान्हा टाइगर रिजर्व के भ्रमण पर गई थी। भ्रमण का उद्देश्य वहां के वन और वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यटन के बारे में करीब से देखना और समझाना था। टीम ने वहां रुककर कई तकनीक के बारे में जाना।
कान्हा टाइगर रिजर्व से लौटकर आई टीम ने अफसरों से अनुभव साझा किए। बघेरा एप पर अधिक जोर दिया गया। बताया कि बघेरा एप का प्रयोग जंगल सफारी वाहनों को ट्रैक करने के लिए किया जाता है। इस एप के माध्यम से सफारी वाहनों की गति और लोकेशन को ट्रेस कर जरूरी निर्देश दिए जा सकते हैं।
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इसके साथ शनिवार और रविवार को आम दिनों की तुलना में पर्यटन दर में पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी के बिंदु पर विचार किया जा रहा है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व की कुछ व्यवस्थाओं को पीटीआर में जल्द ही लागू कर दिया जाएगा।
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वामो तकनीक से की जाती है हिरनों की शिफ्टिंग
अफसरों ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में हिरनों को शिफ्ट करने की तकनीक काफी बेहतर है। अमूमन पकड़ने के दौरान हिरन की हार्ट अटैक से मौत हो जाती है। ऐसे में उनकी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए शिफ्टिंग करने की प्रक्रिया पर अमल करने के लिए वामो तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसके तहत ग्रासलैंड क्षेत्र के एक दायरे में जाल लगाकर वाहन को खड़ा किया जाता है। वाहन को भी घास आदि से ढक दिया जाता है। इसके बाद हिरन को उस वाहन तक लाया जाता है। हालांकि वन अफसर पीटीआर में हिरनों की शिफ्टिंग आदि न होने की बात कह रहे हैं।
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पिछले दिनों पीटीआर के एसडीओ रमेश चौहान के नेतृत्व में एक टीम कान्हा टाइगर रिजर्व के भ्रमण पर गई थी। भ्रमण का उद्देश्य वहां के वन और वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यटन के बारे में करीब से देखना और समझाना था। टीम ने वहां रुककर कई तकनीक के बारे में जाना।
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कान्हा टाइगर रिजर्व से लौटकर आई टीम ने अफसरों से अनुभव साझा किए। बघेरा एप पर अधिक जोर दिया गया। बताया कि बघेरा एप का प्रयोग जंगल सफारी वाहनों को ट्रैक करने के लिए किया जाता है। इस एप के माध्यम से सफारी वाहनों की गति और लोकेशन को ट्रेस कर जरूरी निर्देश दिए जा सकते हैं।
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इसके साथ शनिवार और रविवार को आम दिनों की तुलना में पर्यटन दर में पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी के बिंदु पर विचार किया जा रहा है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व की कुछ व्यवस्थाओं को पीटीआर में जल्द ही लागू कर दिया जाएगा।
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वामो तकनीक से की जाती है हिरनों की शिफ्टिंग
अफसरों ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में हिरनों को शिफ्ट करने की तकनीक काफी बेहतर है। अमूमन पकड़ने के दौरान हिरन की हार्ट अटैक से मौत हो जाती है। ऐसे में उनकी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए शिफ्टिंग करने की प्रक्रिया पर अमल करने के लिए वामो तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसके तहत ग्रासलैंड क्षेत्र के एक दायरे में जाल लगाकर वाहन को खड़ा किया जाता है। वाहन को भी घास आदि से ढक दिया जाता है। इसके बाद हिरन को उस वाहन तक लाया जाता है। हालांकि वन अफसर पीटीआर में हिरनों की शिफ्टिंग आदि न होने की बात कह रहे हैं।