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जांच के लिए पहुंची आईवीआरआई की टीम, पांच गांवों से लिए सैंपल
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बीमार पशुओं की जांच करते टीम सदस्य। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पूरनपुर, घुंघचाई क्षेत्र के दर्जनों गांवों में सैकड़ों जानवरों की मौत से पशुपालक चिंतित हैं। बीमारी के बारे में पता लगाने के लिए मंगलवार को भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली से वैज्ञानिकों की एक टीम जांच को यहां पहुंची। टीम ने पांच गांवों में बीमार चल रहे नौ पालतू पशुओं के सैंपल लिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। फिलहाल पशुपालकों को एहतियात बरतने को कहा है।
दरअसल पिछले कुछ दिनों से पूरनपुर, घुंघचाई, शाहगढ़ आदि क्षेत्रों में सैकड़ों पशुओं की मौत हो गई। विभागीय अधिकारियों का कहना था कि मुंहपका-खुरपका रोग (एफएमडी-फूट एंड माउथ डिसीज) की वैक्सीन न लगने से वायरस मजबूत हुआ है। जिस कारण जानवरों की मौत हुई। वैज्ञानिकों ने यह भी अंदेशा जताया कि एफएमडी का यह नया वैरिएंट हो सकता है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अफसर चेते। जिसके बाद जांच के लिए सैंपल आईवीआरआई भेजे गए। मंगलवार को वैज्ञानिकों की टीम ने पांच गांवों से संक्रमित जानवरों के सैंपल लिए।
जांच में हर पहलू खंगालेगी वैज्ञानिकों की टीम
सैंपल की जांच में वैज्ञानिक सभी पहलुओं को खंगालेेंगे ताकि स्पष्ट हो सके कि एफएमडी का वायरस है या अन्य कोई। जांच को आए आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. विशाल चंदर का कहना है कि अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। एफएमडी का वायरस हो सकता है। वैक्सीन न लगने से वायरस ज्यादा खतरनाक हो गया है। उन्होंने बताया कि वायरल डिसीज भी हो सकती है जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है।
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इनकी टीम पहुंची
आईवीआरआई से डॉ. विशाल चंदर, डॉ. हर्ष जोगी, डॉ. रिचा और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद खरे, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पूरनपुर डॉ. राजीव मिश्र और न्यूरिया से डॉ. जेपी वर्मा।
इन गांवों में लिए गए सैंपल
-गोपालपुर- पाल सिंह की भैंस और दयाराम की भैंस
- चंदोखा- सीताराम की भैंस और इतवारी लाल की गाय
- सेमरिया- शुशीला देवी की भैंस
- जनकपुर- ओम प्रकाश का बैल और बाबूराम की भैंस
-घुंघचाई- राज किशोर बाजपेई की भैंस और होरी लाल की भैंस
सूक्ष्म वायरस से फैलता है खुरपका और मुंहपका
खुरपका मुंहपका फैलाने वाले वायरस को एफएमडी वायरस के नाम से जानते हैं। यह सूक्ष्म वायरस होता है। इस रोग के कारण गाय, भैंस, भेड़, ऊंट जैसे पशु बीमार पड़ जाते हैं। खुरपका के कारण पशुओं के पैरों में जख्म हो जाते हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से नहीं जात पाते है, न ही ढंग से बैठ पाते है। मुंहपका के कारण पशुओं के मुंह में सूजन आती है। छाले पड़ते हैं पशु चारा तक नहीं ले पाते हैं।
आईवीआरआई टीम के साथ अपर निदेशक भी जांच के लिए पहुंचे
पशुओं की मौत के मामले में मंगलवार को आईवीआरआई से वैज्ञानिकों की टीम पूरनपुर और घुंघचाई क्षेत्र के गांवों में जांच को पहुंची। वहीं अपर निदेशक डॉ. बीघा सिंह ने गांव लालपुर में पहुंचकर पशुपालकों से जानकारी कर पशुओं की सैंपलिंग कराई। गांव सिमरिया, अजीतपुर बिल्हा, जनकापुर, घुंघचाई, गोपालपुर, चंदोखा, जनकापुर, कलीनगर तहसील के गांव लालपुर, कुंवरपुर सहित कुछ गांवों में पशुओं में फैली बीमारी से उनकी मौत हो रही है। सर्वाधिक गांव सिमरिया, लालपुर, कुंवरपुर में पशुओं की मौत हुई। पशु चिकित्सकों ने पशुओं का सीरम और लार का सैंपल लिया। डिप्टी सीवीओ डॉ. राजीव मिश्र ने बताया कि वैज्ञानिकों में पहली बार ऐसी बीमारी प्रकाश में आने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि कौन से वायरस से पशुओं की मौत हो रही है। इसकी जानकारी जांच के बाद पता चलेगी। उधर, पशुओं की बीमारी न थमने पर पशु पालक परेशान है।
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दरअसल पिछले कुछ दिनों से पूरनपुर, घुंघचाई, शाहगढ़ आदि क्षेत्रों में सैकड़ों पशुओं की मौत हो गई। विभागीय अधिकारियों का कहना था कि मुंहपका-खुरपका रोग (एफएमडी-फूट एंड माउथ डिसीज) की वैक्सीन न लगने से वायरस मजबूत हुआ है। जिस कारण जानवरों की मौत हुई। वैज्ञानिकों ने यह भी अंदेशा जताया कि एफएमडी का यह नया वैरिएंट हो सकता है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अफसर चेते। जिसके बाद जांच के लिए सैंपल आईवीआरआई भेजे गए। मंगलवार को वैज्ञानिकों की टीम ने पांच गांवों से संक्रमित जानवरों के सैंपल लिए।
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जांच में हर पहलू खंगालेगी वैज्ञानिकों की टीम
सैंपल की जांच में वैज्ञानिक सभी पहलुओं को खंगालेेंगे ताकि स्पष्ट हो सके कि एफएमडी का वायरस है या अन्य कोई। जांच को आए आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. विशाल चंदर का कहना है कि अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। एफएमडी का वायरस हो सकता है। वैक्सीन न लगने से वायरस ज्यादा खतरनाक हो गया है। उन्होंने बताया कि वायरल डिसीज भी हो सकती है जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है।
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इनकी टीम पहुंची
आईवीआरआई से डॉ. विशाल चंदर, डॉ. हर्ष जोगी, डॉ. रिचा और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद खरे, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पूरनपुर डॉ. राजीव मिश्र और न्यूरिया से डॉ. जेपी वर्मा।
इन गांवों में लिए गए सैंपल
-गोपालपुर- पाल सिंह की भैंस और दयाराम की भैंस
- चंदोखा- सीताराम की भैंस और इतवारी लाल की गाय
- सेमरिया- शुशीला देवी की भैंस
- जनकपुर- ओम प्रकाश का बैल और बाबूराम की भैंस
-घुंघचाई- राज किशोर बाजपेई की भैंस और होरी लाल की भैंस
सूक्ष्म वायरस से फैलता है खुरपका और मुंहपका
खुरपका मुंहपका फैलाने वाले वायरस को एफएमडी वायरस के नाम से जानते हैं। यह सूक्ष्म वायरस होता है। इस रोग के कारण गाय, भैंस, भेड़, ऊंट जैसे पशु बीमार पड़ जाते हैं। खुरपका के कारण पशुओं के पैरों में जख्म हो जाते हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से नहीं जात पाते है, न ही ढंग से बैठ पाते है। मुंहपका के कारण पशुओं के मुंह में सूजन आती है। छाले पड़ते हैं पशु चारा तक नहीं ले पाते हैं।
आईवीआरआई टीम के साथ अपर निदेशक भी जांच के लिए पहुंचे
पशुओं की मौत के मामले में मंगलवार को आईवीआरआई से वैज्ञानिकों की टीम पूरनपुर और घुंघचाई क्षेत्र के गांवों में जांच को पहुंची। वहीं अपर निदेशक डॉ. बीघा सिंह ने गांव लालपुर में पहुंचकर पशुपालकों से जानकारी कर पशुओं की सैंपलिंग कराई। गांव सिमरिया, अजीतपुर बिल्हा, जनकापुर, घुंघचाई, गोपालपुर, चंदोखा, जनकापुर, कलीनगर तहसील के गांव लालपुर, कुंवरपुर सहित कुछ गांवों में पशुओं में फैली बीमारी से उनकी मौत हो रही है। सर्वाधिक गांव सिमरिया, लालपुर, कुंवरपुर में पशुओं की मौत हुई। पशु चिकित्सकों ने पशुओं का सीरम और लार का सैंपल लिया। डिप्टी सीवीओ डॉ. राजीव मिश्र ने बताया कि वैज्ञानिकों में पहली बार ऐसी बीमारी प्रकाश में आने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि कौन से वायरस से पशुओं की मौत हो रही है। इसकी जानकारी जांच के बाद पता चलेगी। उधर, पशुओं की बीमारी न थमने पर पशु पालक परेशान है।